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एजुकेशन न्यूज़

कभी जमाने ने 'डायन' कहकर किया था जुल्‍म, 2021 में मिला पद्मश्री

ये हैं 2021 में पद्मश्री पाने वाली छुटनी
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झारखंड की जिस महिला छुटनी महतो को पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है उसे 25 साल पहले डायन कह कर काफी प्रताड़ित किया गया था. यहां तक क‍ि उन्हें जान से मारने की कोशिश तक की गई. गांव से भी निकाल दिया गया था. छुटनी महतो की इस सफलता के पीछे बहुत बड़ा दर्द छुपा है. आइए जानें पद्मश्री छुटनी मेहतो के बारे में ये बातें..

( मनीष, सराय‍केला की र‍िपोर्ट भी शामिल)

 

ये हैं 2021 में पद्मश्री पाने वाली छुटनी
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कभी छुटनी मेहतो की जिंदगी दुखों के पहाड़ तले इस कदर दबी थी कि उनकी दास्‍तां सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए. लेकिन इतनी प्रताड़ना झेलकर छुटनी महतो चुप नहीं बैठी, और ना ही अपने आप को घर की चारदीवारी में कैद करके रखा. शादी के 16 साल बाद 1995 में एक तांत्रिक के कहने पर उन्हें गांव भर में डायन मान लिया गया था. उन्हें जान से मारने की साजिश भी रची गई. 

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जानकारी मिलते ही छुटनी रातोरात किसी तरह अपने चार बच्चों के साथ जान बचाकर गांव से भागी. गांव छोड़ने के बाद 8 माह तक बच्चों के साथ एक पेड़ के नीचे अपनी जिंदगी गुजारने को मजबूर हुई. बाद में नैहर यानी मायके में शरण ली. शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना झेलने के बावजूद छूटनी महतो ने हार नहीं मानी बल्कि निडर होकर डायन प्रथा को समाप्त करने के खिलाफ आवाज बुलंद कर दी. 

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ये हैं 2021 में पद्मश्री पाने वाली छुटनी
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उन्‍होंने सरायकेला खरसावां जिले के गम्हरिया प्रखंड के घोर नक्सल बीरबांस गांव में रहकर डायन प्रथा के खिलाफ लोगों को एकजुट करने का प्रयास शुरू किया. डायन प्रथा की शिकार सैकड़ों महिलाओं को अपने घर रखकर न सिर्फ खिलाया पिलाया बल्कि उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ भी बनाया. उनकी ताक़त और हिम्मत बनीं. नक्सल प्रभावित इलाके में संगठन बनाकर महिलाओं को जोड़ा. उनकी मेहनत रंग लाई. सोमवार की शाम अचानक उनका मोबाइल फ़ोन बज उठा और उन्हें जानकारी मिली कि उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा जा रहा है. 

ये हैं 2021 में पद्मश्री पाने वाली छुटनी
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रांची पहुंचने पर एक निजी आवासीय विद्यालय की छात्राओं ने जमकर उनका स्वागत सत्कार किया. ढोल की थाप पर छुटनी महतो बच्चियों के साथ जमकर थिरकीं. बता दें क‍ि महज तीसरी कक्षा तक पढ़ी छुटनी देवी की शादी 1978 में गम्हरिया थाना क्षेत्र के महतानडीह में हुई थी. 1995 में ससुरालवालों ने डायन बिसाही का आरोप लगाते हुए उन्हें घर से निकाल दिया गया था. 

ये हैं 2021 में पद्मश्री पाने वाली छुटनी
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वर्ष 2000 से वह डायन बिसाही से प्रताड़ित महिलाओं के बीच जाकर काम करना शुरू किया. अब तक वह डायन बिसाही से प्रताड़ित 125 महिलाओं को न्याय दिलाकर उनका पुनर्वास करवा चुकी हैं. इनमें चाईबासा के अलावा पूर्वी सिंहभूम और चतरा जिले से संबंधित मामले भी हैं. अभी वो फ्री लीगल एड की सदस्य भी हैं और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में उनकी अलग पहचान है.

ये हैं 2021 में पद्मश्री पाने वाली छुटनी
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aajtak से बातचीत में उन्‍होंने कहा कि पद्मश्री मिलना बड़ी उपलब्धि है. इससे मेरी शक्ति बढ़ी है. आगे भी डायन बिसाही से प्रताड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए लड़ती रहूंगी. छुटनी ने बताया कि उनके लिए पद्मश्री सम्मान मिलने की खबर एक सपने की तरह है. सोमवार की रात वे अपने कमरे में सोई थीं. उसी समय मंझले पुत्र अतुल चंद्र महतो ने उन्हें जगाकर उक्त खबर की जानकारी दी.

ये हैं 2021 में पद्मश्री पाने वाली छुटनी
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बता दें कि‍ छुटनी वर्तमान में बीरबांस गांव में अपने तीन पुत्र, दो पुत्रवधु व तीन पोता-पोतियों के साथ रहती है. एक पुत्री की शादी हो चुकी है, जबकि छोटा पुत्र अविवाहित है. वो पुराने द‍िनों की याद करते हुए कहती हैं क‍ि कभी लोग उन्हें डायन कहकर प्रताड़ित किया करते थे. ससुराल में किसी का तबीयत खराब होने पर मुझे ही दोषी ठहराते हुए प्रताड़ित किया जाता था. ग्रामीणों के रोजाना किचकिच से तंग आकर 1995 में मैं अपने पति व बच्चों के साथ बीरबांस मायके चली आई, जहां छह माह साथ रहने के बाद पति हमें यहां छोड़कर वापस महतानडीह चला गया, जो वापस नहीं लौटा.

छुटनी महतो को म‍िला पद्मश्री
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छुटनी महतो ने बताया कि वह गम्हरिया प्रखंड के बीरबांस पंचायत के बीरबांस की रहने वाली है. मेरी उम्र जब 12 वर्ष की थी तभी गम्हरिया थाना अंतर्गत सामरम (वर्तमान में नवागढ़) पंचायत के धनंजय महतो से मेरी शादी कर दी गई. जल्द ही हमारे तीन बच्चे हो गये. दो सितंबर 1995 को मेरे पड़ोसी भोजहरी की बेटी बीमार हुई. लोगों ने शक जताया कि मैंने उसपर टोना कर दिया है. इसके बाद गांव में पंचायत हुई. इसमें मुझे डायन क़रार दिया गया. लोगों ने घर में घुसकर मेरे साथ बलात्कार की कोशिश की. 

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छुटनी महतो को पद्मश्री सम्‍मान
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अगले दिन फिर पंचायत हुई. पांच सितंबर तक रोज़ कुछ न कुछ होता रहा. इस बीच पंचायत के द्वारा पांच सौ रुपए का जुर्माना लगाया गया, जिसे उनके द्वारा चुकाया भी गया. इसके बाद भी मामला शांत नहीं हुआ. उसी दिन शाम को गांव वालो द्वारा दो ओझा को बुलाया गया, जिन्होंने मुझे मैला पिलाने का सुझाव ग्रामीणों को दिया. ओझा का कहना था कि मानव मल पीने से डायन उतर जाती है. इसका मैंने विरोध भी किया, लेकिन लोगों ने मुझे पकड़कर जबरन मैला पिलाने का प्रयास किया. इसी बीच मेरी छूटने की कोशिश करने पर मैला मेरे शरीर पर गिर गया. इसके बाद मुझे डायन करार कर दिया गया. साथ ही हमें घर से निकाल दिया गया. मैं अपने चार बच्चों के साथ पूरी रात पेड़ के नीचे काटी. रात को ही हमने कई लोगों से फरियाद भी की, लेकिन कहीं से भी कोई मदद नहीं मिली. छह सितंबर को मैंने गम्हरिया थाना मेंमामला दर्ज कराया. मामले में पुलिस द्वारा कुछ लोग गिरफ्तार किया गया, लेकिन कुछ दिनों बाद ही जमानत पर छूट गए.

All Photos: aajtakin

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