पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बॉलीवुड के डिस्को डांसर छवि वाले महान अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती बीजेपी में शामिल हो गए हैं. बॉलीवुड को सुपरहिट फिल्मों का तोहफा देने वाले मिथुन के बारे में कहा जाता है कि इनके नाम फ्लॉप फिल्मों का भी बड़ा रिकॉर्ड है. पढ़ाई-लिखाई में भी अव्वल रहे मिथुन कभी नक्सली की पहचान भी रख चुके हैं. आइए जानते हैं इनकी जिंदगी के वो तमाम पहलू जो शायद आपको न पता हों.
मिथुन चक्रवर्ती का जन्म 16 जून 1950 को कोलकाता में हुआ था. उनके पिता बसंत कुमार चक्रवर्ती कोलकाता टेलीफोंस में नौकरी करते थे, वहीं उनकी मां शांति रानी चक्रवर्ती होममेकर थीं. परिवार में मिथुन के अलावा तीन बहनें भी हैं. उनके एक भाई की मौत हो चुकी है. पिछले साल लॉकडाउन के दौरान 23 अप्रैल को उनके पिता का निधन हो गया था. टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक कभी बंसत कुमार ने ही मिथुन को मुंबई में करियर बनाने के लिए भेजा था.
मिथुन का असली नाम गौरांग चक्रवर्ती है. उनकी स्कूली शिक्षा कोलकाता के ओरिएंटल सेमिनरी से हुई. उन्होंने कोलकाता के स्कॉटिश चर्च कॉलेज से केमिस्ट्री से बीएससी की डिग्री ली. इसके बाद पिता के कहने पर पुणे के फिल्म एंड टेलिविजन इंस्टीट्यूट से एंक्टिंग सीखी. उनकी अदाकारी के चलते ही मिथुन को पहली ही फिल्म 'मृगया' (1976) के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला.
मिथुन चक्रवर्ती के बारे में एक बात और कही जाती है कि वो फिल्मों में आने से पहले नक्सली मूवमेंट की तरफ आकर्षित हो गए थे. नक्सलवाद के प्रति उनका गहरा झुकाव यहां ले गया था. एक वक्त ऐसा भी था जब वो परिवार को छोड़ नक्सलियों के साथ रहने लगे थे. वे इस राह पर आगे बढ़ ही रहे थे कि उनकी जिंदगी में एक दुर्घटना हो गई. उनके भाई की मौत वो घटना हुई जिसके बाद वो घर वापस लौट आए.
मिथुन चक्रवर्ती का विवाह बॉलीवुड अभिनेत्री योगिता बाली से विवाह हुआ. योगिता के पहले पति किशोर कुमार थे. मिथुन के चार बच्चे 3 बेटे और एक बेटी हैं. उनके बेटे महाअक्षय, उशमय, निमाशी और बेटी दिशानी चक्रवर्ती भी मीडिया में काफी चर्चा में रह चुके हैं.
मिथुन के जीवन का एक पहलू यह भी है कि बिना एक पल भी सोचे कचरे के ढेर से एक बच्ची को उठाकर गोद लिया. न सिर्फ उसे बेहतर और बराबरी की परवरिश दी बल्कि उसे अपनी पहचान और नाम भी दिया. उनकी बेटी दिशानी अदाकारी सीखने के लिए न्यूयॉर्क गईं. योगिता बाली और मिथुन ने अपनी इस बेटी को बहुत प्यार से पाला और बेहतरीन परवरिश देकर समाज के सामने उदाहरण पेश किया.
अगर मिथुन के फिल्मी करियर की बात करें तो बॉलीवुड को उन्होंने एक नया नजरिया दिया. जिस वक्त मेल एक्टर्स सिर्फ अपनी एक्टिंग और मारधाड़ से जाने जाते थे, ठीक उस वक्त छरहरी काया और सांवले रंग के इस हीरो ने डिस्को डांसर की छवि से तूफान सा मचा दिया था. हर किसी की जुबान पर मिथुन के डांस की तारीफ उनके स्टेप्स की नकल होती थी. फिर देखते देखते इंडस्ट्री में हीरो के कंटेपरेरी डांस चलन में आ गए.
वेस्ट बंगाल में पैदा होने और परवरिश के बावजूद उनकी भारी आवाज में हिंदी में बोले गए फिल्मी डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर रहते हैं. मिथुन की भारी आवाज में उनके डॉयलॉग 'भीगी हुई सिगरेट जल नहीं सकती...अब तेरी मौत टल नहीं सकती', 'मरने के बाद उसकी बोटियां दर्द से तड़पती रहेंगी'...आदि युवाओं के फेवरेट रहा करते थे.
मिथुन चक्रवर्ती कe राजनीतिक सफर देखें तो यह सफर मीठा कम कड़वा ज्यादा रहा है. 2011 में जब टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने बंगाल की सत्ता संभाली तो उन्होंने मिथुन चक्रवर्ती को राजनीति से जुड़ने का न्योता दिया, जो मिथुन ने उस वक्त सहर्ष स्वीकार किया. मिथुन चक्रवर्ती को तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा से सांसद भी बनाया, लेकिन 2016 के अंत में मिथुन चक्रवर्ती ने राज्यसभा के सांसद पद से इस्तीफा दे दिया और राजनीति से संन्यास ले लिया.
राज्यसभा से होते हुए वो पॉलिटिक्स की दुनिया में भाजपा की तरफ से आए हैं. बीजेपी की ओर से आयोजित एक सभा में उन्होंने फिल्मी डॉयलाग बोलते हुए कहा कि 'मारूंगा यहां लाश गिरेगी शमशान में'... भी बोला. इसके बाद उन्होंने कहा कि ये डायलॉग पुराना हो गया है. नया डायलॉग है 'मैं पानी का सांप नहीं हूं. मैं कोबरा हूं. दंश मारने से काम तमाम हो जाएगा.'