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एजुकेशन न्यूज़

5 अप्रैल से शुरू होगा नया सत्र, क्‍या बच्‍चों को स्‍कूल भेजने को राजी हो पाएंगे पेरेंट्स?

प्रतीकात्‍मक फोटो
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एक बार फिर से नया एकेडमिक सेशन शुरू करने की तैयारी है. जो कि सीबीएसई, केवी के अलावा दिल्‍ली, बिहार, पंजाब, राजस्‍थान, उत्‍तर प्रदेश राज्‍य एक अप्रैल से शुरू कर रहे हैं. एक अप्रैल को वीकेंड और छुट्ट‍ियां होने के कारण पढ़ाई पांच अप्रैल से शुरू होगी. अब सवाल यह है कि जिस तरह के हालात देश में बन रहे हैं, क्‍या ऐसे में पेरेंट्स अपने बच्‍चों को स्‍कूल भेजने को राजी हो पाएंगे.

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कोरोना के चलते लगा लॉकडाउन भले ही खत्‍म हो गया है, लेकिन स्‍कूलों से इसका साया अभी भी नहीं हट पा रहा. राज्‍य सरकारों ने कुछ प्रयास करके ऑफलाइन क्‍लासेज के विकल्‍प खोले भी तो कई जिलों में फिर से मामले बढ़ने लगे, जिसके चलते एक बार फिर स्‍कूलों में ताला लग गया. अब ज्‍यादातर राज्‍यों ने पहली से आठवीं तक की कक्षाओं को ब‍िना एग्‍जाम प्रमोट करने का फैसला ले लिया है. 

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सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने भी संबंद्ध स्कूलों को एक अप्रैल से नए एकेडमिक सेशन 2021-22 की शुरुआत करने का सुझाव दिया था, होली और गुड फ्राइडे व वीकेंड होने के चलते पांच अप्रैल मंडे से नये सेशन की पढ़ाई शुरू हो रही है. इसके अलावा केंद्रीय व‍िद्यालय, उत्‍तर प्रदेश, मध्‍‍‍‍‍य प्रदेश आद‍ि राज्‍‍‍यों में भी पांच अप्रैल से नये सेशन की पढ़ाई शुरू होगी. 

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प्रतीकात्‍मक फोटो (Getty)
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दिल्‍ली के मयूर विहार स्‍थ‍ित एल्‍कॉन इंटरनेशनल स्‍कूल के श‍िक्षक और एडमिनिस्‍ट्रेशन प्रमुख राजीव झा ने बताया कि‍ स्‍कूलों ने नये एकेडमिक सेशन की तैयारियां पूरी कर ली हैं. इस साल नये एकेडमिक सेशन में मिले जुले ऑप्‍शन दिए गए हैं. इसके अनुसार पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्‍चे ऑनलाइन माध्‍यम से ही पढ़ाई जारी रखेंगे. बाकी कक्षाओं जैसे 9वीं से 12वीं तक के बच्‍चों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ऑप्‍शन दिए जाएंगे, इसके लिए माता-पिता की अनुमत‍ि जरूरी होगी.

प्रतीकात्‍मक फोटो (Getty)
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अब जब स्‍कूल खुलने को तैयार हैं तो पेरेंट्स अपने बच्‍चों को भेजने को लेकर डरे हुए हैं. आगरा की रहने वाली श‍िवानी मिश्रा कहती हैं क‍ि मेरे दोनों बच्‍चे पांचवीं और दूसरी कक्षा में पढ़ते हैं. मैंने उन्‍हें स्‍कूल भेजने की पूरी तैयारी कर ली थी कि अब नये एकेडमिक सेशन से उन्‍हें स्‍कूल भेज देंगे, लेकिन अब कोरोना का दूसरी बार हमला बहुत डरा रहा है. हरियाणा की खबर आई है कि वहां 1100 स्‍कूली बच्‍चे संक्रम‍ित हो गए तो ऐसे में बच्‍चों को लेकर रिस्‍क लेने की हिम्‍मत नहीं पड़ती.

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द‍िल्‍ली पेरेंट्स एसोसिएशन की अध्‍यक्ष अपराजिता गौतम ने बताया कि‍ पेरेंट्स अभी इस बात में विश्‍वास नहीं बना पाए हैं कि‍ स्‍कूल कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन कर पाएंगे. अभी जब स्‍कूल खुले तो स्‍कूलों ने अभ‍िभावकों और सरकार से कई जानकारियां छुपाईं. सरकार ने भी कहा था कि स्‍कूलों का निरीक्षण और एसओपी का पालन सुनिश्‍च‍ित करने के ल‍िए जांच कमेटी गठ‍ित की जाएगी, लेकिन सरकार ने ऐसा कुछ नहीं क‍िया.

प्रतीकात्‍मक फोटो (Getty)
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अपराजिता कहती हैं क‍ि नये एकेडमिक सेशन में स्‍कूल भेजने के लिए अगर अभ‍िभावकों की अनुमत‍ि ली गई तो शायद 10 प्रत‍िशत अभ‍िभावक बच्‍चों को स्‍कूल भेजेंगे. अगर सरकार यह चाहती है कि अभ‍िभावक अपनी एनओसी देकर बच्‍चों को स्‍कूल भेजें तो उन्‍हें स्‍कूलों से भी शपथ पत्र मांगना चाहिए. जिसमें स्‍कूल स्‍पष्‍ट करें क‍ि वो अपने कैंपस में कोरोना से संबंध‍ित सभी प्रोटोकॉल और गाइडलाइन को फॉलो करेंगे. यदि कोई भी केस आता है तो उस पर तुरंत एक्‍शन लेते हुए संक्रम‍ण के संदेह पर क्‍वारनटीन करेंगे.

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