लोकसभा में एंटी ट्रैफिकिंग बिल पेश हो गया है. महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने लोकसभा से व्यक्तियों की तस्करी (रोकथाम, सुरक्षा और पुनर्वास) विधेयक 2018 पारित करा लिया.
बंधुआ मजदूरी, सरोगेसी, बाल मजदूरी और बच्चों के अधिकारों के लिए ये बिल काफी अहम है. जहां ये बिल बाकी लोगों के लिए फायदेमंद हैं वहीं सेक्स वर्कर्स के लिए ये एक बड़ी समस्या लेकर आ सकता है. इस बिल का असर उनके काम पर भी पड़ सकता है.
दरअसल इस बिल में लिखा है कि तस्करी कर लाए लोगों में से कोई एड्स फैलाएगा तो उस पर भी ये क़ानून लागू होगा. साफ है कि इशारा सेक्स वर्कर्स की तरफ है, वरना मानव तस्करी के कानून में एड्स शब्द क्यों डाला जाएगा.
जानें- क्या है एंटी ट्रैफिकिंग बिल: मानव तस्करी के मामलों की जांच
के लिए इस बिल के जरिए एक राष्ट्रीय एंटी-ट्रैफिकिंग ब्यूरो की स्थापना का
प्रस्ताव लोकसभा में रखा गया. व्यक्तियों की तस्करी (रोकथाम, सुरक्षा
और पुनर्वास) बिल, 2018 में तस्करी के हर पहलु को परिभाषित किया गया है.
तस्करी के नए कानून के अनुसार इसमें जबरन मज़दूरी, भीख मांगना, समय से पहले
जवान करने के लिए किसी व्यक्ति को इंजेक्शन या हॉर्मोन देना, विवाह या
विवाह के लिए छल या विवाह के बाद महिलाओं और बच्चों की तस्करी शामिल है.
वहीं इस बिल के तहत व्यक्तियों की खरीद-फरोख्त को पहली बार अपराध की श्रेणी में लाया जा रहा है.
कैसा होगा नया कानून: पीड़ितों का नाम गोपनीय रखा जाएगा, एक साल में पूरी होगी अदालत में सुनवाई.
मेनका गांधी ने कहा कि इस बिल के तहत पीड़ितों के पुनर्वास के लिए एक फंड भी बनाया जाएगा. उन्होंने कहा कि इस बिल के तहत अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई है और लापरवाही के मामलों में सख्ती से कार्रवाई की जाएगी.
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार- सेक्स वर्कर इन नए कानून से नाराज हैं. उनका कहना है कि नए कानून लाने से पहले न रिसर्च की गई और न ही कोई स्टडी.
कांग्रेस सांसद थरूर ने कहा कि सेक्स वर्कर को भी इस बिल में निशाना बनाया गया है जो कि मजबूरी में इस काम में लगी हुई हैं. बिल में उनकी सुरक्षा के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है.
वहीं सेक्स वर्कर्स का मानना है कि ट्रांसजेंडर और सेक्स वर्कर्स को इस नए क़ानून के बाद ज्यादा परेशान किया जाएगा.