नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP 2020) के तहत भारत की शिक्षा व्यवस्था में कई तरह के बदलाव होने जा रहे हैं. इनमें से एक बदलाव बोर्ड परीक्षा को लेकर है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बोर्ड परीक्षाओं को साल में दो बार करवाने की जानकारी दी है. शिक्षा मंत्रालय ने अगले एकेडमिक सेशन 2025-26 से 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा साल में दो बार आयोजित करवाने पर सहमति दे दी है.
आगामी शैक्षणिक सत्र से बोर्ड परीक्षाएं आईआईटी जेईई मेन्स के फॉर्मेट पर आयोजित की जा सकता है. वर्तमान में इंजीनियरिंग कोर्स में एडमिशन के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) जेईई मेन्स परीक्षा साल में दो बार आयोजित करती है. जेईई मेन सत्र 1 जनवरी में आयोजित किया जाता है, जबकि सत्र 2 परीक्षा अप्रैल में आयोजित की जाता है. जिस सेशन में उम्मीदवार के बेस्ट मार्क्स होते हैं, उसे फाइनल माना जाता है. इसी तरह 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा में भी लागू किया जा सकता है. अभी फाइनल सहमति का इंतजार है.
दरअसल, साल 2025-26 में होने वाली बोर्ड परीक्षाओं के लिए दो प्लान बनाए गए हैं. पहले प्लान में साल में दो बार बोर्ड परीक्षा शामिल है, जिसमें स्टूडेंट्स का बेहतर रिजल्ट होगा उसी को फाइनल माना जाएगा. वहीं दूसरे प्लान में बोर्ड परीक्षाओं को सेमेस्टर वाइज करवाना है. यानी छात्रों को पूरा सिलेबल 6-6 महीने में कवर किया जाएगा और सेमेस्टर वाइज परीक्षा होगी. एक बार फरवरी में और दूसरी बार अप्रैल में बोर्ड परीक्षा होगी.
साल में दो बार बोर्ड परीक्षा कराने का फायदा
दरअसल, इस कदम का मुख्य उद्देश्य बोर्ड परीक्षाओं को तनावमुक्त बनाना और छात्रों को अधिक अवसर और लाभ प्रदान करना है. शिक्षा मंत्री ने कहा था कि छात्र अक्सर यह सोचकर स्ट्रेस ले लेते हैं कि उनका एक साल बर्बाद हो गया, उनका मौका चला गया या वे बेहतर प्रदर्शन कर सकते थे. इसलिए केवल एक मौके के डर से होने वाले तनाव को कम करने के लिए साल में दो बार बोर्ड एग्जाम का ऑप्शन दिया जा रहा है. साल में दो बार परीक्षा होने से छात्रों को रटने की बजाय कौशल विकास और समझ पर अधिक ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी. अभी भी तौर- तरीकों पर काम किया जाना बाकी है.
क्या अनिवार्य होगा दोनों बार बोर्ड एग्जाम?
बता दें कि पिछले साल अक्टूबर में, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पीटीआई को बताया था कि साल में दो बार बोर्ड परीक्षा में शामिल होना छात्रों के लिए अनिवार्य नहीं होगा. शिक्षा मंत्री ने कहा था कि छात्रों के पास इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई की तरह साल में दो बार (कक्षा 10 और 12 बोर्ड) परीक्षा में बैठने का विकल्प होगा. वे बेस्ट स्कोर चुन सकते हैं, लेकिन यह पूरी तरह से वैकल्पिक होगा, कोई बाध्यता नहीं होगी.