कोचिंग हब के नाम से मशहूर कोटा में एंटी सुसाइड सिस्टम की विफलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं. मंगलवार रात 19 वर्षीय नीरज जाट ने अपने हॉस्टल के कमरे में आत्महत्या कर ली. घटना ने न केवल परिजनों बल्कि प्रशासन को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है. नीरज हरियाणा के नावा महेंद्रगढ़ का निवासी था और पिछले दो सालों से कोटा में जेईई मेन्स की तैयारी कर रहा था. वह आनंद कुंज रेजिडेंसी हॉस्टल में रहता था.
पिता ने लगाए गंभीर आरोप
घटना के समय कमरे में लगे पंखे में एंटी हैंगिंग डिवाइस लगी थी, जिससे आत्महत्या असंभव मानी जाती है. नीरज ने डिवाइस से बचने के लिए पंखे के कुंडे में रस्सी डालकर फंदा बनाया. नीरज के पिता बबलू प्रजापत ने हॉस्टल प्रशासन और पुलिस जांच पर सवाल उठाए हैं. छात्र के पिता ने कहा कि उसके बेस्ट फ्रेंड से फोन पर बात की, उससे पूछा था कि नीरज का किसी से कोई झगड़ा तो नहीं हुआ, उसने कहा कि आप यहां आ जाइए और यहां बात कर लेना, लेकिन किसी ने कुछ नहीं बताया. उन्होंने कहा, "बेटा कहता था कि यहां ऐसा सिस्टम है कि कोई भी आत्महत्या नहीं कर सकता. फिर वह कैसे फांसी लगा सकता है? पंखे की पंखुड़ियां टूटी क्यों नहीं और पंखा गिरा क्यों नहीं? मुझे शक है कि उसके साथ कुछ गलत हुआ है. जांच होनी चाहिए."
मृतक छात्र नीरज जाट के पिता बबलू प्रजापत ने बताया कि मेरे दो बेटे थे, एक बेटा सीकर में नीट की कोचिंग कर रहा है. दूसरा नीरज जेईई मेन्स की तैयारी कर रहा था. नीरज से मंगलवार दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर फोन पर बात हुई थी, 'मैंने उसे बोला था 9 जनवरी को तेरा प्रैक्टिकल है घर आने के लिए ट्रेन की टिकट बनवा लेना. इसके बाद एक-दो बार फोन किया था, लेकिन उसने नहीं उठाया. उसने सुसाइड जैसा कदम क्यों उठाया, समझ नहीं आ रहा. उसे कोई परेशानी नहीं थी. रात 9:30 से 10:00 बजे के बीच हॉस्टल वालों को फोन किया था कि बच्चा फोन नहीं उठा रहा है. उससे मेरी बात करा दो.'
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हॉस्टल स्टाफ ने दी ये जानकारी
वहीं हॉस्टल स्टाफ ने बताया कि नीरज मंगलवार शाम अपने दोस्त के साथ बाहर खाना खाने गया था. वह तनाव में नहीं दिख रहा था. रात में अटेंडेंस के दौरान उसने दरवाजा नहीं खोला. रोशनदान से झांकने पर उसका शव फंदे से लटका मिला. जवाहर नगर थाना अधिकारी बुधराज चौधरी ने बताया कि मामले की जांच जारी है.
कोटा में आत्महत्या की घटनाएं बढ़ती चिंता
कोटा में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या रोकने के लिए एंटी-हैंगिंग डिवाइज अनिवार्य किया गया है, जो हर पंखे में लगा होना चाहिए. बावजूद इसके, इस तरह की घटनाएं चिंता का विषय बन रही हैं. नीरज के पिता ने प्रशासन से गहराई से जांच की मांग की है ताकि सच सामने आ सके. यह घटना कोटा में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करती है. बीते 10 दिन में यह दूसरा स्टूडेंट्स सुसाइड केस है.
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