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एजुकेशन न्यूज़

नई श‍िक्षा नीति: आसान है समझना, ये 6 प्वाइंट्स हैं सबसे जरूरी

न्यू एजुकेशन पॉलिसी
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न्यू एजुकेशन पॉलिसी 29 जुलाई 2020 को कैबिनेट ने पास कर दी है. अब इस पॉलिसी को लेकर कहा जा रहा है कि इसमें क्लासरूम, बस्ते से लेकर बोर्ड का सिस्टम भी बदल जाएगा. तो आपको बता दें कि नई शिक्षा नीति में 10+2 के फॉर्मेट को भी पूरी तरह खत्म कर दिया गया है. अब इसे 10+2 से बांटकर 5+3+3+4 फार्मेट में ढाला गया है. इसका मतलब है कि अब स्कूल के पहले पांच साल में प्री-प्राइमरी स्कूल के तीन साल और कक्षा 1 व कक्षा 2 सहित फाउंडेशन स्टेज शामिल होंगे. फिर अगले तीन साल को कक्षा 3 से 5 की तैयारी के चरण में विभाजित किया जाएगा.

न्यू एजुकेशन पॉलिसी
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केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति के तहत निजी और सार्वजनिक उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए सामान्य मानदंड अपनाया जाएगा. प्रेस कांफ्रेंस में शिक्षा सचिव अमित खरे ने कहा कि आज की तारीख तक हमारे पास अलग-अलग स्टैंडअलोन संस्थानों के लिए अलग-अलग विश्वविद्यालयों, केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए अलग-अलग मानदंड हैं. नई शिक्षा नीति कहती है कि गुणवत्ता के कारणों के लिए मानदंड सभी के लिए समान होंगे, न कि स्वामित्व के अनुसार.

न्यू एजुकेशन पॉलिसी
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नई शिक्षा नीति के अनुसार विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली आम प्रवेश परीक्षा होगी. ये परीक्षा एनटीए यानी नेशनल टेस्ट‍िंग एजेंसी कराएगी.

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न्यू एजुकेशन पॉलिसी
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बीएड के लिए कुछ इस तरह से व्यवस्था की जाएगी. बीएड की दो साल की डिग्री उन ग्रेजुएट छात्रों को मिले जिन्होंने किसी खास सब्जेक्ट में चार साल की पढ़ाई की हो. चार साल की ग्रेजुएट की पढ़ाई के साथ एमए की भी डिग्री प्राप्त करने वाले छात्रों को बीएड की डिग्री एक साल में ही प्राप्त हो जाएगी, लेकिन इसके जरिये विषय विशेष के शिक्षक बन पाएंगे.

न्यू एजुकेशन पॉलिसी
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न्यू एजुकेशन पॉलिसी में दिया गया है कि प्राइमरी एजुकेशन के बाद तीन साल मध्य चरण (कक्षा 6 से 8) और माध्यमिक अवस्था के चार वर्ष (कक्षा 9 से 12). इसके अलावा स्कूलों में कला, वाणिज्य, विज्ञान स्ट्रीम का कोई कठोर पालन नहीं होगा, छात्र अब जो भी पाठ्यक्रम चाहें, वो ले सकते हैं.

न्यू एजुकेशन पॉलिसी
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न्यू एजुकेशन पॉलिसी में गुणवत्ता पूर्ण श‍िक्षा के लिए टीचर्स ट्रेनिंग पर विशेष जोर दिया गया है. इसमें 2030 तक बीएड कोर्स को पूरी तरह बदलने की बात भी कही गई है. अब नई श‍ि‍क्षण प्रणाली को लागू करने के लिए टीचर्स को भी उसी तरह तैयार किया जाएगा. इसके लिए बीएड ही नहीं TET यानी टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट का पैटर्न भी बदलेगा.

न्यू एजुकेशन पॉलिसी
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न्यू एजुकेशन पॉलिसी से पहले अभी तक टीईटी एग्जाम दो हिस्सों में बंटे थे, जिसमें पार्ट 1 और पार्ट 2 में परीक्षा ली जाती थी. अब स्कूली शिक्षा व्यवस्था का ढांचा बदलने के साथ ही टीईटी का स्ट्रक्चर चार हिस्सों में बंटा होगा. इनमें फाउंडेशन, प्रीपेरेटरी, मिडल और सेकेंडरी के अनुसार टीईटी का पैटर्न सेट किया जाएगा. अब टीईटी के जरिये विषय शिक्षकों की भर्ती के समय टीईटी या संबंधित सब्जेक्ट में एनटीए टेस्ट स्कोर भी चेक किया जा सकता है. सभी विषयों की परीक्षाएं और एक कॉमन एप्टीट्यूट टेस्ट का आयोजन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) करेगा. ये अपने आप में महत्वपूर्ण बदलाव होगा.

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