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दिल्ली को मिला अपना शिक्षा बोर्ड, DBSE के नाम से हुआ रजिस्ट्रेशन

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि इस बोर्ड को बनाने का मकसद है कि हमारे बच्चे अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा की ओर बढ़ें. इस बोर्ड की मूल्यांकन प्रणाली अंतराष्ट्रीय स्तर की होगी. बोर्ड का निर्माण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के सहयोग से होगा.

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (फाइल-पीटीआई)
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (फाइल-पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में होगी गवर्निंग बॉडी
  • 6 मार्च को दी गई थी बोर्ड के गठन को मंजूरी
  • बच्चों का पूरे साल सतत मूल्यांकन करेंगेः सिसोदिया

दिल्ली का अपना शिक्षा बोर्ड मंगलवार को आधिकारिक तौर पर रजिस्टर भी हो गया. 'दिल्ली बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन (DBSE)सोसाइटी' के नाम से बोर्ड का रजिस्ट्रेशन किया गया है. दिल्ली सरकार के मुताबिक शुरुआत में दिल्ली सरकार के 20-25 सरकारी स्कूलों को दिल्ली बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन से जोड़ा जाएगा.

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6 मार्च को दिल्ली कैबिनेट की बैठक में दिल्ली बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन के गठन को मंजूरी दी गई थी. दिल्ली में 1,000 सरकारी स्कूल है जबकि 1,700 स्कूल प्राइवेट हैं.

अभी दिल्ली में अधिकतर स्कूल CBSE से मान्यता प्राप्त हैं जबकि कुछ स्कूलों में ICSE बोर्ड की मान्यता भी है. 6 मार्च को ऐलान करते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि बच्चों को कट्टर देशभक्त, अच्छे इंसान और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से दिल्ली कैबिनेट ने दिल्ली बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन के गठन को मंजूरी दी है. यह बोर्ड बच्चों में रटने पर नहीं, बल्कि उनमें समझ विकसित करने पर बल देगा. 

अंतरराष्ट्रीय स्तर का होगा बोर्डः केजरीवाल

सीएम केजरीवाल ने कहा था, "यह बोर्ड अंतरराष्ट्रीय स्तर का होगा और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से सहयोग लिया जाएगा. बोर्ड बच्चों के विशेष व्यक्तित्व को बाहर निकालेगा और उसी के अनुसार उन्हें शिक्षा दी जाएगी. शिक्षा सत्र 2021-22 में दिल्ली सरकार के 20-25 स्कूलों को सीबीएसई बोर्ड से संबद्धता हटा कर इस बोर्ड से जोड़ा जाएगा और उम्मीद है कि अगले 4-5 साल में सभी हितधारकों की सहमति से सभी सरकारी और निजी स्कूल इससे जोड़ दिए जाएंगे.

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बोर्ड के लिए दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया की अध्यक्षता में एक गवर्निंग बॉडी और सीईओ की अध्यक्षता में एग्जीक्यूटिव बॉडी भी बनाई गई है. तब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि इस बोर्ड को बनाने का मकसद है कि हमारे बच्चे अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा की ओर बढ़ें.

इस बोर्ड की मूल्यांकन प्रणाली अंतराष्ट्रीय स्तर की होगी. उन्होंने बताया कि बोर्ड का निर्माण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के सहयोग से होगा और बोर्ड ऐसे आधुनिक मूल्यांकन प्रणालियों को विकसित करेगा, जिनके आधार पर कक्षा में पढ़ाई का तरीका भी बदलेगा. उन्होंने कहा कि इस बोर्ड द्वारा बच्चों में रटने की बजाय उनमें समझने और व्यक्तित्व विकास पर बल दिया जाएगा. बोर्ड बच्चों की खूबियों को परख कर बाहर निकालेगा और उसके अनुसार उनके समग्र विकास पर शिक्षा दी जाएगी.

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि अभी हमारी शिक्षा प्रणाली में 3 घंटे की परीक्षा के द्वारा हम बच्चें के पूरे साल के प्रदर्शन का मूल्यांकन करते हैं, लेकिन नए बोर्ड में इस तरीके को बदलकर बच्चों का पूरे साल सतत मूल्यांकन किया जाएगा.

एग्जीक्यूटिव बॉडी करेगी संचालन

अरविंद केजरीवाल ने बताया था कि दिल्ली में 1,000 सरकारी और लगभग 1,700 प्राइवेट स्कूल है, जो सीबीएसई बोर्ड से एफिलिएटेड हैं. इन सभी स्कूलों को नवगठित बोर्ड में एक साथ शामिल नहीं किया जाएगा. मुख्यमंत्री के मुताबिक शैक्षणिक सत्र 2021-22 में अभी दिल्ली सरकार के 20-25 सरकारी स्कूलों को इस बोर्ड में शामिल किया जाएगा. इन स्कूलों का चयन स्कूल के अध्यापकों, प्रधानाचार्यों और अभिभावकों की राय लेकर किया जाएगा और उम्मीद है कि अगले 4-5 सालों में संभवतः सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूल स्वेच्छा से दिल्ली बोर्ड में शामिल होना चाहेंगे.

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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बताया था कि दिल्ली बोर्ड का नियंत्रण दिल्ली के शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में गठित गवर्निंग बॉडी करेगी. इसमें शिक्षा अधिकारियों के अलावा उच्च शिक्षा के विशेषज्ञ, निजी और सरकारी स्कूलों के प्रधानाचार्य, अध्यापक, अभिभावक और शिक्षाविद् भी शामिल होंगे. बोर्ड की रोजमर्रा की गतिविधियों का संचालन एग्जीक्यूटिव बॉडी करेगी, जो एक प्रोफेशनल बॉडी होगी और इसके लिए एक सीईओ होंगे, जिन्हें शिक्षा, परीक्षा और स्कूल प्रशासन का लंबा अनुभव होगा. इसके साथ ही, मूल्यांकन की गहरी जानकारी, समझ और तजुर्बा रखने वाले देश और दुनिया के विशेषज्ञों को भी इस बोर्ड में शामिल किया जाएगा.

 

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