पाकिस्तान ने अपने देश में स्कूल-कॉलेज खुलने के 48 घंटे के भीतर सरकार की ओर से जारी कोविड-19 गाइडलाइन न मानने वाले स्कूलों पर कार्रवाई शुरू कर दी. गुरुवार को सरकार ने 32 संस्थानों को बंद करने का आदेश जारी कर दिया. बता दें कि पाकिस्तान ने भारत से एक हफ्ते पहले 14 सितंबर को ही स्कूल-कॉलेज खोल दिए थे.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के नेशनल कमांड एंड ऑपरेशंस सेंटर (NOCC) की ओर से बताया गया कि पहले शुरुआती 48 घंटे में जो 22 संस्थान बंद किए गए उनमें से 16 खैबर पख्तूनखा इलाके के थे.
वहीं सील किए स्कूल कॉलेजों में से पांच पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और एक इस्लामाबाद का है. वहीं सिंध सरकार ने भी ऐसे 10 स्कूल कॉलेज सील किए जो कोविड 19 को लेकर जारी एसओपी को नहीं मान रहे थे. इसके अलावा यहां कोविड 19 केस भी रिपोर्ट हुए थे.
बता दें कि कोरोना संकट में पाकिस्तान के रवैये को लेकर पूरी दुनिया में उसकी तारीफ हो रही है. यहां तक कि डब्ल्यूएचओ ने भी पाकिस्तान की तारीफ करते हुए कहा था कि पूरी दुनिया को पाकिस्तान से सीखना चाहिए कि किस तरह उन्होंने कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण पाया है.
वहीं पाकिस्तान सरकार भी कहीं न कहीं इसी रवैये को बरकरार रखते हुए आने वाले समय में भी कोरोना संक्रमण पर काबू रखने को लेकर सख्ती बरत रही है. पाक सरकार ने कोविड-19 संक्रमण को रोकने के लिए स्कूल-कॉलेजों के लिए पूरी गाइडलाइन तैयार की थी और इसे सख्ती से पालन करने की ताकीद की थी.
14 सितंबर को स्कूल और उच्च शिक्षण संस्थान खोलने से पहले संस्थानों में पूरी तैयारी की गई थी. पूरी इमारतों को सैनिटाइज करने के साथ साथ सोशल डिस्टेसिंग के सभी पैरामीटर्स को सख्ती से मानने को कहा गया था.
इसी सप्ताह की शुरुआत में इस्लामाबाद प्रशासन ने कहा था कि रीपाह मेडिकल कॉलेज को सील किया गया था. इसकी वजह ये थी कि इस अस्पताल से कोरोना वायरस संक्रमण के 16 मामले आए थे. इनमें स्टाफ और स्टूडेंट्स दोनों शामिल थे.
पाकिस्तान सरकार ने कोविड-19 को लेकर जारी एसओपी में ये भी कहा था कि स्कूल-कॉलेज खुलने के दो हफ्ते बाद उन सभी का कोरोना टेस्ट होगा जो रेगुलर हैं. इनमें कर्मचारी, शिक्षक और स्टूडेंट्स सभी को शामिल किया गया है.
इसके अलावा कक्षाओं में सिटिंग अरेंजमेंट और पढ़ाने का तरीका भी पूरी तरह बदला गया है. छात्रों या शिक्षकों किसी को भी क्लास में मास्क उतारने की इजाजत नहीं है. कोई भी स्टूडेंट अपना कोई सामान आपस में साझा नहीं कर सकता. इसके अलावा प्रवेश द्वार पर ही उनका थर्मल गन से टेंप्रेचर मापा जा रहा है. स्कूल में सोशल डिस्टेंसिंग का फॉलो कराने के लिए तय दूरी पर गोले बनाकर प्रवेश दिया जा रहा है.