दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने दूसरी लहर के बाद पहली बार स्कूल खुलने के मौके पर 'आजतक' से एक्सक्लूसिव बातचीत की. अभिभावकों के डर को दूर करने के सवाल पर उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि जब तक कोरोना है डर तो रहेगा और डर के रहना भी ज़रूरी है. अगर नहीं डरे तो ऐसा भी न हो कि बच्चे गले मिलने लगें. हालांकि इतना डर भी नहीं है कि स्कूल ही न आएं. पेरेंट्स को आश्वस्त करता हूं कि ये स्कूल खोलने का सही समय है.
आगे मनीष सिसोदिया ने कहा कि एक समय था जब दिल्ली में रोजाना एक लाख टेस्ट हो रहे थे तो 27 हजार केस आ रहे थे. आज एक लाख टेस्ट में 27 लोग भी कोरोना पॉजिटिव नहीं हैं. अब हालात बहुत सुधर चुके हैं. तय ये भी करना है कि कोरोना के डर से बच्चों को घर पर बिठाकर रखें और पढ़ाई का नुकसान होने दें या सावधानी से बच्चों को स्कूल भेजें. हमने अभिभावकों से पूछा और उन्होंने स्कूल कॉलेज खोलने की इच्छा जताई थी, इसलिए सरकार ने फैसला लिया है.
कामचलाऊ है ऑनलाइन क्लास
डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया से जब 'आजतक' ने पूछा कि उन्हें ऑफलाइन क्लास पसन्द है या ऑनलाइन? इसके जवाब में सिसोदिया ने कहा कि 'बच्चों में बहुत उत्साह है. चाहे बड़ा घर हो या छोटा घर हो लेकिन घर के दायरे में पिछले डेढ़ साल से रहना और एक कमरे में पूरी दुनिया समेट लेना स्टूडेंट्स के लिए बहुत मुश्किल है. मैं व्यक्तिगत मानता हूं कि ऑनलाइन क्लास सिर्फ काम चलाऊ है, ये ऑफलाइन क्लास की बराबरी नहीं कर सकता है. चाहे कितनी अच्छी टेक्नोलॉजी, ग्राफिक्स इस्तेमाल कर ऑनलाइन क्लास चला लीजिए, वो स्कूल की क्लास में आकर पढ़ाई करने के बराबर नही है. पढ़ना सिर्फ किताबों से नहीं बल्कि स्कूल या कॉलेज के वातावरण से भी होता है.
बाकी क्लास का क्या होगा?
साथ ही, अन्य कक्षाओं को खोलने के सवाल पर मनीष सिसोदिया ने 'आजतक' से कहा कि अन्य राज्यों में स्कूल खुलने का आकलन भी किया है. अबतक सबका अनुभव अच्छा रहा है. दिल्ली सबसे अंतिम राज्य है जहां स्कूल के अलावा शिक्षण संस्थान, कोचिंग इंस्टीट्यूट, स्कूल और कॉलेज खुल रहे हैं. हालांकि एक्सपर्ट का कहना है कि जितने छोटे बच्चे होंगे उतना रिस्क कम है. एक्सपर्ट का कहना था कि प्राइमरी स्कूल भी खोले जाएं लेकिन धीरे धीरे स्कूल खोलने का फैसला लिया है. अगर सब ठीक रहता है तो अगली क्लासेस भी खोली जाएंगी.
जरूरत पड़ने पर आधे घंटे में बद कर सकते हैं
तीसरी लहर में बच्चों को खतरे के मद्देनजर नज़र क्या स्कूल खोलना एक सही फैसला है? जवाब में मनीष सिसोदिया ने कहा कि तीसरी लहर का ख़तरा टला नहीं है. लेकिन आर्थिक एक्टिविटी के साथ शैक्षिक गतिविधि खोलना ज़रूरी था. आख़िर कितने समय तक बच्चों की पढ़ाई का नुकसान कर सकते हैं. आग रिस्क लेकर स्कूल नहीं खोले तो एक पीढ़ी बिना पढ़े लिखे या कम पढ़े लिखे रह जाएगी. साथ ही बच्चों के डिप्रेशन को भी हैंडल करना बहुत ज़रूरी है. अगर कुछ भी ख़तरा है और बंद करने की ज़रूरत पड़ती है तो आधे घंटे में बन्द कर सकते हैं.
बच्चों की वैक्सीन के बिना स्कूल खोलने के सवाल पर मनीष सिसोदिया ने कहा कि 'बच्चों की वैक्सीन का इंतज़ार है, बड़ों की वैक्सीन आ गई है. साथ ही ज़रूरी है कि वैक्सीन उपलब्ध भी हो उम्मीद है कि जब बच्चों की वैक्सीन आए तो वो उपलब्ध भी हो, जैसे ही वैक्सीन आएगी हम बच्चों को वैक्सीन लगाएंगे.
आगे दिल्ली की आर्थिक स्तिथि पर मनीष सिसोदिया ने कहा कि आर्थिक स्थिति फिलहाल ख़राब है, सारे राज्यों में भी खराब ही होगी. बाज़ार नही खुले थे, और अभी दिल्ली का बजट 40% नीचे चल रहा है इसलिए सरकार ने खर्चे में भी कटौती की है.
अभिभावकों को भरोसा दिलाते हुए मनीष सिसोदिया ने कहा कि 'मैं अभिभावकों से कहना चाहता हूं कि वो डरे नहीं, बच्चों की पढ़ाई का आकलन करें कि बच्चों को कितना नुकसान हुआ है. कोई शंका है तो स्कूल या टीचर से बात करें. हमारी तरफ से कोई निर्देश नही है कि बच्चे को स्कूल बुलाना अनिवार्य है.