
Corona in Schools: देश में कोरोना एक बार फिर पैर पसारते हुए दिखाई दे रहा है. राजधानी दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में कोरोना के आंकड़े बढ़ने लगे हैं. चिंता इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इस बार बच्चे वायरस की चपेट में आ रहे हैं. NCR के कई स्कूलों को संक्रमण के चलते बंद भी किया गया. पिछले एक हफ्ते में संक्रमित मरीजों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है. मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने बुधवार को अहम बैठक बुलाई है जिसमें प्रधानमंत्री खुद शामिल होंगे.
नोएडा के फिजिशियन डॉक्टर आशीष अग्रवाल बताते हैं की संक्रमण मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है और उसमें बड़ी संख्या में बच्चे आ रहे हैं और संभावना यह भी है कि इस बार बच्चों से ही संक्रमण फैल रहा हो क्योंकि ज्यादातर वयस्कों को वैक्सीन लग चुकी है. ऐसे में माता-पिता को चाहिए कि वह ज्यादा एहतियात बरतें.
नोएडा समेत ग्रेटर नोएडा के कई फार्मेसी की दुकानों पर पैरासिटामोल जैसी एंटीबायोटिक दवाओं की खरीद करने वालों की संख्या बढ़ गई है. फार्मासिस्ट दीप्ति बताती हैं कि पेरासिटामोल गले की खराश और वायरल संक्रमण से बचाव करने वाली दवाइयों की मांग पिछले 10 से 15 दिनों में ज्यादा बढ़ी है. यहां तक की दुकान पर आई महिलाओं ने भी बताया कि उनके घर में और आसपास कई सारे बच्चे सर्दी खांसी जैसे लक्षणों से प्रभावित है और ऐसे में कई मां-बाप बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं.
एक अभिभावक जूही कहती हैं कि उनके इलाके में कई सारे बच्चे लक्षणों से प्रभावित हैं और ऐसे में वह ज्यादा एहतियात बरत रहे हैं. खासकर सामाजिक दूरी और बच्चों को मास्क पहनने के लिए प्रोत्साहित करना ज्यादा महत्वपूर्ण है. जूही की चिंता है कि फिलहाल 12 साल के ऊपर के बच्चों के लिए वैक्सीन तो है लेकिन उससे कम उम्र के बच्चों के लिए जब तक वैक्सीन नहीं आ जाती तब तक फिक्र बनी रहेगी.
दूसरे कई अभिभावकों ने कहा कि जिनके बच्चों को वैक्सीन लग चुकी है वह भी फिलहाल मास्क पहनने के नियम को सख्ती से मान रहे हैं साथ ही बाहर जाने से परहेज कर रहे हैं. हालांकि, कई अभिभावकों का कहना है कि ऐसे हाल में बच्चों को ज्यादा देर घर में नहीं रोका जा सकता. कुछ बच्चों की मां ने कहा कि गर्मी के मौसम में बच्चे जैसे ही घर तक पहुंचते हैं एयर कंडीशन के इस्तेमाल और ठंडा पानी पीने के चलते भी बीमार पड़ रहे हैं.
ग्रेटर नोएड के एक स्कूल की प्रधानाध्यापक सविता चौधरी बताती है कि फिलहाल स्थिति को देखते हुए अभिभावक ही नहीं बल्कि स्कूल प्रशासन भी चिंतित है, इसलिए एहतियात के सभी कदम उठाए जा रहे हैं फिर चाहे वह सामाजिक दूरी हो या अनिवार्य मास्को हो या फिर सैनिटाइजर का इस्तेमाल. इसके साथ ही स्कूलों ने तमाम अभिभावकों को यह निर्देश दिए हैं कि अगर किसी बच्चे में किसी तरह के लक्षण हों तो वह बच्चों को स्कूल कतई न भेजें.
क्लास रूम के भीतर भी बच्चों में सोशल डिस्टेंसिंग दिखाई पड़ने लगी है. खेलने कूदने के दिनों में क्लास रूम में बच्चे 7 से 8 घंटे मास्क लगाकर एक दूसरे से काफी दूरी पर बैठते हैं. बचपन में शेयरिंग इज केयरिंग सिखाया जाता है लेकिन महामारी के दौर में कई माता-पिता ने अपने बच्चों को सिखाया है कि शेयरिंग इज नॉट केयरिंग.
कई माता-पिता काफी जागरूक हैं और उन्होंने बच्चों को न सिर्फ मास्क पहनने को कहा है बल्कि यह भी सिखाया कि वह स्कूल में दूसरे बच्चों के साथ अपना टिफिन न शेयर करें. नोएडा की रहने वाली रोशनी ने हमें बताया कि उन्होंने अपने बच्चों से कहा कि वह खाना अकेले खाएं और दूसरे बच्चों के टिफिन का लाया हुआ खाना न खाएं, ना ही अपना खाना किसी दूसरे बच्चों को दें.
6 साल की निमिषा ने भी अपनी क्लास रूम में बताया कि वह न तो किसी और के टिफिन में खाना खाती हैं ना ही अपनी बेस्ट फ्रेंड को घर से लाया हुआ अपना खाना खिलाती हैं क्योंकि उनकी मम्मी ने कहा है इससे कोविड फैल सकता है. हर्षित जैसे दूसरे छोटे कई बच्चे कहते हैं कि हम लगातार मास्क पहनते हैं और जहां बच्चे मास्क नहीं पहनते हम उनके साथ उठते बैठते नहीं हैं. एक बच्ची ने यह भी बताया कि कई बार उनके मां-बाप नियम नहीं मानते तो वह ऐसे में अपने मां बाप को भी डांट लगा देती हैं कि वह नियम मानें.
पिछले 3 हफ्तों में कोविड-19 की स्थिति चिंताजनक होनी शुरू हुई है. दिल्ली हरियाणा और उत्तर प्रदेश में ज्यादा मामले सामने आए हैं जबकि पूरे NCR में अचानक बढ़ोत्तरी देखी जा रही है. ओमिक्रॉन के सब-वैरिएंट का असर साफ साफ दिखाई पड़ रहा है. जाहिर है हालात की गंभीरता को देखते हुए सरकार भी सक्रियता दिखा रही है. मास्क को अनिवार्य कर दिया गया है और राजधानी दिल्ली में मास्क न पहनने वालों पर चालान भी शुरू कर दिया गया है. नोएडा समेत पूरे NCR में सभी सार्वजनिक जगहों पर मास्क अनिवार्य कर दिया गया है. ऐसे में जरूरी है कि तमाम माता-पिता स्कूल प्रशासन एहतियात बरतें और नौनिहालों को इस संक्रमण की चपेट से बचाएं.