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एजुकेशन न्यूज़

बच्चे को काउंसलर या मनोचिकित्सक के पास कब ले जाना चाहिए? एक्सपर्ट से जानिए

प्रतीकात्मक फोटो (getty)
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अक्सर पेरेंट्स के तौर पर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को समझना एक मुश्क‍िल काम हो जाता है. बच्चों में पनप रही एंजाइटी, उदासी या डिप्रेशन हो या फिर उनकी उम्र के साथ आ रहे बदलाव, अक्सर माता-पिता इस पर एक संतुलित फैसला नहीं ले पाते. कुछ माता-प‍िता इसे समझकर खुद सुलझाने के बजाय सीधे डॉक्टर या काउंसलर के पास पहुंच जाते हैं या कई माता-पिता मनोचिकित्सक के पास जाना है या नहीं, ये फैसला नहीं ले पाते. आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि बच्चों को कब मनोचिकित्सक या काउंस‍लर के पास ले जाना चाहिए. किन लक्षणों को नजरंदाज नहीं करना चाहिए. 

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IHBAS (Institute of Human Behaviour and Allied Sciences) के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ ओमप्रकाश कहते हैं कि अगर आप अपने बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं, तो सबसे पहले आपको उनके उन व्यवहारों का वर्णन तैयार करना चाहिए जिससे आप चिंतित हैं. इससे पहले आप अपने बच्चे के शिक्षक, करीबी दोस्तों, रिश्तेदारों या अन्य देखभाल करने वालों से अपने तरीके से बात करके देखें कि क्या उन्होंने भी आपके बच्चे के व्यवहार में बदलाव देखा है. अगर आपको ये बदलाव वाकई चिंताजनक लग रहे हैं तो इस जानकारी को अपने बच्चे के डॉक्टर के साथ साझा करें. 

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बच्चों में मानसिक बीमारी के वार्निंग संकेत क्या हैं?

बच्चे में दो या इससे अधिक समय से उदासी रह रही है. 
सोशल इंट्रैक्शन से बच रहे हैं. 
बच्चा खुद को चोट पहुंचाता है या खुद को चोट पहुंचाने की बात करते हैं. 
अगर बच्चे मौत या आत्महत्या के बारे में बात करते हैं. 
घर में तोड़फोड़ करते हैं या अत्यधिक चिड़चिड़ापन है 
बात बात पर अनियंत्रित व्यवहार जो हानिकारक हो सकता है. 

 

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मनोदशा, व्यवहार या व्यक्तित्व में भारी परिवर्तन दिखता है. 
अगर खाने की आदतों में बदलाव आ रहा है. 
वजन कम हो रहा है या कम या ज्यादा सोते हैं. 
बार-बार सिरदर्द या पेट दर्द की श‍िकायत करते हैं. 
आपके साथ बातचीत में ध्यान कम किया है मुश्किल से ध्यान दे रहे हैं. 
एकेडमिक परफार्मेंस में अचानक बदलाव आया है. 
स्कूल से बचना या गायब होना या लापरवाही कर रहे हैं.

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डॉक्टर बच्चों में मानसिक बीमारी का निदान कैसे करते हैं?

मनो चिकित्सक बच्चों में मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति का निदान और उपचार संकेतों और लक्षणों के आधार पर किया जाता है. डॉक्टर ये देखते हैं कि यह स्थिति बच्चे के दैनिक जीवन को कैसे प्रभावित करती है. इसके बाद डॉक्टर आपके बच्चे का मूल्यांकन किसी विशेषज्ञ या काउंसलर द्वारा किया जाए, जैसे मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक, नैदानिक ​​सामाजिक कार्यकर्ता, मनोरोग नर्स या अन्य मानसिक स्वास्थ्य करने वाले पेशेवर उसे सपोर्ट करते हैं. 

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मनोचिकित्सक पेरेंट्स से मांगते हैं बच्चे की ये जानकारी 

कंपलीट मेडिकल एग्जाम 
मेडिकल हिस्ट्री 
फिजिकल ऑर इमोशनल ट्रॉमा की हिस्ट्री 
फिजिकल एंड मेंटल हेल्थ की फैमिली हिस्ट्री 
माता-पिता से बच्चों के लक्षणों को लेकर बातचीत 
बच्चे के डेवलेपमेंट प्रोग्रेस का पूरा डेटा 
एकेडमिक हिस्ट्री 
पेरेंट्स के साथ बातचीत 
बच्चे और पेरेंट्स के साथ पूरा इंट्रैक्शन

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पेरेंट्स के तौर पर मानसिक बीमारी से निपटने में कैसे कर सकते हैं हेल्प 

सबसे पहले पेरेंट्स बच्चे की समस्या के बारे में डिटेल से जानें.     
फैमिली काउंसिलिंग कराएं और डॉक्टर से सलाह लेकर ही ट्रीटमेंट प्लान का हिस्सा बनें
अपने बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य पर पेशेवर से सलाह लें कि अपने बच्चे को आपको कैसे प्रतिक्रिया देनी है. 
बच्चे के टफ बिहैव‍ियर पर आपको कैसे रिऐक्ट करना है. 
माता-पिता के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नामांकन करें. 
आराम करने और अपने बच्चे के साथ मस्ती करने के तरीके खोजें. 
अपने बच्चे की ताकत और क्षमताओं की प्रशंसा करें. 
आवश्यक सहायता प्राप्त करने के लिए अपने बच्चे के स्कूल के साथ काम करें. 

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