BPSC आंदोलन के दौरान प्रशांत किशोर पर उठे विरोधों के बीच, उन्होंने अब अपनी सफाई पेश की है. दरअसल, तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया था कि प्रशांत किशोर आंदोलन के दौरान अचानक भाग गए थे. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रशांत किशोर ने कहा, "अगर मैं भाग गया था तो तेजस्वी यादव अस्पताल चले जाते." प्रशांत किशोर ने आगे कहा, "मैं बीती रात आंदोलनकारियों से मिलने गया था और उनसे बातचीत की थी. जो कुछ भी हुआ, उसमें मेरी पूरी भागीदारी थी, लेकिन आरोपों के बावजूद मैंने किसी से भागने का कोई प्रयास नहीं किया."
लाठीचार्ज को लेकर क्या बोले प्रशांत किशोर
प्रशांत किशोर ने मुख्य सचिव से बातचीत के लिए सहमति बनने को लेकर कहा कि एक 5 सदस्यीय डेलिगेशन का गठन किया गया है. उन्होंने कहा, मुख्य सचिव से बातचीत पर सहमति बने इसके लिए हमारे 5 साथी का डेलिगेशन तय हुआ है. मैनें छात्रों से अपील की थी कि जिसको घर जाना है घर जाएं. मैं निकलकर फिर से गांधी मैदान जाकर बैठा. हजार दो हजार छात्रों ने मेरी बात नहीं मानी. उनका मानना था कि आज वापस नहीं जाएंगे. मैं गांधी मैदान से निकला उसके 45 मिनट बाद लाठीचार्ज हुआ. मैं वहां से नहीं हटा बल्कि मेरे हटने के बाद लाठीचार्ज हुआ, जिन्होंने लाठीचार्ज किया ये गलत हुआ है.
मांग न पूरी होने पर 2 जनवरी से खुद धरने पर बैठेंगे प्रशात किशोर
प्रशांत किशोर ने आगे कहा, "हम पटना पुलिस के खिलाफ एफआईआर दर्ज करेंगे और अदालत में भी जाएंगे, साथ ही ह्यूमन राइट्स में भी इसकी शिकायत करेंगे. हमने यह भी तय किया है कि आज डेलिगेशन मुख्य सचिव से मिलने जाएगा. हमें उम्मीद है कि सरकार अभ्यर्थियों की बात मानेगी. अगर यह मामला हल नहीं हुआ, तो 2 जनवरी से मैं खुद धरने पर बैठूंगा."
प्रशांत किशोर पर क्यों भड़के छात्र?
रविवार को प्रशांत किशोर के साथ हजारों अभ्यर्थी पटना के गांधी मैदान में इकट्ठा हुए और बीपीएससी परीक्षा को रद्द करने की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू किया. प्रदर्शनकारियों ने ‘बीपीएससी परीक्षा रद्द करो’ के नारे लगाए और इसका विरोध किया. इसके बाद, दिन में लगभग 4 बजे, प्रशांत किशोर के नेतृत्व में छात्र मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च करने के लिए जेपी गोलम्बर पहुंचे. हालांकि, कुछ समय बाद प्रशांत किशोर प्रदर्शन स्थल से निकल गए, जबकि प्रदर्शनकारी छात्र मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने के लिए घंटों इंतजार करते रहे.
इस बीच, पुलिस द्वारा आंदोलनकारी छात्रों पर वाटर कैनन और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया गया. पुलिस के इस कदम से प्रदर्शनकारियों में गुस्सा फैल गया और वे प्रशांत किशोर को लेकर ‘चोर-चोर’ के नारे लगाने लगे. उनका आरोप है कि प्रशांत किशोर ने उनका साथ छोड़ दिया. प्रदर्शनकारियों का मानना था कि प्रशांत किशोर ने उनका समर्थन केवल राजनीतिक फायदा उठाने के लिए किया, जबकि उन्होंने उनकी समस्याओं पर सही तरीके से ध्यान नहीं दिया.
प्रशांत किशोर के लिए लगे 'Go Back' के नारे
इसके बाद प्रदर्शनकारी छात्रों ने जन स्वराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर को गर्दनीबाग के धरना स्थल से हटा दिया. आधी रात को प्रशांत किशोर वहां पहुंचे थे, जहां 'गो बैक' के नारे लगे और उनके बीच कुछ छात्र नेताओं से नोकझोंक भी हुई. इस दौरान प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि छात्र कंबल हमसे लेते हैं और नेतागिरी हमको दिखा रहे हैं, जिसके बाद छात्रों का गुस्सा और बढ़ गया. इसके बाद अब प्रशांत किशोर की सफाई सामने आई है. उन्होंने कहा कि गांधी मैदान से निकला उसके 45 मिनट बाद लाठीचार्ज हुआ. मैं वहां से नहीं हटा बल्कि मेरे हटने के बाद लाठीचार्ज हुआ, जिन्होंने लाठीचार्ज किया ये गलत हुआ है.