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सुप्रीम कोर्ट से ममता सरकार को बड़ा झटका, 25000 शिक्षकों की नियुक्ति रद्द, वापस करना होगा वेतन

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दागी उम्मीदवारों की नियुक्ति रद्द करने के हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई वैध आधार नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल द्वारा संचालित और सहायता प्राप्त स्कूलों में 25,753 शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति में गड़बड़ी और दाग है.

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सुप्रीम कोर्ट
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पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार को बड़ा झटका देते हुए पश्चिम बंगाल के स्कूलों में 25,753 शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति को अमान्य ठहराने वाले कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा. भर्ती में गड़बड़ी के चलते 25,753 शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्तियों को रद्द कर दिया गया है. साथ ही जिन उम्मीदवारों की नियुक्तियों को धोखाधड़ी की श्रेणी में रखा गया है उन्हें अपनी सैलरी भी लौटानी होगी.

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चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) संजीव खन्ना और जस्टिस पीवी संजय कुमार की बेंच ने चयन प्रक्रिया के बारे में कड़ी टिप्पणियां कीं और कहा कि क्योंकि नियुक्तियां धोखाधड़ी से हुई हैं, इसलिए यह धोखाधड़ी के बराबर है. पीठ ने कहा, "हमें हाईकोर्ट के उस निर्णय में हस्तक्षेप करने की कोई वजह नहीं मिली, जिसमें कहा गया था कि दागी उम्मीदवारों की सेवाएं और उनकी नियुक्ति समाप्त कर दी जाए और उन्हें उनका वेतन वापस करने के लिए कहा जाए. उनकी नियुक्ति धोखाधड़ी से हुई थी, इसलिए यह धोखाधड़ी के बराबर है."

क्या है मामला?
दरअसल साल 2016 में पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (WBSSC) ने सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में 25,000 से ज्यादा शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती की थी. लेकिन बाद में इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और घोटाले का खुलासा हुआ. जांच में पता चला कि कई उम्मीदवारों को धोखाधड़ी और घूस के जरिए नौकरी मिली थी.

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सुप्रीम कोर्ट का फैसला, लौटाना होगा वेतन
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दागी उम्मीदवारों की नियुक्ति रद्द करने के हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई वैध आधार नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि यह भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह दूषित थी और इसे सही नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने कहा कि जिन उम्मीदवारों को गलत तरीके से नौकरी मिली, उनकी नियुक्तियां रद्द रहेंगी और उन्हें अब तक का वेतन भी लौटाना होगा.

हालांकि, जिन उम्मीदवारों की भर्ती सही तरीके से हुई थी, लेकिन उनकी भी नियुक्ति रद्द की गई है, उन्हें वेतन वापस करने की जरूरत नहीं होगी. ऐसे उम्मीदवार जो पहले से किसी अन्य सरकारी विभाग में कार्यरत थे, वे फिर से अपने पुराने विभाग में आवेदन कर सकते हैं. आवेदन पर 3 महीने में कार्रवाई की जाएगी.

क्या हुआ था पहले?
पिछले साल 7 मई को सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी. लेकिन अब कोर्ट ने साफ कर दिया है कि पूरी चयन प्रक्रिया गलत थी और इसे जारी नहीं रखा जा सकता. इस फैसले के बाद पश्चिम बंगाल सरकार को इस मामले में बड़ा झटका लगा है, और हजारों उम्मीदवारों को अब दोबारा नौकरी के लिए आवेदन करना पड़ सकता है.

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