दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर का कोचिंग हादसा इन दिनों सुर्खियों में हैं. जिसमें बेसमेंट में पानी भरने से तीन छात्रों की मौत हो गई थी. इस हादसे के बाद सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक पर छात्र इंसाफ की मांग करते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं. छात्रों का कहना है कि इस हादसे के पीछे जो भी जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए. इस घटना के बाद आजतक ने इस पूरे इलाके की पड़ताल की, जहां कोचिंग छात्र रहते हैं. पड़ताल में सामने आया कि यहां छात्र जिन हालातों में रह रहे हैं, वे सोचनीय हैं. आजतक की टीम ने इस मामले में आम आदमी पार्टी की निगम पार्षद आरती चावला से बातचीत करने की कोशिश की तो पता लगा कि उनके ऑफिशियल एड्रेस पर ही यूपीएससी एस्पिरेंट्स का पीजी चलाया जा रहा है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट...
हादसे के बाद MCD की बैठक में नहीं पहुंचीं पार्षद आरती चावला
आरती चावला के ऑफिस ऐड्रस 18/3, द्वितीय तल स्थित आधिकारिक पते पर पहुंचने पर पता चला कि इसका उपयोग पीजी आवास के रूप में किया जा रहा है. राजेंद्र नगर से पार्षद आरती चावला का पता नहीं चल पाया कि वह कहां हैं. फोन से लगातार संपर्क करने के बावजूद भी उनका उत्तर नहीं मिला. सबसे खास बात यह कि शनिवार को राजेंद्र नगर बेसमेंट हादसे में 3 की मौत हुई और सोमवार यानी आज MCD की बैठक में वो शामिल नहीं हुईं. टीम ने इस पीजी में रह रहे छात्रों से बातचीत की है.
छोटी सीढ़ियां, कोई फायर एग्जिट नहीं... 18 हजार रुपये किराया दे रहे छात्र
पीजी में पहुंचने के बाद टीम ने वहां रह रहे छात्रों से बात की. जांच में सामने आया कि यहां IAS कैंडिडेट्स रह रहे हैं. एक कैंडिडेट ने बताया कि उनका ऑफिस नीचे है और यह फ्लोर रैंट पर दिया हुआ है और आरती चावला यहीं नहीं रहती हैं. सेकेंड फ्लोर पर रह रहे छात्र 18 हजार किराया दे रहे हैं. पार्षद के आधिकारिक पते वाली बिल्डिंग भी एमसीडी बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन कर रही है. 10x10 के छोटे कमरे, दो-दो छात्रों शेयर करते हैं और उनमें शौचालय भी है. इस बिल्डिंग में छोटी-छोटी सीढ़ियां हैं और फायर एग्जिट भी नहीं है. अगर कोई बड़ी दुर्घटना हो जाए, तो खाली करना असंभव हो सकता है. इमारत के बाहर भी नियमों को अनदेखा किया जा रहा है. इस बिल्डिंग से कुछ दूरी पर ही राउ आइएएस कोचिंग है. 10 बाय 10 के कमरे में कोई वेंटिलेशन तक नहीं है. बच्चों से बिजली बिल 12 रुपए यूनिट के हिसाब से वसूला जा रहा जबकि दिल्ली में बिजली फ्री है. इसके अलावा बिल्डिंग के बाहर भी पूरी तरह अतिक्रमण कर रखा है.
छोटे-छोटे क्यूबिकल का किराया 10 हजार रुपये
राजेंद्र नगर जैसे पॉश इलाके में हमारे देश का भविष्य कैसे तैयार किया जा रहा है. राउ आईएएस बिल्डिंग के ठीक पीछे एक सर्विस लेन है, जहां एक बिल्डिंग के अवैध बेसमेंट में लकड़ी के आठ छोटे-छोटे क्यूबिकल बने हुए हैं. हर क्यूबिकल का किराया 10,000 रुपये है. सिविल सेवा का सपना देखने वाले छात्र इन सीलन भरे, तंग कमरों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं. स्थिति विकट है.
करोल बाग में बेसमेंट में चल रहीं लाइब्रेरी
राजेंद्र नगर के बाद आजतक की टीम करोल बाग गई. यहां के पॉश इलाके की बिल्डिंग में पीजी चल रहे हैं. बेसमेंट हादसा होने से पहले तक यहां सब कुछ ठीक लग रहा था. यहां के छोटे पीवीसी क्यूबिकल्स के मालिक इन्हें वैध बताकर छात्रों से मोटी रकम वसूलते थे लेकिन अब स्थिति काफी बदल गई है. आनन-फानन में इन बेसमेंट को खाली कराया जा रहा है. यहां छात्रों से 10 हजार रुपये किराया लिया जा रहा था और भोजन के साथ 15,000 रुपये. 10 कमरों के प्रत्येक सेट में एक रसोईघर और एक शौचालय है, जिसमें बिजली की लागत 12 रुपये है, दिल्ली में भी. आजतक की टीम पहुंचने के बाद
करोल बाग में बिल्डिंग के केयरटेकर से बातचीत.
रिपोर्टर- इन सभी कक्षों के लिए एक शौचालय था? और बिजली का क्या?
केयरटेकर- हां, बिजली के लिए 12 रुपये. रिपोर्टर- सही. यह मुश्किल से छह या आठ लोगों के लिए प्रति कमरे में पर्याप्त है.
केयरटेकर- हमने इसे पहले बंद कर दिया था, अच्छा है, उन्होंने इसे बीच में स्थापित कर दिया था.
रिपोर्टर- ये पीवीसी हैं?
केयरटेकर- हां, यहां बहुत अधिक छात्र नहीं थे, इसलिए हमने इसे अभी तक स्थापित नहीं किया था. हमें पहले बेसमेंट में पानी की समस्या का सामना करना पड़ा था. जब हमारे अंडरकवर रिपोर्टर ने लाइब्रेरी स्टाफ से एडमिशन के बारे में पूछा तो उन्होंने ये कहा- मैं लाइब्रेरी में छात्रों का दाखिला कराना चाहता था.
देशमुख- इसे दूसरी जगह ले जाया जाएगा, हम अभी इसकी सफाई कर रहे हैं.
रिपोर्टर- फीस क्या है?
देशमुख- 2,500 रुपए.
रिपोर्टर- तो ये कल खुलेगी?
देशमुख- हां, ये कल खुलेगी.
रिपोर्टर- क्या ऐसी और दूसरी सुविधाएं हैं?
देशमुख- हां, सब कुछ है.
देशमुख ने हमें आश्वासन दिया कि कल बेसमेंट लाइब्रेरी फिर से खुल जाएगी. हालांकि, आपको बता दें कि इस इलाके में अभी भी अवैध बेसमेंट खुलेआम चल रहे हैं. इन्हें हर कोई देख सकता है, सिवाय उन लोगों के जिन्हें कानून लागू करना चाहिए. दूर शहरों से कोचिंग करने आ रहे छात्रों का हाल बुरा है. बेसमेंट में लाइब्रेरी और रहने की व्यवस्था ने सभी को हैरान कर दिया है और चौंकाने वाली यह है कि इनका किराया भी अच्छा खासा है.