दिल्ली पुलिस ने रविवार को RAU''s IAS कोचिंग सेंटर के सीईओ और मालिक अभिषेक गुप्ता और उसके को-ऑर्डिनेटर देशपाल सिंह को गिरफ्तार कर लिया है. भारी बारिश के बीच सेंटर के बाढ़ग्रस्त बेसमेंट में फंसने से तीन यूपीएससी उम्मीदवारों की मौत हो गई थी. गिरफ्तारी के तुरंत बाद दोनों को मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया और उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. राउ आईएएस का सेंटर अंग्रेजी माध्यम से यूपीएससी तैयारी की टॉप कोचिंग सेंटर के तौर पर जानी जाती है. आइए जानते हैं कि उनकी खुद की योग्यता क्या है?
कौन हैं राउ कोचिंग के मालिक अभिषेक गुप्ता?
अभिषेक गुप्ता (Abhishek Gupta) काफी समय से ये कोचिंग चला रहे हैं. उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, अभिषेक गुप्ता फरवरी 2009 से राउ के आईएएस स्टडी सर्किल के सीईओ और मालिक हैं. इससे पहले, उन्होंने 2004 से 2006 तक वॉटसन व्याट में विश्लेषक के रूप में काम किया और फिर एक साल के लिए इवैल्यूसर्व में काम किया है. अभिषेक गुप्ता ने 2007 से 2008 तक जोन्स लैंग लासेल में कॉर्पोरेट समाधान विभाग में भी काम किया है. लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने 1988 से 2001 के बीच दिल्ली के मॉडर्न स्कूल में पढ़ाई की है. अभिषेक गुप्ता ने 2001 से 2004 के बीच शहीद सुखदेव कॉलेज ऑफ बिजनेस स्टडीज से स्नातक की डिग्री भी हासिल की है.
कोचिंग मालिक गिरफ्तार
इस केस में पुलिस ने हादसे की जांच के लिए FIR दर्ज की है और कई टीमें गठित की हैं. पुलिस ने कोचिंग सेंटर के मालिक अभिषेक गुप्ता और कॉर्डिनेटर को गिरफ्तार कर लिया है और उन पर गैर इरादतन हत्या और अन्य आरोपों के तहत मामला दर्ज किया है. FIR में इस बात का उल्लेख किया गया है कि सड़क पर जल निकासी व्यवस्था उचित नहीं थी, इसके कारण सड़क पर जल जमाव हुआ और बाद में पानी बेसमेंट में घुस गया.
अभिषेक गुप्ता ने स्वीकार की अपनी गलती
कोचिंग सेंटर के मालिक अभिषेक गुप्ता ने स्वीकार किया है कि बेसमेंट में जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं थी, जिसके कारण दुर्घटना हुई. अभिषेक गुप्ता से पुलिस ने बेसमेंट में लाइब्रेरी की परमिशन के डॉक्यूमेंट मांगे, जो कि अभिषेक के पास नहीं थे. अभिषेक ने कबूल किया कि बेसमेंट में ड्रेनेज की कोई व्यवस्था नहीं थी. एफआईआर के अनुसार जब रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ तो स्लिट बेसमेंट में 3 फीट पानी था, छात्र नीचे बेसमेंट में फंस गए थे, जहां लाइब्रेरी चल रही थी. एनडीआरएफ की टीम शवों को निकालने के लिए बेसमेंट (लाइब्रेरी) में गई, जबकि DFS ने पानी बाहर निकालने में मदद की.