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क्या है Queen's Counsel, जिसे कुलभूषण जाधव केस में नियुक्त करना चाहता है भारत

क्वींस काउंसल नियुक्त किए जाने का चलन यूनाइटेड किंगडम में है. क्वींस काउंसल वो वकील होता है जो यूनाइटेड किंगडम की महारानी द्वारा चुना जाता है. अगर, किंगडम पर किसी पुरुष राजा का अधिकार हो तो ऐसी स्थिति में चुने जाने वाले काउंसल को 'किंग्स काउंसल' कहा जाता है.

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क्वींस काउंसल (फोटो-thegazette.co.uk)
क्वींस काउंसल (फोटो-thegazette.co.uk)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • यूके में क्वींस काउंसल एक वकील ही होता है
  • महारानी करती हैं क्वींस काउंसल की नियुक्ति
  • कानून की दुनिया में सम्मान का प्रतीक है क्वींस काउंसल

पाकिस्तान कुलभूषण जाधव केस की पैरवी करने के लिए किसी भारतीय वकील को इजाजत नहीं दे रहा है. पाकिस्तान का कहना है कि जाधव की तरफ से वही वकील पेश हो सकता है जिसके पास पाकिस्तान में प्रैक्टिस करने का लाइसेंस हो. दूसरी तरफ भारत का कहना है कि भारतीय वकील के होने पर ही इस केस में सही ट्रायल हो सकेगा. टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अब जाधव केस में एक क्वींस काउंसल(Queen's Counsel) नियुक्त करना चाहता है.

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अब सवाल ये है कि क्वींस काउंसल क्या है और जाधव केस के लिए भारत ऐसा क्यों चाहता है. वैसे आम भाषा में कहें तो क्वींस काउंसल एक वकील ही होता है, लेकिन ये वकील बेहद खास होता है. 

क्वींस काउंसल नियुक्त किए जाने का चलन यूनाइटेड किंगडम में है. क्वींस काउंसल वो वकील होता है जो यूनाइटेड किंगडम की महारानी द्वारा चुना जाता है. अगर, किंगडम पर किसी पुरुष राजा का अधिकार हो तो ऐसी स्थिति में चुने जाने वाले काउंसल को 'किंग्स काउंसल' कहा जाता है. लेकिन चूंकि मौजूदा वक्त में यूनाइटेड किंगडम की कमान क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय के पास है, लिहाजा काउंसल को 'क्वींस काउंसल' कहा जाता है. 

1995 से पहले सिर्फ बैरिस्टर ही क्वींस काउंसल नियुक्त किए जाते थे लेकिन बाद में नियम बदले और सॉलिसिटर भी क्वींस काउंसल बनाए जाने लगे. thegazette.co.uk पर क्वींस काउंसल से जुड़ी जानकारी साझा की गई हैं.

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दरअसल, यहां लीगल पेशा परंपरागत तौर पर दो हिस्सों में बंटा है. बैरिस्टर और सॉलिसिटर. बैरिस्टर वो होता है जो कानूनी सलाह देने के साथ कोर्ट रूम में अपने मुवक्किल के लिए बहस भी करता है. जबकि सॉलिसिटर की भूमिका इससे ज्यादा बड़ी मानी जाती है. माना जाता है कि सॉलिसिटर अलग-अलग किस्म के कानूनों पर अपनी सेवाएं देते हैं और आमतौर पर कोर्ट में पेश नहीं होते हैं. 

हर साल होता है चयन
पहली बार 1597 में क्वींस काउंसल की नियुक्ति की गई थी. क्वीन एलिजाबेथ प्रथम ने ये नियुक्ति की थी. सर फ्रांसिस बैकन पहले क्वींस काउंसल बनाए गए थे. वकीलों की काबिलियत और महारत को देखते हुए हर साल कुछ चुनिंदा पेशवरों को क्वींस काउंसल बनाया जाता है. इनकी एक खास पोशाक भी होती है, जो अक्सर फिल्मों में भी देखने को मिलती है. एक छोटा विग, विंग कॉलर, बैंड्स और सिल्क गाउन क्वींस काउंसल की यूनिफॉर्म का हिस्सा होते हैं. कोर्ट रूम में भी सम्मामस्वरूप क्वींस काउंसल को पहली पंक्ति में स्थान दिया जाता है. 10 विशेषज्ञों का पैनल क्वींल काउंसल के लिए इंटरव्यू करता है. यूनाइटेड किंगडम के लॉर्ड चांसलर की सिफारिश पर क्वींस काउंसल नियुक्त किए जाते हैं. 

क्वींस काउंसल का दर्ज मिलना किसी भी वकील के एक सम्मान की बात होती है. भारत के वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे को इसी साल जनवरी में क्वींस काउंसल नियुक्त किया गया था. बतौर वकील साल्वे को 2013 में इंग्लैंड एंड वेल्स के बार में एंट्री मिली थी यानी उनकी वकालत शुरू हुई थी. जबकि भारत में साल्वे लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं. दिल्ली हाई कोर्ट ने 1992 में साल्वे को सीनियर एडवोकेट का दर्ज दिया था. 

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साल्वे वही वकील हैं जिन्होंने इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में कुलभूषण केस की पैरवी की और पाकिस्तान को झुकना पड़ा. हालांकि, पाकिस्तान अब भी हर मुमकिन कोशिश कर रहा है कि उसके यहां कैद कुलभूषण जाधव किसी भी हाल में छूट न पाए. दूसरी तरफ भारत ने अपने नागरिक और एक पूर्व अधिकारी को सही सलामत वापस लाने के लिए पूरे जोर लगाए हुए हैं. अब जबकि पाकिस्तान ने भारतीय वकील को परमिशन देने से मना कर दिया है तो भारत ने अब क्वींस काउंसल नियुक्त करने की बात उठाई है. माना जा रहा है कि क्वींस काउंसल की नियुक्ति से इस गतिरोध पर कोई समाधान निकल सकता है. 
 

 

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