कवि-शायरों और हिंदी फिल्मों ने दिल को अहसासों से लबरेज अंग के तौर पर स्थापित किया है. असल में हमारा दिल कुदरत से बख्शे किसी साज से कम नहीं है, जो एक लय में हर वक्त चलता रहता है. इसका थम जाना ही जिंदगी का थम जाना है, लेकिन इसकी लय ताल में कमी-बेशी भी बड़ा इशारा करती है, इसलिए दिल को हल्के से न लें. इसकी हर धड़कन पर नजर रखें. आपको जब अपनी ही धड़कन महसूस होने लगे तो समझ लीजिए वक्त आ गया है, दिल का हाल जानने का.
मैक्स हेल्थकेयर कॉर्डियोलॉजी के चेयरमैन एंड हेड डॉ बलबीर सिंह कहते हैं कि दिल एक ऐसा अंग है जो एकदम शांति से वर्क कर रहा है. लेकिन यदि हार्ट की गति तेज होती है, जो आपको सुनाई देती है तो ये प्रॉब्लम तक पहुंचा देती है. डॉ बलबीर कहते हैं कि सामान्यत: इंसान की हार्ट बीट 50 से 120 प्रति मिनट सामान्य मानी जाती है. ये कभी बढ़कर 130 प्रति मिनट भी जा सकती है. लेकिन इससे ऊपर या नीचे जा रही है तो ये चिंता का विषय है. अगर आप जब वॉक करते हैं कोई काम करते हैं और धड़कन महसूस होती है तो ऐसे में आपको जांच जरूर करनी चाहिए.
फियर-एंजाइटी में भी महसूस होती है धड़कन
कई बार लोगों की किसी फियर या एंजाइटी से भी हार्ट बीट बढ़ जाती है. इस दौरान अपनी हार्ट बीट जरूर काउंट करनी चाहिए. ये अगर 130 से ज्यादा बढ़ जाती है तो ये खतरनाक है. हार्ट बीट थायरॉयड से भी बढ़ती या घटती या असामान्य हो जाती है. आप किसी मनोचिकित्सक को दिखा रहे हैं तो उनके इलाज के साथ साथ हार्ट की गतिविधि पर भी नजर रखनी चाहिए.
अगर रिदम की बात करें तो हार्ट बहुत रिदमिक ऑर्गन है. जब से हम पैदा होते हैं, इसकी रिदम रेगुलरली बनी रहती है. जब ये इररेगुलर हो जाती है तो ये ही खतरे की घंटी है. इसमें ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है, आप पहले कुछ दिनों तक ऑक्सीमीटर या बीपी ऑपरेटर या खुद नब्ज फील करके धड़कन पर नजर रख सकते हैं. अगर वॉक करने के बाद आपकी धड़कन 130 से ज्यादा बढ़ती है तो आपको चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए.
दिल का ख्याल कैसे रखें
दिल पर आपकी लाइफस्टाइल का सीधा असर पड़ता है. अगर हम हेल्दी फूड और बैलेंस डाइट फॉलो करें तो दिल सुरक्षित रहता है. स्मोकिंग और ड्रिंक से बचना चाहिए. इसके अलावा डायबिटीज पर नियंत्रण रखें. हमें ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की जांच भी समय समय पर करानी चाहिए.
हार्ट रेट बढ़ने का सबसे बड़ा पैमाना ये है कि अगर आपकी हार्ट रेट अधिक समय तक ज्यादा बढ़ी ही रहती है तो ये एलर्ट होने वाली स्थिति है. जब आप जिम या एक्सरसाइज शुरू करते हैं तबभी आपको हार्ट रेट की लिमिटेशन को ध्यान रखना और इसे फॉलो करना बहुत जरूरी होता है. जो लोग इसे नजरंदाज करके फिजिकल ट्रेनिंग जारी रखते हैं, तो एक्सरसाइज के बाद उनके शरीर को रिकवर हो पाने में ज्यादा समय लगता है. अगर एक्सरसाइज के दौरान आपकी छाती में दर्द होता है या असहज महसूस होता है तो इसे इग्नोर न करें.
ऐसे चेक करें हार्ट बीट
आप ऑक्सीमीटर या बीपी इंस्ट्रूमेंट के अलावा अपने हाथों से भी धड़कनें चेक कर सकते हैं. आप अपनी कलाइर् पर उंगलियां रखकर भी एक मिनट तक गिनें, उससे आपको हार्ट बीट पता चल जाएंगी. इसके अलावा गर्दन पर भी दोनों उंगली रखकर हार्ट रेट चेक कर सकते हैं. आप 15 सेकेंड तक हार्टबीट गिनें और उसे चार से गुणा कर दें आपको अपनी हार्टबीट पता चल जाएगी.