दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध विवेकानंद कॉलेज के 12 एडहॉक शिक्षकों को कोरोना काल में बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. इस मामले में एडहॉक शिक्षकों के समर्थन में दिल्ली विवि के शिक्षकों ने अपने-अपने घरों से भूख हड़ताल की.
एग्जीक्यूटिव काउंसिल के पूर्व सदस्य प्रो. राजेश झा ने कहा कि विवेकानंद कॉलेज के द्वारा ये उठाया गया ये कदम अमानवीय है. इस पूरे मामले को लेकर एकेडमिक एक्शन एंड डेवलपमेंट और एसी-ईसी के सदस्यों द्वारा कुलपति को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की गई है. कुलपति से कहा गया है कि वो मामले का हल निकालें ताकि इस संकट की घड़ी में किसी भी परिवार को आर्थिक परेशानी न हो.
बता दें कि डीयू के विवेकानंद कॉलेज प्रशासन द्वारा 12 एडहॉक शिक्षकों को सर्विस में एक्सटेंशन नहीं दिया गया है. इसे लेकर डीयू के शिक्षक समुदाय में खासी नाराजगी है. डीटीए प्रभारी डॉ. हंसराज सुमन ने बताया कि इन 12 एडहॉक टीचर्स में से पांच एडहॉक टीचर्स को कोरोना ने पूरी तरह से अपनी चपेट में लिया हुआ है. कोरोना से पीड़ित टीचर्स की हालात बहुत ही खराब है. परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर उनकी सर्विस टर्मिनेट कर दी गई. ऐसे समय में जबकि परिवार को आर्थिक सहायता बहुत जरूरी है.
डीटीए अध्यक्ष डॉ. आशा रानी व सचिव डॉ. मनोज कुमार सिंह ने वाइस चांसलर से यह भी मांग की है कि जो प्रिंसिपल एडहॉक टीचर्स को ईडब्ल्यूएस रोस्टर, वर्कलोड के नाम पर हर चार महीने बाद एडहॉक टीचर्स को हटाने की कोशिश करें, ऐसे प्रिंसिपल को आने वाले दिनों में 6 महीने का एक्सटेंशन ना दें. उनका कहना है कि जब तक कॉलेजों में एडहॉक प्रिंसिपल रहेंगे वे इसी तरह से शिक्षकों को परेशान करते रहेंगे. उन्होंने जल्द से जल्द प्रिंसिपल पदों पर स्थायी नियुक्ति की मांग की है.