छात्राओं की रैगिंग करने के मामले राजस्थान के भरतपुर मेडिकल कॉलेज ने दस सीनियर स्टूडेंट्स को सात दिन के लिए सस्पेंड कर दिया है. इनमें तीन छात्र और सात छात्राएं शामिल हैं. दोषी पाए गए सभी स्टूडेंट्स सात दिन तक क्लासेस के अलावा लाइब्रेरी, जिम समेत कई सुविधाओं का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, पूरा मामला भरतपुर के श्री जगन्नाथ मेडिकल कॉलेज का है, जहां 21 अक्टूबर को इन सभी स्टूडेंट्स ने 13 छात्राओं की एक साथ रैगिंग की थी. जानकारी के अनुसार 21 अक्टूबर को कुछ सीनियर स्टूडेंट्स ने MBBS की फर्स्ट ईयर की 13 छात्राओं को कॉमन रूम में रोककर जबरन तरीके से उन्हें गाना गाने के लिए मजबूर किया. इतना ही नहीं उनकी हॉबी को लेकर और कई तरह के जबरन सवाल किए गए. बाद में परेशान होकर पीड़ित छात्राओं ने प्रिंसिपल को इसकी शिकायत की.
रैगिंग की शिकायत के बाद कॉलेज उठाया ठोस कदम
छात्राओं की पूरी बात सुनने के बाद कॉलेज प्रशासन ने एंटी रैगिंग कमेटी को इस पूरे मामले की जांच का आदेश दिया. इस पूरे मामले में प्रिंसिपल तरुण लाल ने तत्परता दिखाते हुए एंटी रैगिंग कमेटी को सक्रिय कर पूरे मामले की जानकारी के लिए तलब किया. जिसके बाद में पीड़ित छात्राओं को प्रिंसिपल रूम में बुलाकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली गई. हालांकि, पीड़ित छात्राओं ने किसी भी कार्रवाई से मना किया. बावजूद इसके मामले की गंभीरता को देखते हुए कॉलेज प्रशासन ने स्टूडेंट के साथ उनके परिजनों को बुलाकर उनका पक्ष भी जाना. इसके बाद कमेटी ने 10 स्टूडेंट्स को दोषी मानकर सस्पेंड कर दिया.
बता दें कि भरतपुर के श्री जगन्नाथ मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी दो ऐसे मामले सामने आ चुके हैं. जिसमें कॉलेज प्रशासन की ओर से कुछ स्टूडेंट्स को सस्पेंड करने के साथ जुर्माना लगाने की कार्रवाई भी की गई थी. एक बार फिर रैगिंग का मामला सामने आने के बाद इसे गंभीरता से लिया गया और दोषी स्टूडेंट्स को सस्पेंड कर दिया.