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Dress Code For Teachers: वैशाली में शिक्षकों के लिए प्रशासन ने जारी किया ड्रेस कोड, 24 घंटे में ही वापस लेना पड़ा फरमान

Bihar News: बिहार के वैशाली जिला में प्रशासन ने शिक्षकों के ड्रेस कोड को लेकर एक फरमान जारी किया था. इस फरमान के मुताबिक, शिक्षकों को स्कूल में कुर्ता-पैजामा या जींस पहनकर आने की इजाजत नहीं थी. लेकिन 24 घंटे के बाद ही प्रशासन को अपना फरमान वापस लेना पड़ा.

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Circular prescribing teachers’ dress code taken back (Representational Image)
Circular prescribing teachers’ dress code taken back (Representational Image)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा प्रशासन का फरमान
  • शिक्षक संघों ने किया फरमान का विरोध

Vaishali Dress Code For Teachers: बिहार के वैशाली जिला प्रशासन को शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड लागू करने का फरमान शिक्षक संघों के भारी दबाव के बाद वापस लेना पड़ा है. 13 जुलाई को जिला शिक्षा पदाधिकारी ने प्रारंभिक और माध्यमिक स्कूल के शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड लागू करने का निर्देश जारी किया था मगर 24 घंटे के अंदर उन्हें यह फरमान वापस लेना पड़ा.

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प्रारंभिक और माध्यमिक स्कूल के शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड लागू करने का जो फरमान जारी किया गया था, उसमें लिखा गया था कि आमतौर पर कुर्ता पजामा पहनें या फिर जींस और टी-शर्ट पहने हुए शिक्षकों से समाज में उनकी छवि को लेकर गलत संदेश जाता है.

जिला शिक्षा पदाधिकारी ने यह पत्र जिले के सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, सभी प्रारंभिक और माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक और प्राचार्य को लिखा था और इस आदेश का सख्ती से पालन कराने का निर्देश जारी किया था.

जिला शिक्षा पदाधिकारी के नोटिस में लिखा गया था कि, 'समाज निर्माण में शिक्षकों की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है. शिक्षक छात्रों के लिए स्कूल में और स्कूल के बाहर भी पथ प्रदर्शक की भूमिका में होते हैं. इसी कारण से यह जरूरी है कि शिक्षक हमेशा औपचारिक फुल या हाफ शर्ट और पैंट पहनकर स्कूल आएं ताकि छात्रों में उनको लेकर सकारात्मक छवि बने.'

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हालांकि, प्रशासन की तरफ से शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड लागू किए जाने के फरमान के बाद शिक्षकों में हड़कंप मच गया और सोशल मीडिया पर भी प्रशासन का यह फरमान वायरल होने लगा.

शिक्षक संघों के तरफ से इस आदेश का विरोध हुआ और फिर शिक्षकों का एक प्रतिनिधि मंडल जिला शिक्षा पदाधिकारी से भी इस बाबत मिला और अपनी आपत्ति दर्ज कराई जिसके बाद प्रशासन को अपना फरमान वापस लेना पड़ा.


 

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