बारिश के मौसम में अक्सर कई घरों में कीड़े बहुत संख्या में आ जाते हैं. इन कीड़ों के बच्चों के कान में जाने का खतरा रहता है. वहीं कई बार-बार खेल खेल में बच्चे अपने कान में कुछ डाल लेते हैं. कान के भीतर कुछ चले जाने पर बच्चे जब उसे निकाल नहीं पाते तो वो परेशान होने लगते हैं. या कान में बाहर की कोई चीज जाने पर दर्द भी होने लगता है. ऐसे में पेरेंट्स काफी घबरा जाते हैं और सुने-सुनाए घरेलू नुस्खे अपनाने लगते हैं जोकि बच्चों के लिए घातक हो सकते हैं. आइए एक्सपर्ट से जानें कि अगर कान में कुछ चला जाए तो ऐसे में क्या करें.
अक्सर लोग सलाह देते हैं कि अगर कान में बरसात में कोई कीड़ा बच्चे के कान में चला जाए तो कान में पानी डाल दें तो वो बाहर आ जाता है. वहीं कई लोग तेल को हल्का गरम करके कान में डालने की सलाह देते हैं. विशेषज्ञ ऐसी सलाह को एकदम गलत मानते हैं. कान में इयर बड या माचिश की तीली डालकर भी लोग कान से कीड़ा या अंदर गई चीज निकालने का प्रयास करते हैं जोकि सरासर गलत है.
मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज और लोक नायक अस्पताल दिल्ली में नाक-कान-गला रोग विभाग के निदेशक-प्रोफेसर डॉ विकास मल्होत्रा कहते हैं कि अगर बच्चे के कान में कुछ चला जाए तो भूलकर भी उससे छेड़खानी न करें. अगर आपके घर के पास कोई अच्छा अस्पताल या क्लीनिक मौजूद नहीं है तभी कुछ नुस्खा अपनाने की कोशिश कर सकते हैं, वरना भूलकर भी कान में पानी या गरम तेल न डालें.
डॉ मल्होत्रा कहते हैं कि अगर कान में कोई कीड़ा घुस गया तो भी इतना परेशान होने की जरूरत नहीं है. उसके लिए अगर नुस्खे की बात करें तो वो कहते हैं कि आप किसी अंधेरे कमरे में बच्चे को ले जाकर कान के बाहर रोशनी दिखाएं तो कई बार कीड़ा रोशनी देखकर खुद ब खुद बाहर आ जाता है. इसके लिए आपको धैर्य के साथ दस मिनट तक ये ट्राई करना होगा.
अगर घर के पास अस्पताल या कोई डॉक्टर क्लीनिक अवेलेबल नहीं है तो आप नॉर्मल आयल डाल सकते हैं लेकिन ऑयल गर्म करके बिल्कुल न डालें. आप कान में नॉर्मल मस्टर्ड या ऑलिव ऑयल डाल सकते हैं, जिससे कीड़ा मर जाएगा और मरने के बाद वो आसानी से बाहर आ जाएगा, इसमें इतना परेशान न हों. अगर कीड़ा जिंदा नहीं है तो टेंशन नहीं है. कान में सरसों का तेल डाल दें तो ऑक्सीजन नहीं मिलेगी और वो बाहर की तरफ आएगा. वो कहते हैं कि ये नुस्खा तभी अपनाएं जब बहुत एमरजेंसी हो.
कई लोगों को लगता है कि कान में कुछ जाने से बच्चे के कान का पर्दा फट सकता है या कान में गई चीज दिमाग में पहुंच सकती है. डॉ मल्होत्रा इस बात को पूरी तरह से नकारते हैं. वो कहते हैं कि कान में इयर कैनल टेढ़ी होती है, इससे कोई चीज जाकर बीच में अटक जाती है. इसके अलावा कान का पर्दा काफी दूर होता है, हालांकि बच्चों में यह थोड़ा पास होता है लेकिन ये इतना कमजोर नहीं होता कि किसी चीज के जाने से फट जाए.
डॉ मल्होत्रा कहते हैं कि लेकिन कई बार हमारे पास ऐसे मामले आते हैं जिसमें कान में गई चीज को निकालने के चक्कर में बच्चे के कान में इंजरी हो जाती है. कान में इयर बड या कोई माचिश की तीली डालकर लोग बच्चे के कान को लहुलूहान कर देते हैं. कान का पर्दा बहुत आसानी से नहीं फटता लेकिन उसको निकालने के चक्कर में ऐसी इंजरी जरूर हो जाती है. कभी कोई कीड़ा या कोई चीज बिना छेड़खानी किए पर्दे को फाड़कर बहुत अंदर नहीं जा सकती, वो इयर कैनल में ही फंसी रहती है.
डॉक्टर कहते हैं कि माता-पिता को बच्चों के कानों को लेकर काफी सजग रहना चाहिए. कई लोग बच्चों के कान साफ करने के लिए उसमें इयर बड डालते हैं या कई लोग कानों में सफाई के लिए तेल भी डालते हैं, जबकि ये बिल्कुल गलत है. कान में रोज रोज तेल या पानी डालने से फंगल इंफेक्शन के चांसेज रहते हैं. पेरेंट्स को यह पता होना चाहिए कि कान एक सेल्फ क्लीनिंग आर्गन है, यह खुद ब खुद अपने को साफ कर लेता है. अगर आपको छोटे बच्चे के कान साफ भी करने हैं तो कोई पुरानी साफ सुथरा बनियान या सॉफ्ट सूती कपड़े से उंगली से ऊपर ऊपर ही साफ करें, कभी कान के अंदर कुछ न डालें. कुछ लोग रूटीन में कान में इयर बड डालकर सफाई करते हैं, ये भी एक गलत तरीका है, कान में इयर बड सिर्फ डॉक्टरी सलाह पर ही डालनी चाहिए, अपनी मर्जी से कभी नहीं.