खगोल विज्ञान से जुड़े विषय हम सबको चौंकातेे हैं. चाहे वो ग्रहों-उपग्रहों की दुनिया हो या इनसे हमारे रिलेशन. अब सूरज और धरती का रिश्ता ही ले लो, अब जब सूरज हमारे इतना नजदीक है तो भी ठंड का मौसम है. सभी रजाई में दुबके हैं. जून में जब सूरज हमसे मीलोंमील दूर होगा तो हम गरमी से तप रहे होंगे..आखिर इसकी वैज्ञानिक वजह क्या है, आइए एक्सपर्ट से जानते हैं.
विज्ञान के शिक्षक और प्रगति विज्ञान संस्थान के संस्थापक दीपक शर्मा बताते हैं कि जब सूरज हमारे नजदीक होता है तो उस दौरान पृथ्वी 23.5 डिग्री पर झुकी होती है, इसलिए डायरेक्ट किरणें पृथ्वी पर नहीं आतीं. ठंड होने का सबसे बड़ा कारण यही है.
बता दें कि भारत में ये समय 23 सितंबर के बाद से शुरू होने लगता है. जब मौसम में हल्की ठंडक आनी शुरू हो जाती है. उस समय का मौसम और फरवरी का मौसम हल्की ठंड का होता है.
भारत में क्यों है ठंड
सूरज की सीधी किरणें इस समय विषुवत रेखा पर पड़ रही है. जो देश या इलाके विषुवत रेखा पर हैं, वहां पर बेहद गर्मी है, और जो देश कर्क रेखा या उसके उत्तरार्ध पर हैं वहां ठंड हैं. भारत भी उनमें से एक है.
दीपक शर्मा कहते हैं कि इसको इस तरह समझिए इस समय सूरज की किरणों का कोण कर्क रेखा पर 40 डिग्री से नीचे रहता है. जबकि विषुवत रेखा पर किरणों का कोण करीब 90 डिग्री है. इसलिए उन देशों में गर्मी हो रही है. जून के दौरान जब हमारे यहां कोण 90 डिग्री होता है, तब वहां न्यून कोण होने के चलते ठंड होती है.
इसी तरह बर्फ गिरने की भी वजह है. दीपक शर्मा बताते हैं कि बर्फ सिर्फ उत्तरी गोलार्ध के इलाकों में जमती है. नार्वे, सोवियत रूस, उत्तरी अमेरिका जैसे देश इनमें आते हैं इसलिए वहां ठंड में बर्फबारी होती है और तापमान न्यूनतम स्तर से माइनस तक पहुंच जाता है.
ठीक इसी तरह भारत के कुछ हिस्से उत्तरी गोलार्ध के नीचे की तरफ पड़ते हैं, इसलिए वहां भी ठंड के मौसम में बर्फ गिरती है, वहीं भारत के कुछ हिस्से जो भूमध्य रेखा से छूते हैं वहां ठंड में भी ठंड नहीं होती. साउथ इंडिया में जैसे जनवरी में भी तापमान सामान्य ही रहता है. वहीं गर्मी में यहां गर्मी ज्यादा हो जाती है.