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छात्र ने कैंपस में फांसी लगाकर की आत्महत्या, 'सुसाइड नोट' से खुलनी चाहिए सबकी आंखें

17 साल के छात्र भानु प्रसाद (17) IIIT बसर के नाम से लोकप्रिय RGUKT से पढ़ाई कर रहे थे. छात्र ने अपनी मौत की वजह अपने सुसाइड नोट में बताई है. उन्होंने बताया कि वो मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम से जूझ रहे थे. भानु ने माना है कि उन्हें ओसीडी (ऑब्सेसिव कंपल्स‍िव डिसऑर्डर) बीमारी थी.

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मृतक भानु (Photo: aajtak.in)
मृतक भानु (Photo: aajtak.in)

कई बार सूचनाएं खबर नहीं बल्क‍ि चेतावनी होती हैं. ऐसी ही एक दर्दनाक खबर कर्नाटक राज्य से आई जो असल में शैक्षण‍िक संस्थानों के साथ-साथ पूरे समाज के लिए चेतावनी है. कर्नाटक राज्य के निर्मल जिले के बसर स्थित राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ नॉलेज एंड टेक्नोलॉजीज (RGUKT) के एक छात्र ने 18 दिसंबर की रात अपने कैंपस में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली.

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महज 17 साल के छात्र भानु प्रसाद (17) IIIT बसर के नाम से लोकप्रिय RGUKT से पढ़ाई कर रहे थे. छात्र ने अपनी मौत की वजह अपने सुसाइड नोट में बताई है. उन्होंने बताया कि वो मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम से जूझ रहे थे. भानु ने माना है कि उन्हें ओसीडी (ऑब्सेसिव कंपल्स‍िव डिसऑर्डर) बीमारी थी. इस बीमारी ने उन्हें इतना परेशान कर दिया था कि वो पढ़ाई तक नहीं कर पा रहे थे. 

सुसाइड नोट में इस बीमारी से मिल रही परेशानियों का जिक्र है पर हम उस नोट को नहीं छाप सकते. बता दें कि aajtak.in ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रोटोकॉल को फॉलो करते हुए सुसाइड नोट को प्रचारित नहीं करने का फैसला लिया है. लेकिन, जिस तरह से भानु ने मानसिक समस्या के कारण अपनी जान ली है, ये न सिर्फ एक शैक्षण‍िक संस्थान बल्क‍ि पूरे समाज पर प्रश्न चिह्न है. वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ सत्यकांत त्रिवेदी कहते हैं कि इस मामले में भानु की मदद हो सकती थी. SSRI दवाओं और कॉग्न‍िटिव बिहेविरल थेरेपी समेत अन्य थेरेपीज से ओसीडी के लक्षणों को काबू में किया जा सकता है. 

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लेकिन, हमारे देश में मेंटल हेल्थ स्क्रीनिंग में हम बहुत पीछे हैं. अगर संस्थान या परिवार कोई भी यह समझ पाता कि वो बच्चा इस समस्या से बुरी तरह ग्रस्त है तो उसका बेहतर इलाज हो सकता था. सही काउंसिलिंग और जागरूकता न होने से मानसिक समस्याओं को लेकर अक्सर लोग सामने नहीं आते. हरेक शैक्षण‍िक संस्थान में मेंटल हेल्थ को करीकुलम में मेंड‍िटेरी कर देना चाहिए. साथ ही बच्चों की समय-समय पर मेंटल हेल्थ स्क्रीनिंग जरूर होनी चाहिए. 

मृतक छात्र भानु (aajtak.in)
मृतक छात्र भानु (aajtak.in)

क्या है ओसीडी

IHBAS दिल्ली के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ ओमप्रकाश कहते हैं कि ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) एक सामान्य मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है. इसमें व्यक्त‍ि में जुनूनी विचार आते हैं और वो बाध्यकारी व्यवहार करता है. 

कुछ लोगों में शुरुआती दौर में ओसीडी के लक्षण दिखाई देने लगते हैं, अक्सर प्यूबर्टी पीरियड के आसपास, लेकिन यह आमतौर पर शुरुआती वयस्कता के दौरान शुरू होता है. इस तरह देखा जाए तो भानु में इसकी शुरुआत ही रही होगी जिसे इलाज की जरूरत थी. यह नहीं कहा जा सकता कि ओसीडी कष्टप्रद नहीं है, बल्क‍ि ये किसी के जीवन में महत्वपूर्ण रूप से हस्तक्षेप कर सकता है, लेकिन सही उपचार इसे नियंत्रण में रखने में मदद कर सकता है. 

मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम हो तो सबसे पहले मदद मांगें 

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डॉ ओमप्रकाश कहते हैं कि ओसीडी वाले लोग अक्सर मदद लेने से कतराते हैं क्योंकि उन्हें शर्म या झिझक महसूस होती है. सच यह है कि ओसीडी भी किसी भी अन्य स्वास्थ्य स्थिति की तरह ही है, इसलिए इसमें शर्म या शर्मिंदगी महसूस करने की कोई बात नहीं है. ओसीडी होने का मतलब यह नहीं है कि आप "पागल" हैं. इसमें आपकी कोई गलती नहीं है. 

हेल्प पाने के ये हैं खास तरीके 
उचित उपचार और किसी की सहायता के बिना ओसीडी के ठीक होने की संभावना नहीं है, इसलिए ओसीडी ही नहीं किसी भी तरह के मानसिक स्वास्थ्य विकार की आशंका होने पर भी आपको हेल्प मांगनी चाहिए. इसके कुछ तरीके ये हैं. 

- आप सीधे जाकर मनोवैज्ञानिक चिकित्सा सेवा खोजें और मनोवैज्ञानिक उपचार कराएं. 
- जनरल फिजिश‍ियन से भी अपने लक्षण बताएं, वो जरूरी होगा तो आपको स्थानीय मनोवैज्ञानिक उपचार सेवा के लिए भेज सकते हैं. 
- यदि आपको लगता है कि किसी दोस्त या परिवार के सदस्य को ओसीडी हो सकता है, तो उन्हें समझाएं और मदद को आगे लाएं. 

 

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