नोएडा के स्कूलों में पिछले कुछ महीनों में सामने आए यौन उत्पीड़न के मामलों को देखते हुए गौतमबुद्ध नगर के जिला अधिकारी मनीष वर्मा ने बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. जिला प्रशासन ने सभी सरकारी और गैर-सरकारी स्कूलों को 'बाल यौन उत्पीड़न रोकथाम समिति' गठित करने का आदेश दिया है. इस आदेश का उद्देश्य बच्चों के साथ किसी भी प्रकार के यौन उत्पीड़न की घटनाओं पर रोक लगाना और मामले की तत्काल जांच सुनिश्चित करना है.
समिति में रहेंगे ये सदस्य
समिति में स्कूल के प्रधानाचार्य या उप-प्रधानाचार्य, एक पुरुष और एक महिला शिक्षक, दो अभिभावक प्रतिनिधि, दो छात्र (एक लड़का और एक लड़की), एक गैर-शैक्षिक स्टाफ सदस्य, परामर्शदाता, और एक बाल संरक्षण अधिकारी या किसी स्वयंसेवी संस्था के प्रतिनिधि शामिल होंगे.
समिति की जिम्मेदारियां
जागरूकता कार्यक्रम: समिति बच्चों के यौन शोषण की रोकथाम के लिए नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेगी. इसमें स्टाफ, छात्रों, और अभिभावकों को पॉक्सो अधिनियम के बारे में जानकारी दी जाएगी.
शिकायत/सुझाव बॉक्स: स्कूल परिसर में एक शिकायत/सुझाव बॉक्स की स्थापना होगी, जिससे बच्चे गुमनाम रूप से अपनी शिकायतें दर्ज कर सकें.
CCTV निगरानी: स्कूल परिसर में CCTV कैमरों की निगरानी और स्टाफ के पुलिस वेरिफिकेशन को सुनिश्चित किया जाएगा.
अनाधिकृत प्रवेश पर रोक: विद्यालय में किसी अनाधिकृत व्यक्ति का प्रवेश वर्जित रहेगा.
शिकायत निवारण तंत्र
शिकायतें मिलने पर समिति द्वारा तुरंत कार्रवाई की जाएगी. शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया गोपनीय रखी जाएगी ताकि पीड़ित बच्चों को कोई भय महसूस न हो. शिक्षकों के लिए लैंगिक संवेदनशीलता पर नियमित प्रशिक्षण और बच्चों के अधिकारों पर कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा. बच्चों की सुरक्षा के लिए पोस्टर और जागरूकता सामग्री प्रमुख स्थानों पर लगाई जाएगी.
रिपोर्टिंग और समीक्षा
समिति की बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाएंगी और बच्चों की सुरक्षा से संबंधित मुद्दों की समीक्षा की जाएगी. किसी भी अप्रिय घटना की रिपोर्ट तुरंत बाल कल्याण समिति को भेजी जाएगी. बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और शैक्षिक प्रदर्शन पर नजर रखने के लिए काउंसलिंग की सुविधा भी सुनिश्चित की जाएगी. स्कूल में प्रमुख स्थानों पर बाल हेल्पलाइन के टेलीफोन नंबर लगाए जाएंगे. माना जा रहा है कि जिला प्रशासन द्वारा जारी ये नया आदेश सभी बच्चों की सुरक्षा के प्रति स्कूलों की जिम्मेदारी को मजबूत करेगा और स्कूलों के अंदर बच्चों के यौन उत्पीड़न के मामलों में कमी आएगी.