Weather Update in India: देश के कई राज्यों में इस साल मार्च के महीने से ही गर्मी का असर दिखाई देने लगा है. राजस्थान के कुछ इलाकों में पारा 41 डिग्री पहुंच गया है, जबकि मुंबई में 39 डिग्री सेल्सियर की गर्मी पड़नी शुरू हो गई है. समय से पहले बढ़ती गर्मी पर मौसम विभाग ने चिंता जताई है. IMD ने अपने बयान में कहा, "गर्मी की इस स्थिति का कारण पश्चिमी भारत के ऊपर अरब सागर और हिंद महासागर से पर्याप्त नमी वाली हवाओं और मध्य-पूर्व (पश्चिम एशिया) से चलने वाली शुष्क हवाओं की अनुपस्थिति में एंटी साइक्लोनिक सर्कुलेशन है." उन्होंने यह भी बताया कि यह सीज़न की पहली हीट वेव है. आइये जानते हैं क्या होता है एंटी साइक्लोनिक सर्कुलेशन.
What is Anti-cyclonic circulation?
एंटी साइक्लोनिक सर्कुलेशन (Anti-cyclonic circulation) का मतलब असल में हवा का बिखरना है. जैसा कि इसका नाम है, एंटी-साइक्लोन में हवा की दिशाएं साइक्लोनिक हवाओं की दिशा के विपरीत होती हैं. साइक्लोनिक सर्कुलेशन में लो-प्रेशर एरिया बनता है और हवाएं आपस में मिलकर उठती हैं. वहीं, एंटी-साइक्लोनिक साइक्लोनिक सर्कुलेशन में हाई-प्रेशर एरिया बनता है जिसमें हवाएं बिरखती हैं और नीचे गिरती हैं.
एंटी साइक्लोन के बीच के हिस्से में हाई-प्रेशर के चलते एक तेज हवा का ब्लास्ट ऊपर से नीचे की तरफ होता है और गर्म हवाएं नीचे आती हैं. हवा कंप्रेस होने की वजह से और गर्म होती है और उसकी नमी भी कम होती है. गर्म हवाएं हाई-प्रेशर एरिया से लो-प्रेशर एरिया की तरफ बढ़ती हैं. बता दें कि नॉर्दन हेमिस्फियर में एंटी साइक्लोनिक हवा क्लॉकवाइस (clockwise) चलती हैं, जबकि साउदर्न हेमिस्फियर में (anti-clockwise) चलती हैं.
मौसम विभाग (IMD) ने देश में बढ़ती गर्मी का कारण पश्चिमी भारत में बन रहे एंटी साइक्लोनिक सर्कुलेशन को बताया है. राजधानी दिल्ली में अभी गर्मी बढ़ने का अनुमान है. मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल, उत्तर प्रदेश, राजस्थान समेत अन्य उत्तरी राज्यों में अभी बारिश की कोई संभावना नहीं है.