CBSE Exam Controller on Board Exams: सीबीएसई बोर्ड 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं 15 फरवरी 2025 से शुरू होने वाली हैं, और इस समय देशभर के छात्र अपनी बोर्ड परीक्षा की तैयारियों में व्यस्त हैं. इस बीच, सीबीएसई बोर्ड के एग्जाम कंट्रोलर, संयम भारद्वाज ने परीक्षा से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण टिप्स साझा किए हैं. उन्होंने छात्रों को बेहतर परिणाम के लिए अपनी तैयारी को एक सुनियोजित तरीके से करने की सलाह दी है. इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि जब वह खुद अपनी बोर्ड परीक्षाएं दे रहे थे, तो उनकी तैयारी और रणनीति क्या थी.
अपनी बोर्ड परीक्षा के लिए कैसे की थी सीबीएसई एग्जाम कंट्रोलर ने तैयारी?
संयम भारद्वाज ने इंडिया टुडे से बात करते हुए अपनी बोर्ड परीक्षओं को लेकर बताया कि उनके समय में स्कूल जाने वाले छात्रों पर आज की तरह इंजीनियरिंग या मेडिकल की सीट पाने का दबाव नहीं था. उनके माता-पिता ने नियमित स्कूल जाने पर ध्यान दिया और बच्चों को बड़े कोचिंग प्रोग्रामों में दाखिला नहीं करवाया.
वह कहते हैं, "मेरे माता-पिता ने कभी मेरे ऊपर किसी करियर को लेकर दबाव नहीं डाला, लेकिन उन्होंने मुझे यह सोचने का अवसर दिया कि मैं जीवन में क्या चाहता हूं और परीक्षा तक मुझे पूरा समर्थन दिया." वह यह भी कहते हैं कि जबकि नियमित स्कूल जाना महत्वपूर्ण था, उनके शिक्षकों ने उनके अध्ययन के मार्ग को डिजाइन करने में मदद की.
बोर्ड परीक्षा के लिए कैसे करें तैयारी?
संयम भारद्वाज ने अपनी बोर्ड परीक्षा में सफलता का श्रेय एक सही, सालभर की तैयारी रणनीति को दिया. उन्होंने कहा कि उन्होंने आखिरी समय में क्रैमिंग (जल्दबाजी में पढ़ाई) नहीं की, बल्कि नियमित रूप से पढ़ाई की. उन्होंने बताया कि वह पूरे साल थोड़ा-थोड़ा पढ़ते थे. वह कहते हैं, "मैंने पूरे साल अच्छी तरह से तैयारी की और परीक्षा से पहले एक सही अध्ययन शेड्यूल का पालन किया. बार-बार उत्तर लिखने से मुझे अवधारणाओं को बेहतर समझने में मदद मिली." सयंम भारद्वाज ने बताया कि वह आंसर लिखने की प्रैक्टिस किया करते थे साथ ही परीक्षा के समय अपने तय शेड्यूल के हिसाब से पढ़ाई करते थे.
स्ट्रेस को लेकर क्या बोले संयम भारद्वाज
बोर्ड परीक्षा के दौरान स्ट्रेस को लेकर संयम भारद्वाज का मानना है कि अगर तनाव को अच्छी तरह से मैनेज किया जाए तो यह अच्छा है. उन्होंने कहा, "छात्रों को परीक्षा में जो तनाव होता है, वह अपने आप में बुरा नहीं है. यह अच्छा तनाव है जिसे अच्छा रिजल्ट लाने के लिए प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जा सकता है. माता-पिता और शिक्षकों को छात्रों को बेहतर प्रदर्शन करने के लिए उस दबाव के साथ काम करना सिखाना चाहिए.