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हम दर-दर की ठोकरें... टीचर्स डे पर राजभर के आवास पर 69000 शिक्षक अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन

अभ्यर्थियों के मुताबिक, वह शाम तक यहां पर बैठेंगे. उन्होंने कहा कि आज शिक्षक दिवस है, आज उनको कॉलेज के स्कूल में होना चाहिए था लेकिन आज वह दर-दर की ठोकर खा रहे हैं.

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Teachers Protest
Teachers Protest

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में 69000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले को लेकर शिक्षक अभ्यर्थी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. अभ्यर्थी कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के आवास के अंदर धरने पर बैठे हैं. अभ्यर्थियों के मुताबिक, वह शाम तक यहां पर बैठेंगे. उन्होंने कहा कि आज शिक्षक दिवस है, आज उनको कॉलेज के स्कूल में होना चाहिए था लेकिन आज वह दर-दर की ठोकर खा रहे हैं.

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ओम प्रकाश राजभर ने क्या कहा?

आजतक से बात करते हुए योगी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने आश्वाशन दिया है और हमारी चीफ सेक्रेटरी से भी बातचीत हुई है. वह अपडेट लेकर हमे बताएंगे. उन्होंने कहा कि सीएम भी बाहर हैं ऐसे मैं अभी बात करके सबकुछ शाम तक क्लियर होगा.

लगातार हो रहा प्रदर्शन

बीते दिनों से लगातार अपनी मांगो को लेकर शिक्षक अभ्यर्थी प्रदर्शन कर रहे हैं. हाल ही में लखनऊ में हजारों की संख्या में टीचर्स ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के आवास के बाहर विरोध किया था. शिक्षक अभ्यर्थी लगातार यूपी 69000 शिक्षक भर्ती मामले को लेकर सड़कों पर हैं. नारेबाजी करते हुए अभ्यर्थियों ने कहा कि 'योगी जी न्याय करो…केशव चाचा न्याय करो'. बढ़ते प्रदर्शन के कारण पुलिस बल भी तैनात किया गया था. बताया जा रहा था कि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के घर के बाहर धरना प्रदर्शन कर रहे शिक्षक अभ्यर्थियों पर पुलिस ने लाठी भी चलाई गईं थीं.

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क्या है पूरा मामला और कहां से शुरू हुआ विवाद

उत्तर प्रदेश में जब अखिलेश सरकार थी, तब 1 लाख 37 हजार शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक के रूप में समायोजित कर दिया गया था. इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा और समायोजन को रद्द कर दिया गया. यानी अखिलेश सरकार ने जिन शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक बना दिया था, वह फिर से शिक्षामित्र बन गए. अब इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 1 लाख 37 हजार पदों पर भर्ती का आदेश योगी सरकार को दिया. योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि हम एक साथ इतने पद नहीं भर सकते हैं. फिर सुप्रीम कोर्ट ने दो चरण में सभी पदों को भरने का आदेश दिया. इस आदेश के बाद योगी सरकार ने 2018 में पहले 68500 पदों के लिए वैकेंसी निकाली. इसके बाद दूसरे चरण की भर्ती थी 69000 सहायक श‍िक्षक भर्ती. 

कहां से शुरू हुआ विवाद?

69 हजार सहायक श‍िक्षक पदों के लिए न‍िकली इस भर्ती की परीक्षा 6 जनवरी 2019 को हुई. इस भर्ती के लिए अनारक्षित की कटऑफ 67.11 फीसदी और ओबीसी की कटऑफ 66.73 फीसदी थी. इस भर्ती के तहत करीब 68 हजार लोगों को नौकरी मिली. 

लेकिन यहीं से यह सवाल उठा कि 69 हजार भर्ती में आरक्षण न‍ियमों को लेकर अनदेखी की गई. बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 का पालन सही से नहीं किया गया. 69000 भर्ती के अभ्यर्थी जो इस व‍िरोध के साथ आंदोलन के लिए सड़क पर उतरे, उनका कहना था कि इस नियमावली में साफ है कि कोई ओबीसी वर्ग का अभ्यर्थी अगर अनारक्षित श्रेणी के कटऑफ से अधिक नंबर पाता है तो उसे ओबीसी कोटे से नहीं बल्कि अनारक्षित श्रेणी में नौकरी मिलेगी. यानी वह आरक्षण के दायरे में नहीं गिना जाएगा.

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इसके बाद से 69 हजार शिक्षक भर्ती का पेच उलझ गया. आंदोलनरत अभ्यर्थियों ने दावा किया कि 69 हजार शिक्षक भर्ती में ओबीसी वर्ग को 27% की जगह मात्र 3.86% आरक्षण मिला यानी ओबीसी वर्ग को 18598 सीट में से मात्र 2637 सीट मिलीं. जबकि उस वक्त सरकार का कहना था कि करीब 31 हजार ओबीसी वर्ग के लोगों की नियुक्ति की गई. 

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