
UP PCS 2021: कहते हैं "मंजिलें उन्हे मिलती हैं जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है." कमोवेश बहराइच के जिलाधिकारी के वाहन चालक जवाहर लाल मौर्या पर ये पंक्तियां बेहद फिट बैठती हैं, जिनके बुलंद हौंसले ने एक नहीं अपने दोनो बेटों को सफलता की उस ऊंचाई पर पहुंचाया है जिसकी शायद ही कोई कल्पना करता हो.
जवाहर लाल का बड़ा बेटा संजय सिंह मौर्या एन आई टी प्रयागराज से बीटेक कर वर्तमान में मल्टी नेशनल कंपनी एसेंचर में चीफ इंजीनियर है. वहीं अब छोटे बेटे कल्याण सिंह मौर्या यूपी पीसीएस रिजल्ट में 40वीं रैंक हासिल कर एसडीएम बन गया है. अपने बच्चे की सफलता की कहानी बताकर भावुक हुए जवाहर लाल कहते हैं "मेरी पत्नी का मेरे बेटों की सफलता में सबसे बड़ा योगदान है लेकिन आज वो इस खुशी को देखने के लिए मौजूद नहीं हैं, मैं तो ड्राइवर हूं पूरा समय ड्यूटी पर रहता हूं लेकिन मेरी पत्नी बच्चों को सबसे अधिक समय देती थी, गाइड करती थी लेकिन उसकी किस्मत में ये खुशी देखना नहीं था. उनकी पांच साल पहले मृत्यु हो चुकी है लेकिन ये सब प्रेरणा उसी की है.
जवाहर लाल बताते हैं कि 35 साल की अपनी नौकरी में साहब के साथ रहते हुए अपने बच्चों को भी वैसा ही बनने की प्रेरणा देता रहा और मेरे बेटों ने भी उसी तरह पढ़ाई किया और आज छोटा बेटा एसडीएम बन गया है. अपने वाहन चालक के बेटे की सफलता के बाद बहराइच के जिलाधिकारी डाक्टर दिनेश चंद्र सिंह ने ड्राइवर जवाहर लाल को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया. उन्होंने कलेक्ट्रेट के अन्य कर्मचारियों को भी इससे प्रेरणा लेने की बात कही है. उन्होंने बताया की भारतीय लोकतंत्र में कोई भी किसी पद को अपनी प्रतिभा के दम पर प्राप्त कर सकता है बशर्ते वो उसके प्रति निष्ठावान हो.
गौरतलब है की बहराइच जिले के फखरपुर विकास खंड के केतार पुर तखवा निवासी जवाहर लाल मौर्या पिछले पैंतीस वर्षों से बहराइच जिलाधिकारी के वाहन चालक पद पर कार्यरत हैं. इनके परिवार में दो बेटे संजय सिंह मौर्या व कल्याण सिंह मौर्या हैं. वहीं बेटियों में श्रेया व प्रिया मौर्या हैं. जवाहर लाल मौर्या की पत्नी की विगत पांच वर्ष पूर्व मृत्यु हो चुकी है.
जवाहर लाल मौर्या ने अपने बेटों और बेटियों की शिक्षा में कोई कमी नहीं रखी. शायद यही कारण है कि जहां इनका बड़ा बेटा संजय सिंह मौर्या एनआईटी प्रयाग राज से बीटेक कर सबसे पहले मल्टीनेशनल कंपनी में इन्फोसिस में साफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर चयनित हुआ और आज वर्तमान में इन्फोसिस छोड़ कर मल्टीनेशनल कंपनी एसेंचर में चीफ इंजीनियर के पद पर कार्यरत है. तो दूसरा बेटे ने सफलता की नई इबारत लिखते हुए अपने पिता जवाहर लाल मौर्या के उस सपने को साकार कर दिखाया है जो उन्होंने अपने डीएम साहब की ड्राइवर सीट पर बैठकर देखा था. सपना था कि एक न एक दिन उनका बेटा भी साहब वाली सीट पर बैठेगा.
आज उनके छोटे बेटे कल्याण सिंह ने उनके सपने को साकार कर दिखाया है. कल्याण सिंह मौर्या को यूपी पीसीएस में 40वीं रैंक हासिल हुई है. उनके पिता के मुताबिक कल्याण की भी प्रारंभिक शिक्षा बहराइच के नानपारा में हुई और इंटरमीडिएट की पढ़ाई बहराइच के सेवेंथ डे एडवेंटिस्ट कालेज से पूरी की. बी एस सी बनारस हिंदू विश्व विद्यालय से पूरी करने के बाद कल्याण सिंह मौर्या का कैमेस्ट्री से एमएससी करने के लिए एडमिशन आईआईटी दिल्ली में हो गया.
वर्तमान में वह भी एनटीपीसी सोला पुर महाराष्ट्र में सहायक प्रबंधक पद पर तैनात है. बेटे की सफलता पर गदगद वहां चालक जवाहर लाल अपनी मोबाइल में 2021 के यूपीएससी का रिजल्ट दिखाते हुए बताते हैं कि उनका बेटा आईएएस के इंटरव्यू देने के बाद महज पांच नंबर कम होने के चलते सेलेक्ट नहीं हो सका.
जवाहर लाल मौर्या ने अपने बेटों के साथ बेटियों की भी पढ़ाई में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है. उनकी दोनो बेटियां पोस्ट ग्रेजुएट कंपलीट कर अपने भाइयों के रास्ते कदम पर चलते हुए यूपीएससी की तैयारी में जुटी हैं. जवाहर लाल के बेटे की सफलता पर बहराइच का पूरा कलेक्ट्रेट खुशियां मना रहा है. उनके साथी ड्राइवर सुरेश सिंह बताते हैं कि आज के मौके के बाद वो लोगों को संदेश देना चाहते हैं कि कोई चाहे चपरासी क्यों न हो अपने बच्चों को पढ़ाने में कोई कसर न छोड़ें.