Merits of Dowry Shocker: राष्ट्रीय महिला आयोग को कई ऐसे मीडिया पोस्ट मिले हैं जिनमें यह बताया गया है कि नर्सिंग छात्रों के लिए एक स्टडी मटीरियल में दहेज प्रणाली के "गुणों और लाभों" को शामिल किया गया है. जैसा कि मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है, किताबों में बताया गया है कि दहेज में माता-पिता की संपत्ति का हिस्सा प्राप्त करना इस प्रतिगामी प्रथा के "गुणों" में से एक है. किताब के कवर में 'इंडियन नर्सिंग काउंसिल के सिलेबस के मुताबिक' लिखा हुआ बताया गया है. यह पेज टी के इंद्राणी द्वारा नर्सों के लिए समाजशास्त्र की पाठ्यपुस्तक से है, जिसका शीर्षक "Merits of Dowry" है.
महिला आयोग का कहना है कि दहेज भारत में एक गहरी जड़ें जमा चुकी सामाजिक बुराई है. सरकार विभिन्न योजनाओं और कानूनों के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सभी प्रकार के प्रयास कर रही है, लेकिन गहरी जड़ वाली बुराई को सकारात्मक तरीके से चित्रित करना महिला सशक्तिकरण को कमजोर करेगा. मामला गंभीर चिंता का है और आयोग ने संज्ञान लिया है.
यह छात्रों को 'दहेज' के प्रचलित खतरे के बारे में एक बहुत ही गलत संदेश भेजता है. अध्यक्षा रेखा शर्मा ने केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने और उपचारात्मक कार्रवाई करने के की मांग की है. इसके साथ ही स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण को भी इस मामले में कार्रवाई करने और 7 दिनों के भीतर आयोग को सूचित करने की मांग की गई है.
मामले के प्रकाश में आने के बाद, इंडियन नर्सिंग काउंसिल, INC ने 'अपमानजनक सामग्री' की निंदा करते हुए एक अधिसूचना जारी भी की है. नोटिस में, INC ने "प्रचलित कानून" के खिलाफ जाने वाली किसी भी स्टडी मटीरियल की निंदा की है. यह स्पष्ट किया गया है कि INC केवल विभिन्न नर्सिंग कार्यक्रमों के लिए पाठ्यक्रम निर्धारित करने के लिए जिम्मेदार है."