India's 51st CJI Justice Sanjiv Khanna: जस्टिस संजीव खन्ना ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में भारत के 51वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली. इससे पहले जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ रिटायर हुए थे. जस्टिस खन्ना के नाम की सिफारिश जस्टिस चंद्रचूड़ ने की थी. चंद्रचूड़ 10 नवंबर को 65 साल की उम्र में इस पद से रिटायर हुए. जस्टिस खन्ना का कानूनी करियर गहरा और विविधतापूर्ण है. ऐसे में आइए जानते हैं उनके बारे में कुछ खास बातें.
दिल्ली विश्वविद्यालय से की है कानून की पढ़ाई
भारत के नए मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना का जन्म 14 मई 1960 को हुआ. उन्होंने दिल्ली के मॉडर्न स्कूल से शिक्षा प्राप्त करने के बाद सेंट स्टीफेंस कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरी की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से वकालत की पढ़ाई पूरी की और 1983 में दिल्ली बार काउंसिल में बतौर वकील अपना रजिस्ट्रेशन कराया. अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने तीस हजारी कोर्ट में प्रैक्टिस की.
जस्टिस संजीव खन्ना ने अपने करियर की शुरुआत में टैक्स से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों को संभाला था. वे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के सीनियर स्टैंडिंग काउंसल के रूप में भी काम कर चुके हैं. इसके अलावा, उन्होंने अडिशनल पब्लिक प्रासीक्यूटर के रूप में सेवा दी और दिल्ली हाई कोर्ट में आपराधिक मामलों में अक्सर एमीकस क्यूरी के तौर पर नियुक्त हुए. एमीकस क्यूरी ऐसे व्यक्ति होते हैं जो कोर्ट की मदद करते हैं और कानून के आधार पर निर्णय लेने में योगदान देते हैं. संजीव खन्ना ने संविधान, कर, कॉर्पोरेट और वाणिज्यिक कानून के मामलों में विशेषज्ञता प्राप्त की है. जून 2005 में दिल्ली उच्च न्यायालय मे जज बने और फरवरी 2006 में स्थायी जज का पद प्राप्त किया. जनवरी 2019 में, जस्टिस खन्ना को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया था.
Article 370 से लेकर VVPAT तक, इन बड़े मामलों में दे चुके हैं जजमेंट
जस्टिस संजीव खन्ना ने सुप्रीम कोर्ट में कई महत्वपूर्ण फैसलों में हिस्सा लिया है, जो भारतीय लोकतंत्र, पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए अहम माने जाते हैं. 2019 में उन्होंने एक ऐतिहासिक फैसले में भाग लिया, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के कार्यालय को सूचना के अधिकार (RTI) कानून के दायरे में लाया गया. इससे न्यायपालिका में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिली.
चुनावी पारदर्शिता की दिशा में, जस्टिस खन्ना ने इलेक्टोरल बॉन्ड योजना पर सुनवाई की. 2024 में जस्टिस संजीव खन्ना ने इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को असंवैधानिक घोषित किया. उनका कहना था कि इस योजना में दानदाताओं की गोपनीयता का दावा सही नहीं है, क्योंकि बैंक अधिकारियों के जरिए किए गए दान में दानदाता की पहचान पहले से ही सामने आती है. इसलिए, उन्होंने इस योजना को संविधान के अनुरूप नहीं माना.
VVPAT की जांच को किया खारिज
2024 में जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता में एक बेंच ने एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें 100% VVPAT स्लिप्स की EVM वोटों से जांच करने की मांग की गई थी. जस्टिस खन्ना ने चुनाव आयोग द्वारा किए गए सुरक्षा उपायों को सही ठहराया और कहा कि वर्तमान प्रणाली वोटों की गिनती को तेज, बिना गलती के और सुरक्षित बनाती है, जिससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता बनी रहती है.
अनुच्छेद 370 हटाना
जस्टिस संजीव खन्ना ने 2023 में एक ऐतिहासिक फैसले में अहम भूमिका निभाई, जिसमें पांच न्यायाधीशों की बेंच ने अनुच्छेद 370 के निरसन को संवैधानिक रूप से सही ठहराया. अनुच्छेद 370 जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देता था, जिससे राज्य की राजनीतिक और संवैधानिक स्थिति में असामान्यता थी. बेंच ने यह स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 को समाप्त करने का निर्णय पूरी तरह से संवैधानिक था. इस फैसले ने जम्मू और कश्मीर के विशेष अधिकारों को समाप्त किया और राज्य को भारतीय संघ के बाकी राज्यों के समान अधिकार दिए.