Mukherjee Nagar Fire Accident: 15 जून 2023 का दिन शायद ही वो छात्र भूल पाएंगे जो कुछ बनने का सपना लेकर मुखर्जी नगर आए और ज्ञान बिल्डिंग में क्लास ले रहे थे. दोपहर के समय अचानक लगी आग से छात्रों की जान पर बन आई थी. बताया गया कि जिस वक्त इस बिल्डिंग में आग लगी उस वक्त बिल्डिंग के अलग-अलग कोचिंग सेंटर पर में 300 छात्र मौजूद थे. बिल्डिंग से धुआं उठता देख अफरा तफरी मच गई थी, तीसरी और पांचवी मंजिल पर मौजूद छात्र गर्म पाइप और रस्सी पकड़कर किसी तरह नीचे उतरे. इस हादसे में 61 छात्रों को चोट आई थी जिनमें से 2 गंभीर रूप से घायल भी हुए थे. इस घटना के बाद मुखर्जी नजर में चल रहे कोचिंग सेंटर्स पर फायर सेफ्टी को लेकर सवाल उठ रहे हैं. अब देश के जाने माने टीचर डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने इस मुद्दे पर बात की है.
इस हादसे के बाद डॉ. विकास दिव्यकीर्ति (दृष्टि ग्रुप के प्रबंध निदेशक) से हादसे पर की चुप्पी वजह पूछ रहे थे. अब 'Drishti IAS' यूट्यूब चैनल पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि वे सोशल मीडिया पर ज्यादा एक्टिव नहीं रहते. सोशल मीडिया पर असहज और टोक्सिक महसूस करते हैं. इंटरव्यू के दौरान उनसे पूछा गया कि मुखर्जी नजर में आग लगने की घटना हादसा है या लापरवाही? आइए जानते हैं उन्होंने क्या कहा.
सबसे पहले विकास सर ने कहा कि इस घटना को एक घटना के रूप में देखा जाए तो बेहतर है, क्योंकि फायर सेफ्टी नॉर्म्स के मामले में हमारा देश काफी कमजोर है. उन्होंने आग लगने वाली कई घटनाओं का भी जिक्र किया, जिसमें 2019 में करोलबाग की घटना, अनाज मंडी में आग लगने की घटना आदि.
हादसा या लापरवाही?
डॉ विकास दिव्यकीर्ति ने कहा कि ये हादसा है लेकिन ऐसे हादसों में ह्यूमन इंटरफेयर भी शामिल होता है. यह बिल्कुल उस तरह है जैसे कोई बिना सीट बेल्ट या बिना हेलमेट के गाड़ी चलाते हैं. शुद्ध रूप से हादसा नहीं है और ऐसा भी नहीं है कि किसी ने साजिश की हो. थोड़ी सी लापरवाही तो है ही, लापरवाही कई स्तरों पर है.
उन्होंने कहा जिस नक्शे से बिल्डिंग बनती हैं उस लेवल पर भी लापरवाही है, ऐसी पॉलिसी नहीं बनाई गईं कि हर बिल्डिंग्स में फायर एग्जिट्स अनिवार्य हों. फायर एक्सटिंग्विशर को लेकर सभी बिल्डिंग के मालिकों ने लापरवाही है. ये सामुहिक लापरवाही है लेकिन इसे जानबूझकर नहीं किया जाता. हालांकि विकास सर ने आगे कहा कि वे इससे किसी व्यक्ति या संस्थान की ओर इशारा नहीं कर रहे. लगभग कोई दूसरा संस्थान या लाइब्रेरी होती तो वहां भी ऐसा हो सकता है.
दिल्ली में फायर सेफ्टी के कानून क्या हैं?
विकास दिव्यकीर्ति ने दिल्ली में फायर सेफ्टी कानून पर बात करते हुए दिल्ली फायर सर्विस एक्ट 2007 के तहत 2010 में बनाए गए दिल्ली फायर सर्विस रूल्स को जिक्र किया. इसमें रूल नंबर 27 कहता है कि 15 मीटर से कम ऊंचाई या ग्राउंड प्लस फोर की कमर्शियल इमारतों को दिल्ली फायर सेफ्टी से एनओसी लेने की जरूरत नहीं होती है. ये डीएफएस के नियम 27 के दायरे से बाहर है. इस लिहाज से ये बिल्डिंग नियमों के दायरे में नहीं आती है.
फायर सेफ्टी एनओसी पर क्या बोले विकास सर
अगर आप एनओसी मांगेगे तो मिलता भी नहीं. विकास सर ने बताया कि उनकी ज्यादातर कोचिंग सेंटर किराए की बिल्डिंग में चल रहे हैं. इसलिए जब हमने बिल्डिंग के मालिक से फायर सेफ्टी एनओसी मांगा तो उन्होंने फायर सेफ्टी डिपार्टमेंट पत्र लिखकर एनओसी की मांग की लेकिन डिपार्टमेंट की ओर से मिले रिप्लाई लेटर में लिखा था कि इस बिल्डिंग पर एनओसी के रूल्स अप्लाई नहीं होते हैं, आपको एनओसी नहीं मिलता है.
अगर कोचिंग इंस्टीट्यूट पांच मंजिल से ऊपर की बिल्डिंग में चल रहे हैं तो उन्हें एनओसी मिल सकता है, लेकिन ज्यादा इंस्टीट्यूट्स पांच से कम मंजिला वाली बिल्डिंग्स में चल रहे हैं. हालांकि यह कहा जाता है आपको अपनी तरफ से फायर सेफ्टी का ध्यान रखना चाहिए. विकास सर ने अपनी इंटरव्यू में यह भी कहा कि दिल्ली सरकार को डीएएस के नियम 27 के बारे में सोचना चाहिए.