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बिहार सरकार ने 5 लाख छात्रों को घोषित किया 'Ghost', स्कूल से नाम काटने पर 300 करोड़ की बचत!

बिहार शिक्षा विभाग द्वारा छात्रों की उपस्थिति में सुधार के लिए समीक्षा अभियान शुरू करने के बाद पिछले कुछ महीनों में राज्य के सरकारी स्कूलों से 5 लाख से अधिक स्कूली छात्रों के नाम काट दिए गए हैं. शिक्षा विभाग का मनना है कि इससे राज्य के खजाने को डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के रूप में 300 करोड़ रुपये की बचत होगी.

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सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

बिहार सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले 5 लाख से ज्यादा छात्रों को 'Ghost' बताते हुए स्कूल से नाम काट दिया है. एसीएस - शिक्षा, केके पाठक द्वारा राज्य के सभी 38 जिलाधिकारियों को जारी एक परिपत्र के अनुसार, 'घोस्ट स्टूडेंट' बिहार राज्य के लिए एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं क्योंकि उनके लिए डीबीटी की राशि 300 करोड़ रुपये है.

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राज्य शिक्षा विभाग द्वारा छात्रों की उपस्थिति में सुधार के लिए समीक्षा अभियान शुरू करने के बाद पिछले कुछ महीनों में राज्य के सरकारी स्कूलों से 5 लाख से अधिक स्कूली छात्रों के नाम काट दिए गए हैं. इस अभियान से राज्य में सरकारी स्कूलों के वास्तविक नामांकन आंकड़े सामने आने की संभावना है. इससे राज्य के खजाने को डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से अयोग्य और फर्जी छात्रों के पास जाने वाली बड़ी रकम बचाने की भी उम्मीद है.

01 जुलाई 'घोस्ट स्टूडेंट्स' तलाश रहे अधिकारी 
राज्य शिक्षा विभाग ने एसीएस - शिक्षा, केके पाठक के निर्देश पर "वीडिंग आउट" अभियान चलाया, जो 1 जुलाई, 2023 से राज्य भर के सरकारी स्कूलों का दौरा कर रहे हैं, और उक्त छात्र विस्तारित अवधि के लिए अनुपस्थित पाए गए जिसके बाद उनका नाम स्कूल से काटने का फैसला लिया है. शिक्षा विभाग ने जिलाधिकारियों (RDD/DEO/DPO) को छात्रों की अनुपस्थिति की वजह जानने के लिए हर एक स्कूल में हर एक छात्र-छात्रा से और उनके अभिभावकों से बात करने के लिए कहा है. 

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हर एक छात्र की ट्रेकिंग के निर्देश
अपने जिले के DEO और सभी DPOs को 5-5 विद्यालय अडॉप्ट करने के लिए कहा गया है. अगर डीपीओ के कार्यक्षेत्र में कोई ऐसा स्कूल नहीं है जहां छात्रों की उपस्थिति 50 प्रतिशत से कम है, तो उसे कार्यक्षेत्र के बाहर का भी विद्यालय मिलेगा. अधिकारियों को रोजाना इन स्कूलों में विजिट करना होगा और हर एक छात्र की ट्रेकिंग करनी होगी. जो छात्र लगातार तीन दिन अनुपस्थित रहता है, उसे प्रिंसिपल नोटिस दें. 15 दिन लगातार अनुपस्थित रहने पर छात्र का नाम काट दिया जाए.

परिपत्र में कहा गया है कि करीब 10 प्रतिशत चालू सरकारी स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति 50 प्रतिशत से कम है. राज्य सरकार डीबीटी के तहत लाभ पर 3,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करती है. जिसमें से, सरकार का इरादा हालिया छंटनी अभियान से 300 करोड़ रुपये की बचत करने का है.

एक जिले में 6,319 छात्रों के स्कूल से नाम काटे
परिपत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि 50 प्रतिशत से कम उपस्थिति वाले सरकारी स्कूलों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है. खगड़िया के जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय द्वारा जारी एक पत्र के अनुसार, जिले के 11वीं कक्षा के 17,291 छात्रों में से 6,319 छात्र अर्धवार्षिक परीक्षा में शामिल नहीं हुए. अनुपस्थितों के नाम काट दिए गए हैं.

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यहां बता दें कि आमतौर पर यह आशंका है कि बड़ी संख्या में 'Ghost Student' कहीं और नामांकित हैं या निजी स्कूलों में पढ़ रहे हैं. शिक्षा विभाग उन परिवारों की पहचान के लिए मतदाता सूची के साथ घर-घर जाकर सर्वेक्षण करने वाला है, जिनके बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं.

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