पूर्व केंद्रीय कोयला राज्य मंत्री दिलीप रे की सजा पर आज सुनवाई हो रही है. ये सुनवाई राउज एवेन्यू की एक विशेष अदालत कर रही है. बता दें कि स्पेशल कोर्ट ने कोयला घोटाले से जुड़े एक मामले में दिलीप रे को दोषी करार दिया था. उनका ये मामला 1999 में झारखंड कोयला ब्लॉक के आवंटन में अनियमितता से जुड़ा है. विशेष न्यायाधीश भरत पराशर ने दिलीप रे को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत दोषी पाया, जबकि अन्य को धोखाधड़ी और साजिश रचने का दोषी पाया गया.
अदालत ने कोयला मंत्रालय के तत्कालीन दो अन्य वरिष्ठ अधिकारियों- प्रदीप कुमार बनर्जी और नित्यानंद गौतम और सीटीएल के निदेशक महेंद्र कुमार अग्रवाल और कास्त्रोन माइनिंग लिमिटेड (CML) को भी दोषी ठहराया था. आज अदालत में इनकी सजा पर बहस हो रही है.
बीजू जनता दल (BJD) के संस्थापक सदस्य रहे दिलीप रे बीजू पटनायक के काफी करीबी थे. पटनायक के अंतिम क्षणों में उनके साथ मौजूद लोगों में से एक दिलीप रे भी थे. हालांकि बाद में रे ने पार्टी बदल ली और भाजपा में शामिल हो गए.
2014 में, वह बीजेपी के टिकट पर राउरकेला से विधायक चुने गए. रे ने 2019 के चुनाव से पहले बीजेपी छोड़ दी और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राउरकेला के विकास पर अपना वादा नहीं निभाया है. उनके भाजपा छोड़ने के बाद ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि रे अपनी पूर्व पार्टी में शामिल हो सकते हैं और बीजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं. हालांकि, रे राजनीति से दूर रहे.