पिछले महीने से लापता 25 वर्षीय भारतीय छात्र अमेरिका के क्लीवलैंड शहर में मृत पाया गया. अमेरिका में इंडियन स्टूडेंट कम्यूनिटी के लिए ये किसी ट्रेजडी से कम नहीं है, क्योंकि यह एक सप्ताह के भीतर दूसरे भारतीय छात्र की मौत का मामला है.
बता दें कि हैदराबाद के नचाराम के रहने वाले मोहम्मद अब्दुल अरफाथ पिछले साल मई में क्लीवलैंड यूनिवर्सिटी से आईटी में मास्टर्स करने के लिए अमेरिका पहुंचे थे. न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूतावास ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि "यह जानकर दुख हुआ कि मोहम्मद अब्दुल अरफाथ, जिनके लिए तलाशी अभियान चल रहा था, क्लीवलैंड, ओहियो में मृत पाए गए."
अरफाथ के परिवार के प्रति "गहरी संवेदना" व्यक्त करते हुए वाणिज्य दूतावास ने कहा कि वह उनकी मौत की गहन जांच सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय एजेंसियों के संपर्क में हैं. वाणिज्य दूतावास ने कहा कि हम उनके पार्थिव शरीर को भारत लाने के लिए शोक संतप्त परिवार को हर संभव सहायता प्रदान कर रहे हैं." पिछले महीने वाणिज्य दूतावास ने कहा था कि वह भारतीय छात्र का पता लगाने के लिए स्थानीय कानून प्रवर्तन अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहा है.
पिछले हफ़्ते WKYC 3News की एक रिपोर्ट के अनुसार, अरफ़त 5 मार्च को अमेरिका के ओहयो में रिज़र्व स्क्वायर स्थित अपने घर से निकला था और वापस नहीं लौटा. क्लीवलैंड पुलिस ने न्यूज़ आउटलेट को बताया था कि उन्हें छात्र की सुरक्षा की चिंता है. पुलिस ने अरफ़त के लिए "Missing Person" अलर्ट भी जारी किया था, जिसमें बताया गया था कि वह 5'8" लंबा, 150 पाउंड वज़न, काले बाल और भूरी आँखों वाला भारतीय लड़का था. उसे आखिरी बार सफ़ेद टी-शर्ट, लाल जैकेट और नीली जींस पहने देखा गया था.
WKYC 3News की रिपोर्ट में क्लीवलैंड स्टेट यूनिवर्सिटी के एक बयान का हवाला दिया गया है जिसमें कहा गया है कि विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड से पता चलता है कि अरफाथ जनवरी 2024 तक क्लीवलैंड स्टेट का पंजीकृत छात्र नहीं था और न ही वह क्लीवलैंड स्टेट में पढ़ाई के दौरान कैंपस में रहता था. क्लीवलैंड स्टेट यूनिवर्सिटी ने पुलिस विभाग की अरफत के लापता होने की सक्रिय जांच में पुलिस की सहायता के लिए जरूरी जानकारी दी थीं. बयान में कहा गया कि विश्वविद्यालय की संवेदनाएं उनके प्रियजनों के साथ हैं, और सीएसयू पुलिस जरूरत के मुताबिक क्लीवलैंड पुलिस को सहयोग करेगी.
पिता से आखिरी बार 7 मार्च को की थी बात
अरफाथ के पिता मोहम्मद सलीम ने बताया कि अरफाथ ने आखिरी बार उनसे 7 मार्च को बात की थी और तब से वह अपने परिवार से संपर्क में नहीं रहा. उसका मोबाइल फोन भी बंद था. अमेरिका में अरफाथ के रूममेट्स ने उसके पिता को बताया था कि उन्होंने क्लीवलैंड पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई है. हालांकि, 19 मार्च को अरफाथ के परिवार को एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया, जिसने दावा किया कि अरफाथ को कथित तौर पर ड्रग्स बेचने वाले एक गिरोह ने अगवा कर लिया है और उसे "छोड़ने" के लिए 1,200 अमेरिकी डॉलर की मांग की थी.
उनके पिता ने बताया कि फोन करने वाले ने फिरौती न देने पर अरफाथ की किडनी बेचने की भी धमकी दी थी. सलीम ने पिछले महीने हैदराबाद में पीटीआई को बताया था कि मुझे एक अज्ञात नंबर से कॉल आया और कॉल करने वाले ने मुझे बताया कि मेरे बेटे का अपहरण कर लिया गया है और पैसे की मांग की. कॉल करने वाले ने भुगतान के तरीके के बारे में नहीं बताया, बस रकम का भुगतान करने के लिए कहा. जब मैंने कॉल करने वाले से अपने बेटे से बात कराने को कहा ते उसने इनकार कर दिया.
विदेश मंत्री एस जयशंकर को भी पत्र लिखा
अरफाथ के माता-पिता ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि उनके बेटे का पता लगाने और उसे सुरक्षित वापस लाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं. सलीम ने विदेश मंत्री एस जयशंकर को भी पत्र लिखा है. इस घटना ने अमेरिका में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं.
नहीं थम रहा सिलसिला
इसी क्रम में पिछले सप्ताह ओहियो में एक भारतीय छात्रा उमा सत्य साईं गद्दे की मृत्यु हो गई और पुलिस मामले की जांच कर रही है. वहीं पिछले महीने भारत के 34 वर्षीय प्रशिक्षित शास्त्रीय नर्तक अमरनाथ घोष की सेंट लुईस, मिसौरी में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
यही नहीं, पिछले महीने, वाणिज्य दूतावास ने एक्स पर बोस्टन में 20 वर्षीय भारतीय छात्र अभिजीत परुचुरू की मौत के बारे में भी पोस्ट किया था. कनेक्टीकट में रहने वाले परुचुरू के माता-पिता जांच अधिकारी से सीधे संपर्क में थे और उनकी मौत की शुरुआती जांच में किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना को खारिज कर दिया गया था.
इससे पहले पर्ड्यू विश्वविद्यालय में अध्ययनरत 23 वर्षीय भारतीय-अमेरिकी छात्र समीर कामथ 5 फरवरी को इंडियाना के एक प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र (nature preserve in Indiana ) में मृत पाए गए थे.
2 फरवरी को, 41 वर्षीय भारतीय मूल के आईटी कार्यकारी विवेक तनेजा को वाशिंगटन में एक रेस्तरां के बाहर हुए हमले में जानलेवा चोटें आईं.
जनवरी में, इलिनोइस विश्वविद्यालय के 18 वर्षीय छात्र अकुल धवन को एक परिसर की इमारत के बाहर बेहोश पाया गया था. जांच से पता चला कि उसकी मौत हाइपोथर्मिया के कारण हुई थी, अधिकारियों ने फैसला सुनाया कि अत्यधिक शराब के नशे और लंबे समय तक अत्यधिक ठंडे तापमान के संपर्क में रहने से उसकी मौत हो गई थी.
उसी माह एक अन्य दुखद घटना में, जॉर्जिया में एक बेघर नशेड़ी ने 25 वर्षीय भारतीय छात्र विवेक सैनी की पीट-पीटकर हत्या कर दी.
अमेरिका में भारतीय छात्रों से जुड़ी दुखद और चिंताजनक घटनाओं के बीच, पेप्सिको की पूर्व सीईओ इंदिरा नूयी ने उन्हें "सतर्क" रहने, स्थानीय कानूनों का सम्मान करने की सलाह दी थी और उनसे अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नशीली दवाओं या अत्यधिक शराब पीने से बचने का आग्रह किया था.
ऐसे भारत आ रहे शव
स्वयंसेवी आधारित गैर-लाभकारी संगठन टीम एड इन और अन्य मामलों में कई व्यक्तियों के शवों को भारत वापस लाने में सहायता कर रहा है. टीम एड के संस्थापक मोहन नन्नापनेनी ने कहा है कि संगठन जल्द ही "शैक्षणिक और निवारक" कार्यक्रम शुरू करने की प्रक्रिया में है, ताकि छात्रों और श्रमिकों सहित यहां भारतीय प्रवासियों को मार्गदर्शन और सहायता प्रदान की जा सके, जिसका उद्देश्य उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है.
फरवरी में, नन्नापानेनी ने पीटीआई को बताया था कि उनका संगठन हर दिन कम से कम एक ऐसे दुखद मामले से निपट रहा है. उन्होंने कहा था कि भारतीय छात्रों की कार दुर्घटनाओं और डूबने से दुखद मौत के मामले सामने आए हैं. उन्होंने यह भी चिंता जताई थी कि अमेरिका में नशीली दवाओं का दुरुपयोग बड़े पैमाने पर हो रहा है और दुर्भाग्य से, भारतीय छात्रों के नशीली दवाओं के दुरुपयोग और ओवरडोज के कारण मरने के मामले सामने आए हैं.