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Saraswati Samman 2021: दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रह चुके हैं साहित्‍यकार रामदरश मिश्र, प्रतिष्ठित सरस्‍वती सम्‍मान के लिए हुए नामित

Saraswati Samman 2021: सरस्वती सम्मान देश के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक पुरस्कारों में से एक है. यह हर साल किसी भारतीय नागरिक द्वारा किसी भी भारतीय भाषा में लिखे गए और पिछले 10 वर्षों के भीतर प्रकाशित उत्कृष्ट साहित्यिक कृति को दिया जाता है.

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Ramdarash Mishra:
Ramdarash Mishra:
स्टोरी हाइलाइट्स
  • रामदरश मिश्र को मिलेगा सरस्‍वती सम्‍मान
  • कविता 'मैं तो यहां हूं' के लिए मिलेगा सम्मान

Ramdarash Mishra Saraswati Samman 2021: केके बिड़ला फाउंडेशन ने सोमवार, 4 अप्रैल 2022 को घोषणा की है कि प्रसिद्ध कवि और साहित्यकार प्रोफेसर रामदरश मिश्र को उनके कविता संग्रह 'मैं तो यहां हूं' के लिए प्रतिष्ठित सरस्वती सम्मान, 2021 से सम्मानित किया जाएगा. 1991 में स्थापित, सरस्वती सम्मान देश के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक पुरस्कारों में से एक है. यह हर साल किसी भारतीय नागरिक द्वारा किसी भी भारतीय भाषा में लिखे गए और पिछले 10 वर्षों के भीतर प्रकाशित उत्कृष्ट साहित्यिक कृति को दिया जाता है. इसमें एक प्रशस्ति पत्र, एक पट्टिका और 15 लाख का नकद पुरस्कार दिया जाता है. सम्‍मान प्राप्तकर्ता का चयन एक चयन समिति द्वारा किया जाता है, जिसके वर्तमान प्रमुख लोकसभा सचिवालय के पूर्व महासचिव डॉ सुभाष सी कश्यप हैं.

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कौन हैं रामदरश मिश्र?
15 अगस्त, 1924 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के डुमरी गांव में जन्मे मिश्र ने हिंदी साहित्य की कई शाखाओं में अपना योगदान दिया है. अपने दशकों के लंबे करियर में, 98 वर्षीय मिश्र ने 32 कविता संग्रह, 15 उपन्यास, 30 लघु-कथा संग्रह, साहित्यिक आलोचना की 15 पुस्तकें, निबंधों के चार संग्रह, यात्रा वृतांत और कई संस्मरण लिखे हैं. उन्होंने विभिन्न मंत्रालयों में विभिन्न हिंदी सलाहकार समितियों के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में भी काम किया है और दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग से प्रोफेसर के रूप में सेवानिवृत्त हुए हैं.

'मैं तो यहां हूं' में, साहित्यकार आंतरिक जीवन के विभिन्न पहलुओं, सामाजिक सरोकारों, सांप्रदायिकता, भ्रष्टाचार, मानवीय दृष्टिकोण, दलितों का शोषण, शहरों की बेचैनी, मौसम की उमंग और जलवायु संबंधी चिंताओं को सामने लाता है. यह कविता संग्रह 2015 में प्रकाशित हुई थी. कवि मिश्र लिखते हैं, "मैंने कई शैलियों में लिखा है. पाठ के जिस भी रूप से मैं प्रभावित हुआ, मैंने अपनी यात्रा जारी रखी. यात्रा कभी छोटी तो कभी लंबी भी होती थी लेकिन अब मेरे पास लंबी पटरियों को पार करने के लिए ज्यादा ऊर्जा नहीं बची है. इसलिए अब मेरे भाव या तो एक छोटी कविता हैं या एक डायरी लिख रहे हैं, जो अंततः इस पुस्तक को आकार दे रहे हैं."

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