JEE Main, NEET 2020: अगले महीने जेईई मेन और नीट परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं जिन्हें लेकर देश भर में विरोध हो रहा है. अब ये मुद्दा धीरे-धीरे राजनीतिक रुख लेता जा रहा है. केंद्रीय उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे ने बुधवार को इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि दिवाली के बाद तक इन प्रवेश परीक्षाओं को स्थगित करने से ये एक पूरे सेमेस्टर को खत्म कर देगा. ये आने वाले कुछ सालों तक नये एंट्रेस को भी प्रभावित करेगा.
अमित खरे ने कहा कि दोनों ही परीक्षाएं पहले अप्रैल में आयोजित की जाती थी, लेकिन जुलाई तक स्थगित कर दी गई थीं. जब बड़ी संख्या में छात्रों ने इसे पोस्टपोन करके आगे बढ़ाने की मांग की तो (परीक्षा) सितंबर में इसे कराने का निर्णय किया गया.
अब, छात्रों का एक वर्ग मांग कर रहा है कि परीक्षा दीपावली के बाद आयोजित की जानी चाहिए. दीपावली के बाद देश के पूर्वी हिस्सों में छठ पर्व 26 नवंबर को मनाया जाएगा. अगर हम परीक्षा आयोजित करने के लिए एक सप्ताह बाद का फैसला लेते हैं, तो हम उन्हें दिसंबर के पहले सप्ताह में आयोजित कर सकते हैं, और इसके परिणाम 2021 में घोषित होंगे. इसका मतलब है कि छात्रों को पूरे शैक्षणिक वर्ष का नुकसान होगा.
उन्होंने कहा कि दूसरी बड़ी वजह सेमेस्टर में देरी न केवल वर्तमान बैच बल्कि भविष्य के बैचों को भी प्रभावित करेगी. यदि एक वर्ष में 2021 प्रवेश में देरी हो रही है, तो आप 2021-22 में सीटों की संख्या को दोगुना नहीं कर सकते. इसलिए, हम नवंबर तक सत्र शुरू करना चाहते हैं. फिर, हमारे पास कम छुट्टियों वाले छोटे सेमेस्टर हो सकते हैं, ताकि अगस्त 2021 तक हम अगले बैच के लिए तैयार हों. अन्यथा, बाद के सभी बैच भी प्रभावित होंगे.
बता दें कि पिछले हफ्ते कई मुख्य मंत्री, राजनीतिक नेता और कार्यकर्ता जेईई (मुख्य) और नीट परीक्षाएं आगे बढ़ाने की छात्रों की मांग के समर्थन में आ चुके हैं. मुख्य विपक्षी दल के नेता राहुल गांधी के बाद मंगलवार को ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल को पत्र लिखकर कोविड 19 मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए परीक्षा के स्थगन की मांग की थी.
बुधवार को, तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री सी विजयबास्कर ने भी केंद्र सरकार को लिखा कि महामारी के बीच परीक्षा आयोजित करना छात्रों को संक्रमण के बड़े जोखिम में डाल देगा.
इस आरोप के बारे में पूछे जाने पर कि सरकार युवाओं को अपने स्वास्थ्य को जोखिम में डालने के लिए मजबूर कर रही है, खरे ने जोर देकर कहा कि यह निर्णय छात्रों के समग्र हित में लिया गया. सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष पहले ही ये तर्क दिए जा चुके हैं, जिसके कारण अंततः एग्जाम स्थगित कराने की याचिका को खारिज कर दिया गया.
अमित खरे ने कहा कि जहां कुछ छात्रों ने स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में तर्क दिया है, तो ऐसे लोग भी हैं जो पूछ रहे हैं कि उन्हें अपने कैरियर को जोखिम में क्यों डालना चाहिए. इन छात्रों ने एक गैप ईयर लिया है और 18 महीने से इसकी तैयारी कर रहे हैं. अगर परीक्षा नहीं दे पाए तो उनके साथ क्या होगा. दोनों को संतुलन बनाना होगा जो परीक्षा चाहते हैं और जो नहीं करते हैं. और अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि एकेडमिक शेड्यूल पर भी विचार करें और समग्र हित को देखना होगा.