जब आपको कोई और भली-बुरी बातें कहता है तो काफी बुरा लगता है. इस चीज पर आप प्रतिक्रिया भी देते हैं. कितनी बार होता होगा कि कोई कुछ ऐसा कह जाता है, जिस कारण आपको बहुत परेशानी होती है. हालांकि, दूसरों की बात पर प्रतिक्रिया देकर हम धीरे-धीरे उस बात को भूल जाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं आप ही कई बार खुद को नुकसान पहुंचा रहे होते, जिसका आपको पता भी नहीं चलता. इस व्यवहार को अंग्रेजी में सेल्फ-सेबोटेज या सेल्फ अब्यूस कहते हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि आपकी कुछ आदतें जितना आपको नुकसान पहुंचाती हैं, उतना शायद ही कोई और आपको नुकसान पहुंचा सकता है. आइए जानते हैं इसके बारे में.
जब सेल्फ-सेबोटेज या सेल्फ अब्यूस करने लगते हैं इसका असर आपकी मेंटल से लेकर इमोशनल हेल्थ तक पर पड़ता है. आप ऐसे मोड़ पर आ जाते हैं, जहां आप अपना कॉन्फिडेंस खोने लगते हैं. जीवन में कुछ भी पाने के लिए व्यक्ति में कॉन्फिडेंस होना बहुत जरूरी है. इसलिए जरूरत है कि आप इस चीज की पहचान करें कि कहीं आप खुद के कॉन्फिडेंस और मेंटल हेल्थ को खुद ही तो नुकसान तो नहीं पहुंचा रहे. हम आपको 6 ऐसी गलतियां या आदतें बता रहे हैं जो आपके सेल्फ कॉन्फिडेंस को कम कर रही है.
बात-बात पर खुद पर संदेह करना: कोई दूसरा अगर आपकी काबीलियत पर संदेह करता है तो उसे आप अपने काम के जरिए आसानी से गलत ठहरा सकते हैं, लेकिन अगर आप खुद पर ही संदेह करते हैं तो आप किसी भी काम को बेहतरी से नहीं कर पाएंगे. आप जो सोचते हैं या करते हैं अगर उसपर संदेह रखेंगे तो जीवन में कुछ भी पाना आपके लिए बहुत मुश्किल हो सकता है. इसको उदाहरण से समझते हैं- मान लीजिए आप किसी ऑफिस में काम कर रहे हैं, आपके पास टीम के लिए बहुत बढ़िया आइडिया है, लेकिन उसे आप अपने सीनियर से ये सोच के नहीं शेयर करते कि ये तो बहुत ही बेवकूफी वाला सुझाव है. ऐसा करने की वजह से आप कभी भी अपने विचारों को प्रकट ही नहीं कर पाएंगे. इस कारण से हो सकता है आप कई ऐसे मौके गंवा दें, जो आपके जीवन को बदल सकते हैं. इसलिए जरूरी है कि आप खुद के विचारों और एक्शन पर संदेह न करें.
अवास्तविक उम्मीदें: वैसे तो उम्मीदें इंसान को आशा से भर देती हैं, लेकिन जब आप खुद से अवास्तविक उम्मीदें रखने लगते हैं तो इसका असर ये होता है कि आप सेल्फ कॉन्फिडेंस खोने लगते हैं. आइए समझते हैं कैसे. मान लिजिए आप खुद को ये कहते हैं कि आप दो हफ्ते में 10 किलो वजन कम कर लेंगे. अगर देखा जाए तो ये अचीव करना एक अवास्तविक उम्मीद ही है. जब आप खुद से ये उम्मीद करते हैं और उसे पूरा नहीं कर पाते तो आप धीरे-धीरे खुद पर संदेह करना शुरू करते हैं, जिसका असर आपके कॉन्फिडेंस पर पड़ता है.
खुद को भला-बुरा कहना: एक स्टडी में पता चला है कि जब आप खुद को भला-बुरा कहना शुरू करते हैं तो इसका बहुत बुरा असर आपकी मेंटल हेल्थ पर पड़ता है. कई बार होता है कि आपने कोई काम किया, किसी वजह से उस काम का नतीजा आपको अच्छा नहीं मिला. अगर इसकी वजह से आप ये कहने लगें कि मैं ही बेवकूफ हूं या मैनें ही गलत किया इस वजह से काम बिगड़ा तो आप खुद की मेंटल हेल्थ को नुकसान पहुंचा रहे हैं. आपको समझना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति परफेक्ट नहीं होता, किसी से भी गलती हो सकती है. इसके लिए खुद को या किसी को जिम्मेदार ठहराना जरूरी नहीं होता.
खुद को कम आंकना: क्या आपके साथ ऐसा होता है कि आप किसी काम के शुरू होने से पहले ही खुद को ये बताने लगते हैं कि ये 'आप नहीं कर पाएंगे', 'ये आपके बस का काम ही नहीं हैं?' अगर हां, तो आप खुद के कॉन्फिडेंस को ही नुकसान पहुंचा रहे हैं. किसी काम के शुरू होने से पहले ही उसके निगेटिव नतीजे सोच लेना आपको कभी किसी काम को अच्छे से पूरा नहीं करने देगा. अगर आपमें ये आदत है तो इसे जल्द से जल्द बदलिए.
आप जैसे हैं वैसे खुद को अपनाते नहीं: सेल्फ-अब्यूस का ये एक बड़ा संकेत है कि आप खुद को, आप जैसे हैं वैसे नहीं अपनाते. हो सकता है कि आपको कम बोलना पसंद है, लेकिन जब आप अपने आसपास ऐसे लोग देखते हैं जो किसी से कभी भी बात कर सकते हैं तो आप खुद को सवाल करने लगते हैं कि मैं ऐसा क्यों नहीं हूं? मैं क्यों इस तरह से बात नहीं कर पाता? अगर आप ऐसा करते हैं तो बता दें, आप खुद को नुकसान पहुंचा रहे हैं. आप जैसे हैं, वैसे ही खुद को अपनाएं. किसी को देखकर खुद पर सवाल न उठाएं.