जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी अगले एकेडमिक साल से शिवाजी पर एक रिसर्च की शुरुआत करेगी. आने वाले सत्र 2025 26 में इसकी शुरुआत करने की योजना स्कूल आफ इंटरनेशनल स्टडीज ने बनाई है. इस रिसर्च में स्कूल ऑफ़ इंटरनेशनल स्टडीज के साथ ही कुछ और विशेषज्ञों की भी मदद ली जा रही है. सेंटर ऑफ़ ईस्ट एशियन स्ट्डीज से प्रोफेसर अरविंद वेल्लारी और सेंटर ऑफ यूरोपियन स्टडीज से डॉ जगन्नाथन इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.
महाराष्ट्र सरकार भी कर रही मदद
साथ ही साथ महाराष्ट्र सरकार ने भी इसको आगे बढ़नी में मदद की है. दरअसल इस कोर्स का आईडिया तब आया जब सेंटर सैटरडे प्रोफेसर ने यह सोचा कि इंटरनेशनल रिलेशन में भारत की भूमिका पर हम कम शोध कर रहे हैं. शिवाजी महाराज की रणनीतिक सोच, उनकी युद्ध कला और डिप्लोमेसी के बारे में आमतौर पर छात्र कम शोध करते हैं, सेंटर फॉर इंटरनेशनल स्टडीज में आमतौर पर विदेशी रणनीतियों के बारे में ज्यादा रिसर्च किया जाता है.
अलग-अलग कोर्सेज शुरू करने की भी योजना
सेंटर ऑफ़ इंटरनेशनल स्टडीज के अध्यक्ष प्रोफेसर अमिताभ मट्टू ने आज तक से बातचीत में कहा, "एक तो हमारी वाइस चांसलर पुणे से हैं, उन्होंने इस बारे में काम होते हुए देखा है, इसलिए हमें पुणे से आर्काइव्स और शिवाजी महाराज के ऊपर कई सारे दस्तावेज मिल गए। इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार से भी हमें काफी मदद मिल रही है."
प्रोफेसर मट्टू बताते हैं कि उनकी योजना तो इस विषय पर अलग-अलग कोर्सेज शुरू करने की भी है जिससे छात्रों को उनके बारे में समझने और पढ़ने का और मौका मिल सके. लेकिन कोर्स शुरू करने की अपनी कई सारी चुनौतियां भी हैं जैसे स्कूल आफ इंटरनेशनल स्टडीज में फिलहाल इस रिसर्च के लिए भी जगह ढूंढी जा रही है. हालांकि जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के एकेडमिक काउंसिल और एग्जीक्यूटिव काउंसिल से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है.
JNU से जुड़े हुए प्रोफेसर यह भी बताते हैं कि इसके पीछे कोई भी राजनीतिक आईडियोलॉजी नहीं है बल्कि कोशिश इतनी सी है कि छात्रों को हिंदुस्तान के बारे में उतनी ही जानकारी हो जितनी बाकी देशों की