अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), दिल्ली और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL) ने मिलकर एक नया प्रोजेक्ट शुरू किया है. इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य चिकित्सा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नवाचार (नई तकनीक या समाधान) लाना है, ताकि बीमारियों का समाधान ढूंढा जा सके.
22 नवंबर 2024 को, एम्स नई दिल्ली, आईआईटी दिल्ली और यूसीएल ने एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत तीनों संस्थान अनुसंधान और नवाचार में साझेदारी करेंगे. इस साझेदारी के माध्यम से, यह संस्थान अपने उद्योग संपर्कों और संसाधनों का लाभ उठाकर बहु-विषयक तकनीकी समाधान विकसित करने पर काम करेंगे. इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य चिकित्सा प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार लाना है, खासकर निदान और इमेजिंग, चिकित्सा उपकरणों और इम्प्लांट्स, सहायक तकनीकों, डिजिटल स्वास्थ्य, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, क्वांटम टेक्नोलॉजी, शल्य चिकित्सा और उपचार हस्तक्षेपों और संवेदक प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में.
एम्स के चिकित्सा नवाचार और उद्यमिता केंद्र के प्रमुख प्रोफेसर आलोक ठाकुर ने कहा, "यह त्रिपक्षीय साझेदारी स्वास्थ्य और सामाजिक चुनौतियों को संबोधित करने में एक बड़ा कदम साबित होगी. चिकित्सा विज्ञान, इंजीनियरिंग और वैश्विक नीति की विशेषज्ञता को मिलाकर, हम मेडटेक इनोनेशन के लिए एक मंच तैयार कर रहे हैं." आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर रंगन बनर्जी ने इस साझेदारी के बारे में कहा, "हमें पूरा विश्वास है कि हमारे वैज्ञानिक, इंजीनियरिंग और चिकित्सा शोध के क्षेत्र में नवाचार लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं."
UCL के अध्यक्ष ने कही ये बात
यूसीएल के अध्यक्ष डॉ. माइकल स्पेंस ने भी इस साझेदारी के महत्व पर बल दिया और कहा, "हम जानते हैं कि विभिन्न विषयों को एक साथ लाकर हम बड़ी समस्याओं का समाधान कर सकते हैं. यह नई साझेदारी हमारे लिए बड़े परिवर्तन लाने का एक अवसर है."
इस समझौते के तहत, आईआईटी दिल्ली में आयोजित mPRAGATI सुविधा का निरीक्षण किया गया, जो एक महत्वपूर्ण पहल है. यह पहला अवसर है जब तीनों संस्थान सामूहिक रूप से मिलकर काम करेंगे. इसके अतिरिक्त, UCL के 'इंडिया स्पेशल' पॉडकास्ट में प्रोफेसर सुमित मल्होत्रा (एम्स) और प्रोफेसर पीवीएम राव (आईआईटी दिल्ली) ने इस साझेदारी के उद्देश्य और भविष्य की दिशा पर चर्चा की. यह साझेदारी चिकित्सा क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर सकती है और भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है.