पश्चिम बंगाल में 10वीं क्लास के मॉडल क्वेश्चन पेपर की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सियासी बवाल मच गया है. इस पेपर में छात्रों को एक नक्शे में 'आजाद कश्मीर' मार्क करने के लिए कहा गया है. इस मसले पर बीजेपी ने सीधे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को घेरा है और इसे 'जिहादी साजिश' बताया है. जबकि टीएमसी ने इसे एक गलती बताकर पल्ला झाड़ लिया है. सत्तारूढ़ पार्टी का कहना था कि वो इसका समर्थन नहीं करती है.
वहीं, पश्चिम बंगाल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन के अध्यक्ष रामानुज गांगुली ने स्वीकार किया कि स्वायत्त निकाय द्वारा प्रकाशित एग्जाम पेपर में गड़बड़ी हुई है और गलती के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने कहा कि हमने विभिन्न स्कूलों द्वारा प्रदान किए गए प्रश्नपत्रों का संकलन प्रकाशित किया. ऐसे ही एक प्रश्न पत्र में इस गलती की पहचान की गई है. जांच की जा रही है और संपादकीय टीम के जिन सदस्यों को प्रूफ-रीडिंग का काम सौंपा गया था, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि बोर्ड की वेबसाइट पर शुद्धिपत्र जारी करने की प्रक्रिया चल रही है. गलती में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा.
सेट पेपर की वायरल हो रही है तस्वीर
दरअसल, माध्यमिक परीक्षार्थियों के लिए एक बंगाली माध्यम के स्कूल की नोट बुक में जारी प्रश्नपत्र में मानचित्र पर कई स्थानों की पहचान करने के लिए कहा है. इसमें पृष्ठ 132 पर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पाकिस्तान में 'आजाद कश्मीर' के रूप में संदर्भित) का भी जिक्र है. सेट पेपर में 'आजाद कश्मीर' को लेकर मार्क करने का सवाल किया गया है. हालांकि, 'आजतक' सोशल मीडिया पर वायरल पेपर की तस्वीर की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है.
'आरोप सही हैं तो तुरंत की जाए कार्रवाई'
वहीं, केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुभाष सरकार ने मामले की राज्य स्तरीय जांच की मांग की. उन्होंने न्यूज एजेंसी से कहा कि केंद्र सरकार भी इस मुद्दे को देखेगी. उन्होंने कहा- मैं राज्य के शिक्षा मंत्री से जांच कराने का आग्रह करता हूं. अगर आरोप सही हैं तो प्रकाशक और पेपर सेट करने वाले व्यक्ति के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए. परीक्षा के पेपर को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए और प्रश्न को हटा दिया जाना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि अगर यह घटना सच पाई जाती है तो इसका श्रेय 'टीएमसी द्वारा संचालित सरकार की तुष्टिकरण की राजनीति को दिया जा सकता है, जिसने कुछ लोगों को टेस्ट पेपर में देश-विरोधी ओवरटोन वाले प्रश्न डालने के लिए प्रेरित किया है.
'क्या ममता बनर्जी ऐसे विचारों का समर्थन करती हैं'
राज्य में ये मुद्दा एक प्रमुख राजनीतिक विवाद में बदल गया है. भाजपा ने राज्य में 'जिहादी विचारों' को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार पर आरोप लगाया है. जबकि सत्तारूढ़ टीएमसी ने आरोपों को निराधार करार दिया है. बीजेपी अध्यक्ष डॉ. सुकांत मजूमदार ने ट्वीट किया और कहा- पश्चिम बंगाल माध्यमिक परीक्षा के पेपर में छात्रों को 'आजाद कश्मीर' को मार्क करने के लिए कहा गया है. क्या सीएम ममता बनर्जी ऐसे विचारों का समर्थन करती हैं? उन्होंने आगे कहा- ये टीएमसी सरकार का सबसे खराब तुष्टिकरण है और निंदनीय है. ऐसा करने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.
भाजपा के वरिष्ठ नेता राहुल सिन्हा ने कहा- उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए जाने चाहिए. इस घटना से साबित होता है कि राज्य सरकार अपने वोट बैंक को खुश करने के लिए जिहादी विचारों को बढ़ावा देती है. भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि टीएमसी सरकार न सिर्फ 'जिहादी तत्वों का समर्थन करती है बल्कि स्कूली बच्चों के दिमाग को प्रभावित करने की भी कोशिश करती है.
'भारत विरोधी मानसिकता का प्रयास'
उन्होंने ट्वीट किया- 'माध्यमिक टेस्ट पेपर 2023 के पृष्ठ 132 पर इतिहास के प्रश्न पत्र के मार्क सेक्शन को चेक करें. छात्रों को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के हिस्से को 'आजाद कश्मीर' के रूप में पहचानने के लिए कहा गया है.' उन्होंने आगे कहा- 'ये राज्य सरकार ना सिर्फ उग्रवादियों का समर्थन कर रही है, बल्कि युवा छात्रों में भारत विरोधी मानसिकता पैदा करने का भी प्रयास कर रही है. TMC का मतलब भ्रष्टाचार, झूठ और आतंकवाद है.'
इस बीच, माध्यमिक परिषद अध्यक्ष रामानुज गंगोपाध्याय ने कहा- मामले पर गौर किया जाएगा. फिर शोधन या स्पष्टीकरण दिया जाएगा. इसकी घोषणा मध्य शिक्षा परिषद की वेबसाइट पर की जाएगी. जिन लोगों ने प्रश्न बनाए या संपादित किए, उनसे बात की जाएगी. जरूरत पड़ी तो बोर्ड के गठन के अनुसार कार्रवाई की जाएगी.
टीएमसी के राज्य प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि उनकी पार्टी किसी भी गलत चीज का समर्थन नहीं करती है. उन्होंने कहा- अगर किसी ने ऐसा सवाल किया है तो उसने गलत किया है. हम ऐसी हरकतों का समर्थन नहीं करते. घोष ने कहा- टीएमसी एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी है जो किसी विशेष समुदाय को खुश करने में विश्वास नहीं करती है. हमारी पार्टी के खिलाफ आधारहीन टिप्पणी की गई है.