International Lefthanders Day 2021: दुनिया में करीब 10 प्रतिशत लोग लेफ्ट हैंड का इस्तेमाल लिखने-पढ़ने से लेकर खाने तक सभी जरूरी कामों में करते हैं. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा, जॉर्ज डब्ल्यू बुश समेत खेल और सिनेमा जगत में ऐसी कई हस्तियां हैं जो लेफ्ट हैंड से लिखती हैं. दुनिया में लेफ्ट हैंड को लेकर तमाम शोध भी हुए हैं जिसमें ऐसे लोगों के मस्तिष्क के क्रियान्वयन पर भी बात की गई है. आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कि लेफ्ट हैंड से लिखने-खाने वालों का दिमाग क्या वाकई राइट हैंड वालों से अलग या अच्छा होता है, या सच्चाई कुछ अलग है.
एम्स के मनोचिकित्सक डॉ राजेश सागर ने aajtak.in से बताया कि मनोचिकित्सा जगत में इस पर कई शोध हुए हैं. वो बताते हैं कि हमारे दिमाग के दो हेमेस्फेयर होते हैं जिससे हमारी एक्टिविटी संचालित होती है. इसमें जिन लोगों का मोटॉर एरिया लेफ्ट हेमेस्फेयर से संचालित होता है, उनका दाहिना हिस्सा ज्यादा एक्टिव होता है, वहीं जिन लोगों का राइट मोटॉर एक्टिव होता है वो लेफ्ट पार्ट से एक्टिव होते हैं. बायें हाथ से काम करने वालों के बारे में ऐसा ही माना जाता है कि उनका राइट एरिया एक्टिव होता है.
लेफ्ट हैंड वालों पर हुए कई शोध में सामने आया है कि लेफ्ट हैंड वाले लोग राइट वालों से ज्यादा क्रिएटिव होते हैं और उनमें म्यूजिक और आर्ट का सेंस अच्छा होता है. वो कहते हैं कि ऐसी सभी स्टडी को बाद में दूसरे शोधों से डिसएप्रूव भी किया गया. इसलिए अब ऐसा माना जाता है कि लेफ्ट हैंड वाले भी राइट हैंड वालों की तरह ही सामान्य होते हैं. ऐसे कोई भी तथ्य इस बात का समर्थन नहीं करते कि उनके दिमाग राइट वालों से अलग होते हैं.
डॉ राजेश सागर कहते हैं कि ऐसे भी कई जेस्चर आए कि लेफ्ट हैंड वालों का वर्बल आउटपुट राइट हैंड वालों से ज्यादा होता है, लेकिन इसे भी कुछ लोगों ने डिसएप्रूव कर दिया. हां, लेकिन कुछ चीजों जैसे कि मिरर राइटिंग और स्पोर्ट्स जैसे दूसरे क्षेत्रों में ऐसे लोग काफी अच्छा प्रदर्शन करते हैं.
इसके पीछे डॉ सागर अलग ही वजह बताते हैं. डॉ सागर कहते हैं क्योंकि दुनिया में लेफ्टी कम होने के कारण क्रिकेट, बैडमिंटन समेत ज्यादातर खेलों में खिलाड़ी राइट हैंड वालों के साथ प्रैक्टिस करते हैं. ऐसे में अगर सामने वाला खिलाड़ी लेफ्टी होता है तो विरोधी टीम के खिलाड़ियों के लिए ये कई बार असहज हो जाता है. इसलिए ऐसे लोग स्पोर्ट्स की फील्ड में काफी आगे जाते हैं.
IHBAS दिल्ली के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ ओमप्रकाश कहते हैं कि अगर लेफ्ट हैंडेड और राइट हैंडेड की तुलना करें तो इस पर कई स्टडी की गई हैं. एक स्टडी में पाया गया कि 95 प्रतिशत राइट हैंडेड का ब्रेन लेफ्ट होमोस्फेयर से संचालित होता है. दिमाग का लेफ्ट हिस्सा विशेष रूप से भाषा और भाषण को संचालित करता है. वहीं ऐसा माना जाता है कि दायां हिस्सा इमोशंस और इमेज प्रोसेसिंग पर निर्भर करता है. लेकिन स्टडी में पाया गया कि 100 में से केवल 20 प्रतिशत लेफ्ट हैंडेड लोगों में ऐसा पाया गया जो जिनमें राइट पार्ट एक्टिव होने से उनमें स्ट्रिक्ट तौर पर ये गुण पाए गए.
मनोचिकित्सक कहते हैं कि जिन पेरेंट्स के बच्चे लेफ्ट हैंडेड हैं, उन्हें उनकी परवरिश को लेकर थोड़ा सतर्क रहना चाहिए. लेफ्ट हैंड यूज करने को लेकर उन्हें किसी भी तरह का पॉजिटिव या नेगेटिव अंधविश्वास नहीं पालना चाहिए. मसलन कुछ लोग लेफ्टी बच्चों को ज्यादा होनहार बताते हैं, ऐसे में बच्चों से ज्यादा अपेक्षा नहीं करना चाहिए. अभी तक इस तरह के बिंदुओं का समर्थन करने के लिए आए ज्यादातर शोध डिसएप्रूव हुए हैं, इसलिए हमें इन बच्चों को राइट हैंड वालों से अलग नहीं मानना चाहिए.
डॉ राजेश सागर पेरेंट्स को सलाह देते हैं कि अगर आपका बच्चा लेफ्टहैंडेडनेस रखता है तो आपको उसकी स्कूलिंग के दौरान मददगार होना चाहिए. उदाहरण के तौर पर आप उसके स्कूल जाकर टीचर्स को उसके सिटिंग अरेंजमेंट को लेकर बात करें. अक्सर लेफ्ट से लिखने वाले बच्चे राइट वालों के साथ डेस्क शेयर करते हैं तो उन्हें लिखने में असहजता महसूस होती है. इसलिए टीचर उन्हें ऐसे बैठाएं जिससे उन्हें लिखने में असहजता न हो. टीचर बाकी बच्चों की भी इस बात को लेकर काउंसिलिंग करें कि वो छोटे बच्चे को लेफ्ट हैंड से लिखने को लेकर कोई मजाक न बनाएं, इससे बच्चों में तनाव की समस्या आ सकती है.