Mathematics of Solar Eclipses: साल 2021 का पहला सूर्य ग्रहण गुरुवार 10 जून को लगने वाला है. इसे भारत से देखा जा सकेगा और यह इसमें रिंग ऑफ फायर भी दिखाई देगी. फायर रिंग तब दिखाई देती है जब चंद्रमा पूरी तरह सूर्य की रोशनी को ढकता है. ग्रहण भारत के सभी हिस्सों में नहीं दिखेगा और केवल आखिरी समय में लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश के इलाकों में देखा जा सकेगा.
अब सोचने वाली बात ये है कि आने वाले सूर्य ग्रहण के सही समय और जगह की गणना पहले से कैसे कर ली जाती है. इसके लिए स्पेस साइंटिस्ट बड़ी बारीक और सटीक कैलकुलेशन करते हैं और आगे आने वाले कई वर्षों के सूर्य और चंद्र ग्रहण की भविष्यवाणी कर लेते हैं. आइये जानते हैं क्या है इसका फॉर्मूला-
अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अनुसार, बीते वर्षों के रिकॉर्ड और डायरेक्ट ऑब्जर्वेशन से प्राप्त dT वैल्यूज़ का उपयोग करते हुए -1999 से +3000 के अंतराल के दौरान किसी भी समय आने वाले dT वैल्यूज़ को एक सरल पॉलिनॉमियल द्वारा पता किया जा सकता है.
Solar Eclipses Scientific Formula:
वर्ष 2005 से 2050 तक के लिए
ΔT = 62.92 + 0.32217 * t + 0.005589 * t^2
जहां: t = y - 2000
और y = year + (month - 0.5)/12
यहां ΔT पिछले ग्रहण से अगले ग्रहण के बीच का समय है और y पिछले ग्रहण का वर्ष है.
यह फॉर्मूला देखने में जरूर मुश्किल दिखता है मगर केवल 2 वैल्यूज़ की मदद से अगले ग्रहण के समय की गणना की जा सकती है. स्पेस साइंस अपनी इन्हीं पेचीदगियों के चलते हमेशा के स्टूडेंट्स के बीच एक कौतूहल भरा सब्जेक्ट रहा है.