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आने वाले 15 साल में बंद हो जाएंगे कोचिंग सेंटर्स, जानिए- SUPER-30 के आनंद कुमार ने यह क्यों कहा?

ओल्ड राजेंद्र नगर हादसे पर सुपर-30 के आनंद कुमार ने सरकार को कानून बनाने का सलाह दी है. साथ ही कोचिंग के बाजार से बच्चे कैसे बचें, इस पर भी बात की है. आनंद कुमार ने कहा कि शिक्षकों को बोलना चाहिए. मैं किसी के खिलाफ नहीं हूं लेकिन यह सलाह देता हूं कि आप बोलिए और गलतियां हुई हैं तो उसे स्वीकार कीजिए.

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Super 30 Anand Kumar on Rajendra Nagar Coaching Incident
Super 30 Anand Kumar on Rajendra Nagar Coaching Incident

ओल्ड राजेंद्र नगर कोचिंग हादसे के बाद कोचिंग संस्थानों और प्रशासनों पर कई सवाल उठ रहे हैं. छात्रों ने इस हादसे पर चुप्पी साधने के लिए सिलेब्रिटी शिक्षक विकास दिव्यकीर्ति और अवध ओझा को खूब ट्रोल किया. इस हादसे के बाद सभी का ध्यान कोचिंग के सेफ्टी मानकों पर गया है. लोगों का कहना है कि बच्चे महंगी फीस और महंगा किराया देकर दूर-दूर से पढ़ने आते हैं, इसके बावजूद वह सुरक्षित रहें इसकी कोई गारंटी नहीं है. कोचिंग के बाजार और राजेंद्र नगर हादसे पर सुपर 30 के आनंद कुमार ने बात की है. 

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सरकार को करना चाहिए समय-समय पर इंस्पेक्शन

न्यूज एजेंसी ANI को दिए हुए इंटरव्यू में आनंद कुमार ने राजेंद्र नगर हादसे पर दुख जताया. उन्होंने कहा कि जब इस तरह की दुर्घटनाएं होती हैं तब लोगों का ध्यान जाता है. ये सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है कि समय पर इंस्पेक्शन करते रहें. तमाम कोचिंग संचालकों से मेरी प्रार्थना है कि इतनी जल्दबाजी ना करें. तुरंत पैसे आ जाएं इसका भी कोई उपाय ना करें. कम बच्चों को पढ़ाएं, जहां बैठने, बाथरूम, आने जाने की सुविधा हो. इसका ख्याल रखना जरूरी है.

आज दो दशक से भी ज्यादा हो गए हैं, मैं एक शिक्षक के तौर पर पढ़ाते आ रहा हूं और मशहूर भी रहा हूं. साल 2008 में डिस्कवरी चैनल ने मेरे जीवन पर फिल्म बनाई. हमारे बच्चे पढ़कर बड़े-बड़े देश में बाहर गए. इन तमाम उपलब्धियों के बाद हमारे पास बहुत सारे इनवेस्टर आए कि आप अपनी फ्रेंचाइजी बांटिए, इसका एक मॉडल बनाइए लेकिन हमारे भीतर के शिक्षक ने कभी नहीं माना कि दनादन पैसे बनाओ. मेरा तमाम शिक्षकों से ये आग्रह है कि हमारे देश में गुरु को भगवान का दर्जा दिया गया है, इसको व्यवसाय ना बनाएं. बच्चों के हित की बात को सोचते हुए पढ़ाने का सिलसिला जारी रखें. 

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महंगी फीस पर क्या बोले आनंद कुमार?

कोचिंग सेंटर का मकसद पैसा कमाना है लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं जो अच्छा पढ़ा भी रहे हैं. आजकल कोचिंग ने मार्केटिंग टीम बनाई हुई है. मां-बाप जमीन बेचकर अपने बेटे-बेटियों का एडमिशन कराने जाते हैं तो उनको चाय पिलाकर कोचिंग वाले आपस में बात करते हैं कि क्लाइंट आया है. अब तो सब क्लाइंट बन गए हैं. विज्ञापन होता है. फीस पर नियंत्रण के लिए सरकार को एक कोचिंग एक्ट बनाना चाहिए और पुराने भी कई कोचिंग एक्ट हैं हमारे देश में, लेकिन इनको रिवाइज करना चाहिए. इस दुर्घटना पर तुरंत कार्यवाही करके कठोर सजा देनी चाहिए. हर महीने इंस्पेक्शन होना चाहिए. अगर आप दुकानदार पर इंस्पेक्शन कर रहे हैं तो कोचिंग पर भी होना चाहिए.

कोचिंग को बताया एक धंधा

कोचिंग के विज्ञापन को लेकर आनंद कुमार ने कहा कि यह पुराना धंधा है कि सफल हुए बच्चे की फोटो को छापना. बच्चों को इनकी तस्वीरें दिखाकर लाना. कुछ बातें इतनी दर्दनाक हैं कि कि पूछिए मत. बच्चा तो कोचिंग चला गया लेकिन जिसके नाम से गया वो पढ़ा नहीं रहे हैं. हम चाहते हैं कि जहां कोचिंग है उस इलाके में सरकार का एक केंद्र होना चाहिए जहां बच्चे अपनी दिक्कतें बताएं. अगर किसी को मकान मालिक, कोचिंग या पीजी में परेशान कर रहा है तो उसके लिए स्पेशल सेल होना चाहिए. 

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विकास दिव्यकीर्ति और अवध ओझा को लेकर क्या बोले आनंद कुमार

राजेंद्र नगर हादसे के बाद कोचिंग छात्र विकास दिव्यकीर्ति, अवध ओझा और अन्य सेलिब्रेटी की चुप्पी पर सवाल उठा रहे हैं. इस पर आनंद कुमार ने कहा कि शिक्षकों को बोलना चाहिए. मैं किसी के खिलाफ नहीं हूं लेकिन यह सलाह देता हूं कि आप बोलिए और गलतियां हुई हैं तो उसे स्वीकार कीजिए और सुधारने का इंतजाम कीजिए. कानून के दायरे में काम कीजिए. वहीं, स्टार टीचर्स के नाम पर कोचिंग में एडमिशन दिलवाने को लेकर आनंद सर ने कहा कि हम बच्चों से अपील करते हैं कि सोच समझकर एडमिशन लीजिए. जरूरी नहीं है कि जिन टीचर का नाम हो गया है वो ही अच्छा पढ़ाए. किसका कंटेंट ताकतवर है, किससे आप कनेक्ट कर पाते हैं, छोटे-छोटे शहरों में भी नामी टीचर हैं, उनको खोजिये. अपने विवेक का इस्तेमाल कीजिए. भीड़ के पीछे मत जाइए. हम तो कहेंगे कि सेल्फ स्टडी पर सबसे ज्यादा यकीन रखिए. अगर आपको एक बार सेल्फ स्टडी करना आ गया तो फिर कोई सक्सेस तक आपको जाने से नहीं रोक सकता है. 

आने वाले टाइम में 15 साल बाद कोचिंग समाप्त हो जाएंगे. ये मेरा अनुभव है और दावा भी है क्योंकि ऑनलाइन में जितने अभी प्रयोग हुए हैं वो सिर्फ एक प्रतिशत हुआ है. अगर टीचर की टीम अच्छा ऑनलाइन क्लासेस बनाती है तो छात्र बंध जाएंगे उनसे. इसके बाद घर बैठे ऑफलाइन से ज्यादा फायदा होगा. सरकार से टीम बनाकर कितनी अच्छी किताब लिखी है NCERT  तो क्यों ना टीम बनाकर UPSC के लिए भी ऑनलाइन पढ़ाई तैयार करवाई जाए. 

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