अजमेर सेंट्रल यूनिवर्सिटी में हुई घटना ने यहां के '1992 ब्लैकमेलिंग कांड' की फिर से याद दिला दी है. इस मामले में अजमेर सेंट्रल यूनिवर्सिटी की दो छात्राओं ने गुरुवार को आरोप लगाया कि यहां के सिक्योरिटी ऑफिसर राजपाल सिंह रेवाड़ द्वारा उनकी फोटोज को गलत तरह से लेकर शेयर किया जा रहा था ताकि उन्हें ब्लैकमेल किया जा सके.
इस आरोप के बाद गुरुवार रात को कैंपस में छात्र-छात्राओं ने जमकर हंगामा किया. प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने यूनिवर्सिटी कैंपस में तोड़फोड़ भी की है. यूनिवर्सिटी की छात्रा नेहल ने बताया कि सिक्योरिटी ऑफिसर छात्राओ की फोटोज खींचकर उनकी निजी जानकारियां निकलवाता है.
नेहल ने कहा कि सिक्योरिटी का काम उनकी सुरक्षा करना है ना कि उनकी निजी जानकारी लेने का. यूनिवर्सिटी की छात्राओ ने आरोप लगाया है कि इससे पहले भी सिक्योरिटी ऑफिसर द्वारा कई लड़कियों की फोटो खींचकर उन्हें ब्लैकमेल किया गया था. लेकिन इस बार कॉलेज की एक छात्रा ने पहल करते हुए पूरा घटनाक्रम अपने साथियों को बताया और इसके बाद यूनिवर्सिटी कैंपस में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं.
छात्रों की मांग है कि सिक्योरिटी ऑफिसर को बर्खास्त किया जाए और पूरे मामले की उच्च स्तर पर जांच की जाए गुस्साए छात्रों ने रात 1:00 बजे तक प्रदर्शन किया. शुक्रवार को जब मामला गरमाया तो पुलिस के आला अधिकारी और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची. जब आजतक ने सच जानने की कोशिश की तब सिक्योरिटी ने गेट पर ही रोक लिया. कैमरा वगैरह देखकर विद्यार्थियों ने खुद गेट पर आकर बातचीत.
छह माह में दो लड़कियों ने किया सुसाइड, पेरेंट्स बोले...
छात्र-छात्राओं ने बताया कि ऐसी कई शिकायतें पहले भी वे यूनिवर्सिटी प्रशासन से कर चुके हैं. इसी साल 27 जुलाई को भी राजपाल के खिलाफ शिकायत की गई थी. इस शिकायत के प्वाइंट नंबर चार में जहां साफ लिखा हैं कि राजपाल सिक्यूरिटी गार्ड्स को लड़कियों की तस्वीरें खींचने के लिए कहा करता था. वह छात्राओं को धमकाया भी करता था.
जब आजतक मामले की तह तक गया तब पता चला कि यहां पिछले छह महीने में दो बच्चियां सुसाइड कर चुकी हैं. जब आजतक ने 18 साल की सलोनी जिसने कुछ टाइम पहले यहां आत्महत्या की थी. उसकी मां बाप राम किशोर साहू और मां सीमा साहू से बात की तो उन्होंने बताया कि अजमेर सेंट्रल यूनिवर्सिटी में उनकी बच्ची ने कुछ महीने पहले एडमिशन लिया था. वहा प्रशासन ने बताया कि सलोनी से सुसाइड किया है लेकिन उन्होंने कहा कि उनकी बेटी ने आत्महत्या नहीं की है बल्कि उसका कत्ल किया गया है. वहीं पुलिस का कहना है कि इस मामले में जांच जारी है.
एक और पीड़िता आई सामने
आजतक के सामने एक और पीड़िता आई सामने जो कि एक दलित महिला हैं. वो यहां बतौर मल्टी टास्क कर्मचारी पोस्टेड थी. महिला ने बताया कि राजपाल ने उसका ट्रांसफर टेक्निकल स्टाफ से हॉस्टल में करा दिया था. वहां उसको जबरदस्ती सात दिनों तक रखा. फिर दोस्ती का दबाव बनाने लगा. जब उसने मना किया तो उसको निकलवा दिया. उसने आरोप लगाया कि कुलपति ने भी उसकी सुनवाई नहीं की. फिलहाल मामले की जांच जारी है. साथ ही यहां एक बड़े अपराध की आशंका जताई जा रही है.
हम प्राइवेसी का सम्मान करते हैं: कुलपति
अजमेर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो आनंद भालेराव ने कहा कि छात्राओं की सुरक्षा के लिए ही हॉस्टल में सुरक्षा उपाय और अनुशासनात्मक नियम लागू किए जाते हैं पर हम प्रत्येक विद्यार्थी की गोपनीयता का भी सम्मान करते हैं.
विश्वविद्यालय की एक छात्रा की तस्वीर वायरल होने से संबंधित मुद्दा हमारे संज्ञान में लाया गया है. इस घटना की विश्वविद्यालय निंदा करता है. इस घटना की तुरंत और प्रभावी ढंग से जांच पड़ताल करने का निर्देश दिया है.
कुलपति ने अपने बयान में कहा कि सभी प्रासंगिक जानकारी और दृष्टिकोण इकट्ठा करने के लिए मामले की गहन जांच शुरू करने के लिए प्रोटोकॉल बोर्ड को आदेश दिए गए हैं. कुछ अन्य शिकायतें भी मिली हैं और हमने पहले ही मामले की जांच के लिए एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को नियुक्त कर दिया है जिनके द्वारा निष्पक्ष जांच की जा रही है. जांच रिपोर्ट आने पर निष्कर्षों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी. मैं आपको आश्वासन देता हूं की जांच पूर्णतः पारदर्शी तरीके से होगी और यदि कोई दोषी पाया गया तो दोषी के खिलाफ उचित कार्रवाई भी की जाएगी. यदि किसी छात्र, शिक्षक या स्टाफ सदस्य के पास इस मुद्दे से संबंधित कोई सुझाव या प्रतिक्रिया है तो कृपया हमसे संपर्क करने में संकोच न करें.
(Additional Inputs: चंद्रशेखर)