कोरोना ने एक बार फिर पूरे देश में जोर पकड़ा है. देशभर में अचानक कोविड-19 के मामले बढ़े हैं. ऐसे में उन अभिभावकों के सामने बड़ी मुसीबत आ खड़ी है जिनके बच्चों के बोर्ड एग्जाम मई में शुरू होने वाले हैं. ऐसे में अभिभावक कह रहे हैं कि जब पूरे साल पढ़ाई ऑनलाइन हुई है तो आखिर एग्जाम क्यों ऑफलाइन लिए जा रहे हैं. यहां पढ़िए क्या कह रहे हैं अभिभावक...
दिल्ली पेरेंट्स एसोसिएशन की अपराजिता गौतम ने कहा कि एग्जाम को लेकर हमने सैकड़ों की संख्या में अभिभावकों से राय ली है. अभिभावकों ने अपनी राय रखते हुए कहा है कि तमिलनाडु की तर्ज पर सीबीएसई और दूसरे राज्यों को भी नौवीं से 11वीं तक एग्जाम कैंसिल करके बच्चों को प्रमोट करना चाहिए.
अपराजिता कहती हैं कि बीते साल जिस तरह पूरी पढ़ाई ऑनलाइन हुई, उससे बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ाई से वंचित रहे. यह बात खुद सरकार ने स्वीकार की है. अगर जरूरतमंद परिवारों के बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई नहीं कर पाए हैं तो भला वे एग्जाम कैसे देंगे. इन बच्चों के बिना कारण फेल होने पर इनमें कितना तनाव बढ़ेगा और करियर बनाने में भी इन्हें ये फेलियर बाधा पहुंचाएगा. इसलिए इस पर स्थायी समाधान सोचने की जरूरत है.
करीब 60 फीसदी पेरेंट्स और छात्र कह रहे हैं कि बोर्ड को कम से कम 50 फीसदी इवैल्यूवेशन इंटरनल असेसमेंट के आधार पर करना चाहिए. बड़ी संख्या में बच्चे जो ऑनलाइन पढ़े हैं, वो ऑफलाइन एग्जाम फियर से भी जूझ रहे हैं. उनके सामने तीन घंटे मास्क पहनकर एग्जाम देना बड़ी चुनौती बन चुका है.
सोशल मीडिया पर भी छात्र लगातार बोर्ड एग्जाम को लेकर अपनी बात रख रहे हैं. छात्रों का कहना है कि पिछले साल जब दो-तीन हजार कोरोना पॉजिटिव केस आ रहे थे तब सरकार ने स्कूल बंद करा दिए. सेकेंड वेव में जब कोरोना बुरी तरह कई राज्यों को प्रभावित कर चुका है. ऐसे में ऑफलाइन एग्जाम कराए जा रहे हैं.
बता दें कि दिल्ली, कर्नाटक, तमिलनाड़ु, हरियाणा, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में तेजी से एक बार फिर कोरोना के मरीजों का ग्राफ बढ़ा है. सभी राज्यों ने स्कूल शुरू करने के बाद कोरोना ग्राफ बढ़ने पर फिर से स्कूल बंद कर दिए. स्कूल में सेनिटाइजेशन और सोशल डिस्टेंसिंग के नियम लागू होने के बावजूद कई राज्यों से रिपोर्ट आईं कि वहां बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे और टीचर्स कोरोना पॉजिटिव पाए गए.
दिल्ली, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, उत्तरप्रदेश, पंजाब सहित ज्यादातर राज्यों ने स्कूल बंद कर दिए हैं. सभी राज्यों में नये सेशन की पढ़ाई भी ऑनलाइन शुरू हुई है. नाइट कर्फ्यू से लेकर कई नये तरीकों से राज्य सरकारें कोरोना संक्रमण की दर पर काबू पाने में लगी हैं. ऐसे माहौल में बोर्ड एग्जाम जैसे बड़े आयोजन कितने सेफ होंगे, सभी के मन में ये सवाल उमड़ रहा है.
अपराजिता ने कहा कि 80 फीसदी पेरेंट्स चाहते हैं कि 11वीं तक के बच्चों को इंटरनल असेसमेंट के आधार पर पास किया जाए. कोरोना के चलते बिगड़ते हालातों में सभी छात्रों की बोर्ड परीक्षा करा पाना आसान काम नहीं है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा सकती है तो परीक्षा क्यों ऑनलाइन नहीं ली जा सकती. बोर्ड यूके की तरह परीक्षा लेने का तरीका प्रोजेक्ट या असेसमेंट के आधार पर कर सकते हैं.
बता दें कि सीबीएसई बोर्ड सहित ज्यादातर राज्य बोर्ड की परीक्षाएं मई से शुरू हो रही हैं. जिस तरह कोरोना का ग्राफ बढ़ रहा है, उससे ये अनुमान लगाना कठिन नहीं है कि मई तक हालात बहुत नहीं सुधरने वाले. पिछले साल के पैटर्न की ही बात करें तो हालात मई से जुलाई के बीच ज्यादा बिगड़े थे. सरकार से अभिभावकों और छात्र अपील कर रहे हैं कि अगर परीक्षाएं करानी ही हैं तो एग्जाम सेंटर ज्यादा से ज्यादा बढ़ाए जाएं और यहां कोविड 19 प्रोटोकॉल पूरी तरह सख्त रखा जाए.