उस समय करीब 12 बज रहा था. हमारी क्लास रोज ही की तरह तीसरे माले पर चल रही थी. क्लास शुरू होने के 20-25 मिनट ही हुए थे कि अचानक बिजली चली गई. हम लोगों की नजर खिड़की से उठ रहे काले धुएं पर पड़ी. उफ्फ, यह क्या आग लग गई. भागो-भागो का शोर होने लगा. हम सब छत पर चले गए. मेरी धड़कनें बहुत तेज हो रही थीं. लग रहा था कि बस कैसे भी जान बच जाए.
मुखर्जी नगर में आग लगने वाली बिल्डिंग के चश्मदीद कुछ इसी तरह का नजारा बता रहे थे. यहां यूपीएससी की तैयारी कर रहे हेमंत सिंह भी मुखर्जी नगर की उसी बिल्डिंग में थे. बिल्डिंग में संस्कृति IAS और भारती कॉनसेप्ट जैसे कोचिंग सेंटर मौजूद हैं. हेमंत संस्कृति IAS में पढ़ते हैं. उन्होंने बताया कि हम सभी लोग घबरा गए थे. उस समय बाहर से भी लोग शोर मचा रहे थे. हमारी क्लास में अफरा-तफरी का माहौल बन गया था. संस्कृति IAS के डायरेक्टर अखिल मूर्ति हमें पढ़ा रहे थे. अचानक से जब माहौल पैनिक होने लगा तो अखिल सर ने हमें शांति और धीरज रखने को कहा.
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...और फिर खिड़की तोड़नी पड़ी
हेमंत ने आगे बताया कि धुएं की वजह से घुटन हो सकती थी. इसलिए उन्होंने तत्परता दिखाते हुए साथी छात्रों के साथ मिलकर खिड़की को तोड़ दिया. धुएं से घुटन न हो इसलिए थोड़ी ही देर बाद स्टाफ की मदद से कमरे के AC को भी हटा दिया गया. इसके बाद मैनेजमेंट की मदद से सभी बच्चों को बिल्डिंग की छत पर ले जाया गया. हेमंत ने बताया कि आग नीचे सीढ़ी पर लगी थी इसलिए कोई गंभीर नुकसान नहीं हुआ. रेस्क्यू के दौरान कुछ छात्रों को मामूली चोटें आई हैं.
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पास के दुकानदारों ने भी काफी मदद की
इसी कोचिंग की नंदिनी ने बताया कि स्टाफ की तरफ से आग की जानकारी मिलने के बाद थोड़ी सी भगदड़ हुई. लेकिन उनकी मैनेजमेंट के आश्वासन के बाद छात्र शांत हो गए. कोचिंग के यूट्यूब चैनल के लिए पढ़ाने वाले स्टाफ मनीष भारती ने बातचीत में बताया कि बिल्डिंग की एंट्री और एग्जिट के लिए एकमात्र संकरी-सी सीढ़ी है. जिसकी वजह से जब सीढ़ी पर आग लगी तो बिल्डिंग से आने जाने का रास्ता बंद हो गया. जैसे तैसे छात्र समेत सभी स्टाफ छत पर पहुंचे.
पानी की बोतलें उछालकर पहुंचाई...
हादसे में फंसे रहे छात्र-छात्राओं ने बताया कि हम सबकी पास के दुकानदारों ने भी काफी मदद की. उन्होंने छात्रों के लिए अपनी दुकानों से पानी की छोटी-छोटी बोतलें ऊपर उछालकर हम तक पहुंचाईं. स्टाफ मनीष ने बताया कि पुलिस चौकी बगल में ही थी इसलिए पुलिस की टीम हादसे की जगह पर 10 मिनट के अंदर ही पहुंच गई. आधे घंटे के अंदर ही दमकल टीम और उसकी 10-11 गाड़ियां भी रेस्क्यू के लिए पहुंच गई थी.
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ऐसे बढ़ी उम्मीद
दमकल की गाड़ियों के पहुंचने के बाद सभी बच्चों में उम्मीद जाग गई. छात्रों ने बताया कि जब दमकल की टीम ने हम तक रस्सियां फेंकीं तो समझ नहीं आ रहा था कि कैसे हम नीचे तक पहुंचेगे. क्योंकि हमलोगों ने पहले कभी भी ऐसी स्थिति का सामना नहीं किया था. फिर भी मन में उम्मीद थी कि कैसे भी हम नीचे पहुंच जाएंगे. दमकल टीम ने रेस्क्यू के लिए बिल्डिंग के बाहर सड़क पर गद्दे डाल दिए थे. मौजूद छात्रों को रस्सियों के सहारे बिल्डिंग के बाहर निकाला जाना था. कुछ छात्र बहुत ज्यादा ही घबराए हुए थे, वो इतने पैनिक हो गए कि उनका हाथ रस्सियों से स्लिप हो गया. लेकिन गद्दे पर गिरे तो ज्यादा चोट नहीं आई. छात्र हेमंत कहते हैं कि हमारे घर वाले भी बहुत ज्यादा परेशान हो रहे थे. आज जान बची तो मुझे ऐसा लगा जैसे दूसरी जिंदगी मिली, पता नहीं ये हादसा कितना बड़ा हो सकता था.