पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती को पूरी तरह टेंटिड और दूषित करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 25,753 शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्तियों को रद्द कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा. जिन उम्मीदवारों की नियुक्तियों को धोखाधड़ी की श्रेणी में रखा गया है उन्हें अपनी सैलरी वापस करनी होगी. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की मुख्यमंत्री ममता बेनर्जी ने कड़ी आलोचना की है. इसे 'घोर अन्याय' करार देते हुए ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि यह भाजपा द्वारा रची गई साजिश है, जिसका उद्देश्य इन शिक्षकों को चुनावी ड्यूटी से रोकना है. साथ ही उन्होंने कहा, 'मैं इस फैसले का समर्थन नहीं कर सकती.'
ममता बनर्जी ने पूरी भर्ती को रद्द करते हुए सभी उम्मीदवारों की सामूहिक बर्खास्तगी पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा, 'सभी नियुक्त शिक्षक दोषी नहीं हो सकते, जिन्हें आप दोषी कह रहे हैं, हमारे पास उनके खिलाफ कोई प्रमाण नहीं है. क्या भाजपा सरकार बंगाल की शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त करना चाहती है?' हालांकि, उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कोर्ट के फैसले पर अमल करेगी और चयन प्रक्रिया को फिर से दोहराएगी. आइए इस पूरे मामले की टाइम लाइन पर नजर डालते हैं.
पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (WBSSC) ने सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों की भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की. यह प्रक्रिया शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के आधार पर शुरू हुई. उस समय पार्थ चटर्जी राज्य के शिक्षा मंत्री थे.
2016: भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई
साल 2016 में शिक्षक और अन्य कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई जिसके माध्यम से कुल 24,640 पदों को भरा जाना था. 23 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने आवेदन किया. OMR शीट्स के आधार पर परीक्षा आयोजित की गई, लेकिन बाद में इसमें हेरफेर के आरोप लगे.
27 नवंबर 2017: परिणाम घोषित हुए
WBSSC ने शिक्षक भर्ती परीक्षा के परिणाम घोषित किए और मेरिट लिस्ट जारी की. हालांकि, कई उम्मीदवारों ने परिणामों में गड़बड़ी का आरोप लगाया, जैसे कि कम अंक वाले उम्मीदवारों को ज्यादा रैंक मिलना और TET पास न करने वालों को नौकरी मिलना. साल के अंत तक परिणामों में कथित धांधली के खिलाफ असफल उम्मीदवारों ने राज्य भर में विरोध प्रदर्शन शुरू किए. कई ने कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर कीं.
22 जुलाई 2022: तत्कालीन शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी
अप्रैल 2022 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं की जांच के लिए CBI को निर्देश दिया. दूसरी ओर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच शुरू कर दी. ED ने मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच की और पार्थ-अर्पिता के बीच वित्तीय लेनदेन के सबूत पाए. अर्पिता के घर से बरामद 21 करोड़ रुपये नकदी को घोटाले की कमाई माना गया. 22 जुलाई को तत्कालीन शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को गिरफ्तार किया गया. CBI और ED ने अन्य नेताओं और अधिकारियों, जैसे माणिक भट्टाचार्य (TMC विधायक और WB प्राथमिक शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष) से भी पूछताछ की.
22 अप्रैल 2024: कलकत्ता हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
कलकत्ता हाई कोर्ट ने 2016 की भर्ती प्रक्रिया में 25,753 नियुक्तियों को रद्द कर दिया. कोर्ट ने इसे "व्यवस्थित धोखाधड़ी" करार दिया, जिसमें OMR शीट्स में छेड़छाड़ और रैंक जंपिंग जैसे सबूत मिले. हाईकोर्ट ने पाया था कि जहां सिर्फ 24,640 पदों के लिए भर्ती होनी थी, वहां कुल 25,753 नियुक्ति पत्र जारी कर दिए गए. कोर्ट ने अवैध रूप से नियुक्त कर्मचारियों को वेतन और लाभ 12% ब्याज के साथ वापस करने का आदेश दिया. साथ ही, CBI को जांच जारी रखने और WBSSC को नई भर्ती शुरू करने का निर्देश दिया.
7 मई 2024: सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक
पश्चिम बंगाल सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. सुप्रीम कोर्ट ने नियुक्तियों को रद्द करने पर अंतरिम रोक लगा दी, लेकिन CBI को जांच जारी रखने की अनुमति दी. कोर्ट ने कहा कि वैध और अवैध नियुक्तियों को अलग करना जरूरी है.
19 दिसंबर 2024: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की विस्तृत सुनवाई शुरू की. यह सुनवाई कई पक्षों, जिसमें राज्य सरकार और प्रभावित कर्मचारी शामिल थे, की याचिकाओं पर आधारित थी.
31 जनवरी 2025: ED की चार्जशीट
ED ने 20 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की और 163 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की. इसमें बिचौलिए प्रसन्ना रॉय और उनकी कंपनी शामिल थीं.
10 फरवरी 2025: फैसला सुरक्षित
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा. कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए और धोखाधड़ी के सबूतों पर विचार किया.
3 अप्रैल 2025: सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए 25,753 नियुक्तियों को रद्द कर दिया. इसे "सिस्टमिक फ्रॉड" करार देते हुए कोर्ट ने कहा कि प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हेरफेर हुआ. राज्य सरकार को 3 महीने में नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया गया. सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, राज्य सरकार को जुलाई 2025 तक नई भर्ती प्रक्रिया पूरी करनी होगी. यह प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होने की उम्मीद है, जिसमें पिछले अनुभवों से सबक लिया जाएगा.
बेदाग उम्मीदवारों का क्या होगा?
पश्चिम बंगाल शिक्षक और अन्य कर्मचारियों की भर्ती परीक्षा का परिणाम 27 नवंबर 2017 को घोषित हुआ था. नियुक्ति पाने वाले 25 हजार से ज्यादा उम्मीदवार नौकरी कर रहे थे. अब सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दी हैं. हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि प्रक्रिया में चयनित जो उम्मीदवार धोखाखड़ी और फर्जीवाड़े की श्रेणी से बाहर हैं वे उन नौकरियों के लिए फिर से अप्लाई कर सकते हैं, जो वे छोड़कर आए थे. कोर्ट ने कहा कि उन्हें अपने पिछले पदों पर आवेदन करने की अनुमति फिर से दी जानी चाहिए. साथ ही पिछली और इस भर्ती के बीच के समय को सेवा में विराम नहीं माना जाएगा.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पड़ेगा असर?
शिक्षक भर्ती घोटाले का प्रभाव अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections 2026) पर भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है. कुछ लोगों का मानना है कि यह घोटाला ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार की विश्वसनीयता पर गहरा असर डाल सकता है. विपक्षी दल, खासकर BJP, इसे 2026 के विधानसभा चुनाव में प्रमुख मुद्दा बना सकते हैं.