यूपी के बुलंदशहर जिले के रहने वाले पवन कुमार ने UPSC EXAM में 239वीं रैंक हासिल की है. पवन कुमार की इस सफलता पर परिवार समेत पूरे गांव में खुशी का माहौल है. ऐसे में जब पवन सिविल सर्विसेज एग्जाम क्लियर करने के बाद पहली बार अपने गांव पहुंचे तो लोगों ने उनका जोरदार स्वागत किया. पवन को फूल-माला के साथ नोटों की भी माला पहनाई गई. उनके पीछे गाड़ियों का काफिला चल रहा था. ढोल-नगाड़े और डीजे की धुन पर ग्रामीण नाचते-गाते नजर आ रहे थे.
दरअसल, कठिन परिस्थितियों में रहते हुए भी पवन कुमार ने हाल ही में UPSC एग्जाम क्लियर किया है. इस एग्जाम में उन्होंने 239वीं रैंक लाकर परिवार और गांव का मान बढ़ाया है. परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी न होने के बावजूद भी पवन ने अपनी मेहनत और लगन से ये मुकाम हासिल किया है. इस बीच जब वो अपने पैतृक गांव रघुनाथपुर पहुंचे तो ग्रामीणों और आसपास के लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया.
रोड शो निकाला गया
इलाके में रोड शो निकाला गया. जिसमें एक कार में सनरूफ खोलकर पवन कुमार खड़े नजर आ रहे हैं. गले में नोटों की माला पहने और हाथ जोड़े. वहीं, उनके पीछे दर्जनों कारें चल रही हैं. कुछ युवक कारों की छत पर बैठे हुए हैं. कुछ नाच-गा रहे हैं. बैकग्राउंड में डीजे की आवाज आ रही है.
इस दौरान पवन कुमार बड़े ही शांत भाव से लोगों का अभिवादन स्वीकार करते नजर आए. मगर कुछ युवा जोश में होश खो बैठे और वो चलती कार में स्टंटबाजी करते कैमरे में कैद हो गए. फिलहाल, इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. गाड़ियों का ये काफिला नरसेना थाना क्षेत्र के गांव रघुनाथपुर जाते समय का बताया जा रहा है.
पवन की सफलता की कहानी
UPSC परीक्षा पास करने वाले पवन कुमार बुलंदशहर जिले के रघुनाथपुर गांव के रहने वाले हैं. उनके पिता मुकेश कुमार और मां सुमन अपने बेटे की सफलता पर बेहद खुश हैं. घर पर बधाई देने वालों की लाइन लगी है. जिस घर में पवन का परिवार रहता है, उसमें बिजली कनेक्शन तो है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की कमी रहती है. घर में कोई अन्य सुविधा भी नहीं है. छत भी तिरपाल और पॉलीथीन की है.
पवन की मां और बहन जंगल से लकड़ी इकट्ठी कर चूल्हे पर खाना बनाती हैं. क्योंकि, परिवार को उज्जवला योजना के तहत गैस सिलेंडर तो मिल गया, लेकिन बाद में वो उसे भराने में एक हजार रुपये भी नहीं जुटा पाए. वहीं, जब पिता और बहनों ने मजदूरी की तब जाकर पवन कुमार की कोचिंग और किताबों का खर्च निकल पाया और फिर 3200 रुपये का सेकंड हैंड फोन खरीदा ताकि तैयारी करने में मदद मिल सके.
पवन के पिता ने बताया कि उसे तैयारी करते समय एंड्राइड मोबाइल फोन की जरूरत थी तो घर में सबने मजदूरी की और पैसे इकट्ठे किए. तब जाकर 3,200 रुपये का सेकंड हैंड मोबाइल फोन खरीद पाए. उन्होंने आगे बताया कि पवन की शुरुआती पढ़ाई नैनीताल से की. इस दौरान उनका इसी घर से आना-जाना रहता था. उसके बाद 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई बुलंदशहर के बुकलाना स्थित नवोदय विद्यालय में हुई. यहां के बाद इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से जियोग्राफी, पॉलिटिकल में ग्रेजुएशन किया. उसके बाद मुखर्जी नगर स्थित एक कोचिंग सेंटर में तैयारी की. दो वर्ष कोचिंग के बाद अधिकतर समय उन्होंने अपने रूम पर रहकर सेल्फ स्टडी की. इस समय पवन की उम्र करीब 24 साल है. पवन को तीसरे प्रयास में यह सफलता मिली है.