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केरल के स्कूलों में पढ़ाया जाएगा संविधान का ये विशेष हिस्सा, जानिए इसके बारे में

केरल के शिक्षा मंत्री के अनुसार, पाठ्यक्रमों में अब भारतीय संविधान की प्रस्तावना के बारे में पढ़ाया जाएगा. शिक्षा मंत्रा के अनुसार, पाठ्यक्रम के हिस्से के रूप में बच्चों के लिए इसे आत्मसात करने के लिए गतिविधियां होंगी. 'राष्ट्रीय स्तर पर, केरल वह राज्य है जो पाठ्यक्रम सुधार गतिविधियों को शीघ्रता से पूरा करता है.

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Preamble Of Constitution of India
Preamble Of Constitution of India

Preamble to the Constitution of India: भारतीय संविधान की प्रस्तावना इसके उद्देश्यों और सिद्धांतों के बारे में बताती है. केरल राज्य में स्कूली पाठ्यपुस्तकों में संविधान की प्रस्तावना शामिल करने का फैसला लिया गया है. शिक्षा मंत्री वी शिवनकुट्टी ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना को सभी पाठ्यपुस्तकों में प्रस्तावना के रूप में जोड़ी जाएगी.

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उन्होंने कहा, पाठ्यक्रम के हिस्से के रूप में बच्चों के लिए इसे आत्मसात करने के लिए गतिविधियां होंगी. ''राष्ट्रीय स्तर पर, केरल वह राज्य है जो पाठ्यक्रम सुधार गतिविधियों को शीघ्रता से पूरा करता है. जब भी देश में एकेडिमक और अन्यथा अलोकतांत्रिक प्रथाएं होती हैं, हमने एकेडिमक रूप से उससे लड़ने की कोशिश की है. हम ऐसा करना जारी रखेंगे. शुरू से ही शुरुआत में, हमने घोषणा की है कि केरल संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने वाले सुधारों को आगे बढ़ाएगा".

केरल के शिक्षा मंत्री ने क्या कहा

शिक्षा मंत्री ने आगे बताया कि केरल राज्य स्कूल पाठ्यक्रम संचालन समिति ने कक्षा I, III, V, VII और IX के लिए व्यापक पाठ्यक्रम संशोधन में 173 पाठ्यपुस्तक शीर्षकों को मंजूरी दे दी है. पाठ्यक्रम सुधारों का हिस्सा. अन्य कक्षाओं के लिए नई पाठ्यपुस्तकें शैक्षणिक वर्ष 2025-26 तक तैयार हो जाएंगी. पोक्सो नियमों, लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों और वैज्ञानिक स्वभाव पर पाठ शामिल किए गए हैं. खेल, अपशिष्ट समस्या, स्वच्छता, नागरिक जागरूकता, समान न्याय पर आधारित लिंग जागरूकता, वैज्ञानिक जागरूकता, POCSO नियम, कृषि, लोकतांत्रिक मूल्य, धर्मनिरपेक्षता पाठ्यपुस्तकों का हिस्सा हैं. 5 से 10 वीं कक्षा के छात्रों को व्यावसायिक शिक्षा प्रदान की जाएगी. इसमें पर्यटन, कृषि, आईटी, कपड़ा और कौशल विकास शामिल हैं. इससे कम उम्र से ही बच्चों में काम करने का रवैया विकसित करने में मदद मिलेगी". शिक्षकों के लिए शिक्षक पुस्तकें डी होंगी उन्हें प्रशिक्षण प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया.

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क्या है संविधान की प्रस्तावना:

"हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को:

सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय,  विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए तथा उन सब में व्यक्ति की  गरिमा और राष्ट्र की और एकता अखंडता सुनिश्चित करनेवाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प हो कर अपनी इस संविधान सभा में आज  तारीख 26 नवंबर, 1949 ई० "मिति मार्ग शीर्ष  शुक्ल सप्तमी, संवत दो हज़ार छह विक्रमी) को एतद संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं."

आपको बता दें, प्रस्तावना में विभिन्न प्रकार के शब्दों के समाहित किया गया है. जिसमें से प्रस्तावना को जुड़े हुए तीन पक्षों को निकालकर इसके बारे में विस्तार से जान सकते हैं.

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